PM मोदी का अर्जेंटीना दौरा: क्यों ये सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि इतिहास बनने वाली है?
अरे भाई, 57 साल का इंतज़ार खत्म! प्रधानमंत्री मोदी ने अर्जेंटीना की जो यात्रा शुरू की है, वो सच में ऐतिहासिक है। सोचो – आखिरी बार 1968 में इंदिरा गांधी वहाँ गई थीं। तब से लेकर आज तक कोई भारतीय PM अर्जेंटीना नहीं गया। अब सवाल यह है कि इस यात्रा में ऐसा क्या खास है? असल में, ये सिर्फ दो नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति का एक बड़ा पैंतरा है। राष्ट्रपति जेवियर मिलेई से बातचीत होगी, व्यापार से लेकर रक्षा तक – हर मुद्दे पर गंभीर चर्चा होगी। और हाँ, लैटिन अमेरिका में भारत की बढ़ती ताकत का ये एक साफ़ संकेत है।
इतिहास की बात करें तो…
देखिए, भारत और अर्जेंटीना के रिश्ते 1949 से चले आ रहे हैं। लेकिन यहाँ दिलचस्प बात ये है कि ये रिश्ता ज्यादातर कागजों तक ही सीमित रहा। हालांकि, व्यापार के मामले में अर्जेंटीना हमारा अहम पार्टनर रहा है – खासकर सोयाबीन और तेल के कारोबार में। पिछले कुछ सालों में तो रक्षा और अंतरिक्ष जैसे सेक्टर्स में भी साथ काम करना शुरू किया है। पर सच कहूँ तो, इतने लंबे अरसे तक कोई high-level visit न होना थोड़ा अजीब ही लगता है। शायद अब ये बदलने वाला है!
तो फिर इस बार क्या-क्या होगा?
असल में ये यात्रा कई मायनों में खास है। पहली बात – लिथियम! जी हाँ, अर्जेंटीना के पास दुनिया के सबसे बड़े लिथियम भंडार हैं, और हमारी EV इंडस्ट्री के लिए ये किसी सोने की खान से कम नहीं। दूसरा, कृषि व्यापार… हम उनसे सोयाबीन और सूरजमुखी तेल का बड़ा आयात करते हैं। तीसरा, रक्षा सहयोग – संयुक्त अभ्यास और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर बातचीत होगी। और चौथा, G20 और UNSC जैसे प्लेटफॉर्म्स पर साथ काम करने की संभावनाएँ। साथ ही, वहाँ बसे भारतीयों से मिलकर PM मोदी एक पर्सनल कनेक्शन भी बनाएँगे। बिल्कुल वैसे ही जैसे अमेरिका के ‘Howdy Modi’ इवेंट में हुआ था।
क्या कह रही है दुनिया?
देखा जाए तो इस यात्रा को लेकर हर तरफ सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। भारत का विदेश मंत्रालय तो इसे लैटिन अमेरिका में हमारी बढ़ती पकड़ बता रहा है। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने तो साफ कह दिया – “भारत के साथ रिश्ते हमारी प्राथमिकता हैं।” एक्सपर्ट्स की मानें तो ये ‘Global South’ की नीति को और मजबूती देगा। और बिजनेस सेक्टर? वो तो FTA पर बातचीत शुरू करने की माँग कर रहा है। सच कहूँ तो, ये सब देखकर लगता है कि दोनों देश गंभीरता से आगे बढ़ना चाहते हैं।
आगे की राह: क्या उम्मीद करें?
अब सवाल ये कि इस यात्रा के बाद क्या होगा? मेरी नज़र में तीन बड़ी चीज़ें हो सकती हैं। पहला – FTA पर बातचीत शुरू हो सकती है, जो हमारे व्यापार को बढ़ावा देगा। दूसरा – लिथियम माइनिंग में भारतीय कंपनियों की एंट्री, जो EV रेवोल्यूशन के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। तीसरा – रक्षा और अंतरिक्ष में joint projects की घोषणा। और हाँ, एक और दिलचस्प बात – अर्जेंटीना BRICS में शामिल होना चाहता है, और भारत उसका समर्थन कर सकता है। सच कहूँ तो, ये यात्रा निश्चित तौर पर भारत-अर्जेंटीना रिश्तों को एक नई दिशा देगी। क्या पता, आने वाले सालों में हम अर्जेंटीना को हमारे करीबी साझेदारों में गिनने लगें!
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Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com