पृथ्वी-2 मिसाइल: जानिए क्यों है ये भारत का गेम-चेंजर हथियार?
अरे भाई, भारत की ये स्वदेशी मिसाइल तो कमाल की चीज है ना? पृथ्वी-2 इन दिनों फिर से सुर्खियों में है, और सही कारणों से। DRDO (Defence Research and Development Organisation) ने हाल ही में जो नई जानकारियाँ जारी की हैं, उन्हें देखकर तो लगता है कि हमारे वैज्ञानिकों ने सच में कमाल कर दिया। सोचिए – लंबी दूरी, बेहद तेज़ रफ्तार और निशाने पर सटीक मार… ये तीनों क्वालिटीज जब एक साथ मिल जाएं तो क्या कहने!
पीछे की कहानी: कैसे शुरू हुआ ये सफर?
देखा जाए तो पृथ्वी-2 की कहानी भारत के लिए गर्व की बात है। 1996 में DRDO ने जब इसे विकसित किया था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ये मिसाइल इतनी अहम हो जाएगी। असल में ये पृथ्वी सीरीज़ का स्टार प्लेयर है – पृथ्वी-1 और पृथ्वी-3 भी हैं, लेकिन पृथ्वी-2 का अपना अलग ही मुकाम है। सवाल यह है कि ऐसा क्यों? जवाब सीधा है – ये मिसाइल सही मायनों में बैलेंस्ड है। न ज्यादा छोटी रेंज, न ज्यादा लंबी… बिल्कुल गोल्डीलॉक्स ज़ोन में!
तकनीकी डिटेल्स: नंबर्स जो दिलचस्प हैं
अब थोड़ा टेक्निकल चर्चा कर लेते हैं। ये मिसाइल 250-350 किमी तक मार कर सकती है – मतलब दिल्ली से जयपुर की दूरी तक! और स्पीड? सुनकर चौंक जाएंगे – Mach 8! यानी ध्वनि की गति से आठ गुना तेज। भारी-भरकम? जी हां, लगभग 4,600 किलो… पर इतने वजन के बावजूद ये liquid fuel से चलती है, जो इसे और भी खास बनाता है।
DRDO वालों ने तो इसे और भी घातक बना दिया है। night-trials सफल रहे हैं, multiple target हिट कर सकती है… यानी एक साथ कई निशाने! और तो और, इसकी navigation तकनीक भी कमाल की है – inertial guidance system वाली बात ही कुछ और है।
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
रक्षा विशेषज्ञों की मानें तो ये मिसाइल भारत की second strike capability को नई ताकत देगी। सेना के लोग तो इसे खुलेआम ‘गेम-चेंजर’ कह रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया भी इस पर नज़र गड़ाए बैठी है – खासकर हमारे पड़ोसी देशों के लिए ये किसी सिरदर्द से कम नहीं। सच कहूं तो, चीन और पाकिस्तान की चिंता बढ़ाने के लिए ये मिसाइल काफी है!
आगे की राह: क्या है प्लान?
DRDO अभी भी इस पर काम कर रहा है – रेंज बढ़ाने से लेकर सटीकता और बेहतर बनाने तक। सेना इसे बड़ी संख्या में deploy करने की सोच रही है, जो देश की सुरक्षा को नया आयाम देगा। हालांकि, इतना तो तय है कि पड़ोसी देशों की प्रतिक्रिया देखने लायक होगी। उनकी defence policies में बदलाव? लगभग तय है।
अंतिम बात: क्यों मायने रखती है ये मिसाइल?
सीधी सी बात है – पृथ्वी-2 सिर्फ एक मिसाइल नहीं, भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। जब हम ऐसी तकनीक खुद विकसित करते हैं, तो दुनिया हमें अलग नज़र से देखती है। सुरक्षा मजबूत होगी, रणनीतिक लाभ मिलेगा… और सबसे बड़ी बात? हमारे वैज्ञानिकों को देखकर युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। आखिरकार, यही तो है असली जीत!
पृथ्वी-2 मिसाइल: जानिए वो सब कुछ जो आप जानना चाहते हैं!
अरे भाई, आजकल सबकी जुबान पर पृथ्वी-2 मिसाइल का नाम है। लेकिन क्या आपको वाकई इसके बारे में सब पता है? चलिए, एक गप्पे की तरह समझते हैं ये सारी बातें।
1. पृथ्वी-2 की मारक क्षमता कितनी है?
देखिए, अगर आसान भाषा में कहें तो ये मिसाइल आपको 350 km दूर तक का सफर तय करा सकती है। मतलब, दिल्ली से जयपुर का फासला! है ना कमाल की बात? और हां, technical बात करें तो इसे short-range ballistic missile (SRBM) कहते हैं। भारत की अपनी ही ताकत, है ना?
2. इसका वजन कितना होता है?
अब ये सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे – लगभग 4,600 kg! यानी 4-5 मारुति कारों के बराबर वजन। और हैरानी की बात ये कि इतना भारी होने के बावजूद ये surface-to-surface missile बेहद तेजी से अपना टारगेट भेदती है। conventional और nuclear warhead दोनों ले जा सकती है। जबरदस्त, है ना?
3. इसका जनक कौन है?
असल में ये सवाल ही गलत है! क्योंकि इसे किसी एक ने नहीं, बल्कि हमारे DRDO (Defence Research and Development Organisation) के वैज्ञानिकों की टीम ने मिलकर बनाया है। गर्व की बात ये कि ये हमारे इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) का हिस्सा है। मतलब, पूरा ‘मेड इन इंडिया’!
4. क्या ये परमाणु हमला कर सकती है?
सीधा जवाब – हां, बिल्कुल! 500 kg से लेकर 1000 kg तक का warhead ले जाने की क्षमता है इसमें। और जी हां, nuclear वाले भी। लेकिन उम्मीद है कि इसकी जरूरत कभी न पड़े। वैसे भी, हमारी नीति ‘नो फर्स्ट यूज’ वाली है ना?
तो कैसी लगी जानकारी? थोड़ी technical, थोड़ी casual – बिल्कुल चाय की चुस्कियों के साथ समझने वाली बातें। अगर और कुछ जानना हो तो पूछिएगा जरूर!
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

