पीएम मोदी के विदेश दौरे पर दिए गए उपहार: चांदी का शेर, राम मंदिर मॉडल और मधुबनी पेंटिंग्स की कहानी
अभी-अभी पीएम मोदी ने त्रिनिदाद एंड टोबैगो की यात्रा के दौरान कुछ ऐसे उपहार दिए जो सचमुच खास थे। सोचिए, सरयू नदी का पवित्र जल, अयोध्या के राम मंदिर की चांदी की प्रतिकृति, मधुबनी पेंटिंग्स और वो भी एक चांदी का शेर! ये सिर्फ उपहार नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति की एक झलक थी। और हां, ये दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा भी करते हैं।
क्या ये सिर्फ उपहार थे या कुछ और?
असल में देखा जाए तो त्रिनिदाद एंड टोबैगो में भारतीय मूल के लोगों की अच्छी-खासी आबादी है। तो ये उपहार सिर्फ फॉर्मैलिटी नहीं थे। मोदी जी ने जान-बूझकर ऐसी चीजें चुनीं जो भारत की आत्मा को दिखाती हैं। वैसे भी, अब तो हर कोई जानता है कि मोदी जी की विदेश नीति में soft power का बड़ा रोल है। और ये उपहार? ये तो जैसे भारत की संस्कृति का सबसे खूबसूरत नमूना थे।
हर उपहार में छिपा है एक संदेश
अब जरा इन उपहारों को गौर से देखिए। सरयू नदी का पानी – सिर्फ पानी नहीं, बल्कि अयोध्या की पवित्रता का प्रतीक। राम मंदिर का चांदी का मॉडल? वाह! ये तो हिट हो गया। सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं, बल्कि भारतीय कारीगरी का नमूना भी। और मधुबनी पेंटिंग्स? अरे, ये तो हमारे बिहार की शान हैं – नैचुरल कलर्स और जटिल डिजाइन के साथ।
लेकिन सबसे मजेदार बात? चांदी का शेर! जानते हैं क्यों? क्योंकि त्रिनिदाद एंड टोबैगो में भी शेर को खास माना जाता है। तो देखा आपने, कैसे एक छोटी सी चीज में इतना गहरा मतलब छुपा हो सकता है!
कैसी रही प्रतिक्रियाएं?
त्रिनिदाद की PM कमला प्रसाद बिसेसर तो इन उपहारों से भावुक हो गईं। उन्होंने खुद कहा कि ये सिर्फ उपहार नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच एक भावनात्मक जुड़ाव है। और सोशल मीडिया? वहां तो खूब चर्चा हुई। कुछ लोगों ने इसे भारत की soft power का बेहतरीन उदाहरण बताया, तो कुछ ने कहा कि ये पारंपरिक राजनय से हटकर है। सच कहूं तो, ये एक तरह से राजनीति और संस्कृति का बेहतरीन मेल था।
आगे क्या हो सकता है?
अब सवाल यह है कि भविष्य में क्या? विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के सांस्कृतिक आदान-प्रदान से भारत की वैश्विक छवि मजबूत होगी। और सच भी तो है – कला और संस्कृति के जरिए रिश्ते बनाने का यह तरीका कितना खूबसूरत है! हो सकता है आने वाले समय में और देशों के साथ ऐसे ही सांस्कृतिक एक्सचेंज हों। क्योंकि अंत में तो… संस्कृति ही है जो दिलों को जोड़ती है। है न?
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अब देखिए, प्रधानमंत्री मोदी जब भी विदेश जाते हैं, उनके साथ जाने वाले तोहफ़े किसी चर्चा से कम नहीं होते। सच कहूँ तो, ये सिर्फ़ उपहार नहीं होते – ये तो भारत की पूरी कहानी एक डिब्बे में पैक करके देने जैसा है! चाहे वो चांदी का शेर हो या राम मंदिर का मॉडल, हर चीज़ में हमारी संस्कृति की झलक साफ़ दिखती है। और हाँ, मधुबनी पेंटिंग्स तो जैसे कैनवास पर उतरा हुआ भारत है।
पर सवाल यह है कि क्या ये सिर्फ़ तोहफ़े भर हैं? बिल्कुल नहीं! असल में ये हमारे देश का global image बनाने का एक स्मार्ट तरीका है। जब कोई विदेशी नेता इन्हें देखता है, तो उसके मन में भारत की एक जीवंत तस्वीर बन जाती है – और यही तो चाहिए न? हालांकि, कुछ लोग कहेंगे कि ये सब दिखावा है… लेकिन ईमानदारी से कहूँ तो, कूटनीति में ऐसे symbolic gestures का अपना ही महत्व होता है।
सबसे मजेदार बात? ये उपहार दो काम एक साथ करते हैं – एक तरफ तो हमारे diplomatic relations को मजबूती देते हैं, वहीं दूसरी तरफ दुनिया को भारत की असली ताकत दिखाते हैं। और वो ताकत है हमारी विविधता में एकता! बस फर्क इतना है कि अब ये बात हम कागजों पर नहीं, बल्कि चांदी, कपड़े और कला के जरिए बता रहे हैं। क्या आपको नहीं लगता कि ये ज्यादा असरदार तरीका है?
Source: NDTV Khabar – Latest | Secondary News Source: Pulsivic.com