ओडिशा से कोटा तक: जब सत्ता का नशा सिर चढ़कर बोलता है!
अरे भाई, क्या बताऊँ… आजकल तो लगता है सत्ता का नशा कुछ ज्यादा ही सिर चढ़कर बोल रहा है। ओडिशा हो या कोटा, हर जगह अधिकारियों की पिटाई का सिलसिला चल निकला है। सच कहूँ तो ये सिर्फ दो अलग-अलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक खतरनाक ट्रेंड की शुरुआत है। एक तरफ ओडिशा में नेताओं ने कमिश्नर साहब को ऑफिस के अंदर ही धुन डाला, तो दूसरी ओर कोटा में थानेदार साहब ने एक बेचारे दुकानदार को सड़क पर ही ऐसा थप्पड़ जड़ा कि वो बेहोश हो गया। सवाल तो यह उठता है – क्या अब अधिकारी और नेता अपनी पावर का इस्तेमाल जनता को दबाने के लिए कर रहे हैं?
क्या हुआ था असल में? पूरी कहानी
देखिए, ओडिशा वाला मामला तो जनसुनवाई से शुरू हुआ था। बात-बात में बहस बढ़ी और फिर क्या? नेताओं का गुस्सा कमिश्नर साहब पर निकला। वीडियो में तो देखकर ही डर लगता है – एक नहीं, कई लोग मिलकर उन्हें पीट रहे हैं! वहीं कोटा में तो सीन ही अलग था। थानेदार ने दुकान हटाने को कहा, गर्मागर्मी हुई, और फिर… धड़ाधड़! सीधे थप्पड़ का स्वागत। है ना हैरान कर देने वाली बात? दोनों ही केस में एक चीज कॉमन है – सत्ता और अधिकारियों की टकराहट, और उसकी कीमत चुका रहा है आम आदमी।
अब तक का अपडेट: क्या कार्रवाई हुई?
तो सुनिए… ओडिशा पुलिस ने तो केस दर्ज कर दिया है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। वहीं कोटा में थानेदार को सस्पेंड कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर ये वीडियोस आग की तरह फैले और लोगों का गुस्सा भी। लोग पूछ रहे हैं – क्या अब कानून सिर्फ आम जनता के लिए है? नेताओं और अधिकारियों के लिए अलग कानून बन गया है क्या?
राजनीतिक रिएक्शन: किसने क्या कहा?
राजनीति वालों ने तो अपना-अपना राग अलापना शुरू कर दिया। कांग्रेस वाले ओडिशा वाले केस को “बीजेपी की गुंडागर्दी” बता रहे हैं, वहीं बीजेपी ने कोटा वाले मामले में पुलिस की कार्रवाई को गलत ठहराया है। मजे की बात ये कि ओडिशा केस पर बीजेपी की तरफ से कोई ऑफिशियल स्टेटमेंट ही नहीं आया! आम जनता और एनजीओ वालों ने इन घटनाओं की खूब निंदा की है। सोशल मीडिया पर तो बवाल मचा हुआ है – हर कोई सवाल पूछ रहा है, हर कोई गुस्सा जता रहा है।
अब आगे क्या? क्या कुछ बदलेगा?
असली सवाल तो यही है ना? क्या ओडिशा में नेताओं के खिलाफ कोई एक्शन होगा, या फिर ये मामला भी राजनीति के दलदल में दफन हो जाएगा? कोटा में थानेदार के सस्पेंड होने के बाद क्या कोई सिस्टमैटिक चेंज आएगा? सच तो ये है कि ये घटनाएं सत्ता और अधिकारियों के बीच बढ़ते टेंशन की ओर इशारा करती हैं। अगर अभी नहीं संभले, तो हालात और भी बिगड़ सकते हैं। सोचिए… क्या हम ऐसे ही समाज में रहना चाहते हैं? जहां सत्ता का नशा इतना हावी हो जाए कि कानून की कोई अहमियत ही न रहे? खैर… वक्त ही बताएगा।
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ओडिशा से लेकर कोटा तक, ये वीडियो वायरल हो रहे हैं ना? अधिकारियों की पिटाई… सिर्फ कुछ थप्पड़ों की बात नहीं है यार। असल में, ये तो वो आईना है जो हमारे सिस्टम की हकीकत दिखा रहा है। सच कहूं तो, Power और Responsibility का ये खेल बहुत पुराना है। लेकिन अब तो हद हो गई!
Game of Slaps या System का Failure?
देखिए, मुद्दा सिर्फ थप्पड़ मारने का नहीं है। अरे भाई, जब तक नेता और अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों से भागते रहेंगे, तब तक ये सिलसिला थमने वाला नहीं। ठीक वैसे ही जैसे बिना ड्राइवर की गाड़ी… दिशाहीन।
और सबसे बड़ी बात? Public और Administration दोनों को मिलकर काम करना होगा। नहीं तो ये Black Spot हमारी Democracy पर और गहरा होता जाएगा। सोचिए, क्या हम सच में यही चाहते हैं?
एक तरफ तो हम ‘सुशासन’ की बात करते हैं, दूसरी तरफ ये हालात… विरोधाभास नहीं तो और क्या है?
सच बात तो ये है कि अब वक्त आ गया है कि हम इस Culture को बदलें। वरना… अरे, आप ही बताइए, कब तक चलेगा ये सब?
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com