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UK वित्तीय सेवाओं में रिस्क बढ़ाने की राह पर रेचेल रीव्स, ग्रोथ को मिलेगा बढ़ावा!

यूके के फाइनेंशियल सेक्टर में भूचाल: रेचेल रीव्स का बड़ा ऐलान!

क्या आपको याद है वो ब्रेक्सिट के बाद का दौर जब सबको लग रहा था कि यूके की अर्थव्यवस्था डूब जाएगी? खैर, अब चीजें बदलने वाली हैं। ब्रिटेन की चांसलर रेचेल रीव्स ने लंदन के शानदार Mansion House में जो भाषण दिया, उसने सचमुच सबका ध्यान खींच लिया। और सोचिए, ये कोई रूटीन पॉलिसी अपडेट नहीं था – ये तो एक बड़े बदलाव की शुरुआत है जो City of London को फिर से वैश्विक फाइनेंस हब बनाने की तरफ एक बड़ा कदम है।

ब्रेक्सिट का हंगामा और उसके बाद…

असल में देखा जाए तो यूरोपीय संघ से अलग होने के बाद से लंदन को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ी हैं। कितनी ही बड़ी कंपनियों ने अपने हेडक्वार्टर्स पेरिस या फ्रैंकफर्ट शिफ्ट कर लिए। और जो रह गए थे, उन पर भी नए-नए नियमों का बोझ। ईमानदारी से कहूं तो ये सुधार कुछ वक्त से ही होने चाहिए थे। पर अब भी देर नहीं हुई है, है न?

तो क्या-क्या बदलने वाला है?

सबसे मजेदार बात? बैंकिंग रेगुलेशन में ढील! मतलब अब बैंकों को थोड़ी सांस लेने की जगह मिलेगी। और स्टार्टअप्स वालों के लिए तो ये खुशखबरी से कम नहीं – FinTech कंपनियों को खास तौर पर फायदा होगा। लेकिन सबसे दिलचस्प बात pension funds के बारे में है। अब ये ज्यादा रिस्क ले सकेंगे। सोचिए, आपकी पेंशन अब स्टार्टअप्स में निवेश करेगी! क्या ये अच्छा है या बुरा? वक्त ही बताएगा।

लोग क्या कह रहे हैं?

बैंकर तो खुश हैं – उन्हें तो मौका मिल रहा है ज्यादा कमाने का। लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स की भौंहें तन गई हैं। उन्हें 2008 का क्रैश याद आ रहा है। और राजनीति? वहां तो हमेशा की तरह बहस चल रही है। विपक्ष वालों का कहना है कि ये सिर्फ बड़े बैंकों को फायदा पहुंचाने की साजिश है। पर सच क्या है? शायद बीच का कोई रास्ता।

आगे क्या?

अब ये प्रपोजल संसद में जाएगा। और वहां तो बहस होगी ही – लंबी, बहुत लंबी। अगर सब कुछ ठीक रहा तो… अरे भई, तब तो लंदन फिर से अपना पुराना रुतबा हासिल कर सकता है। पर एक चीज तय है – सरकार को बहुत संभलकर चलना होगा। ज्यादा ढील भी खतरनाक हो सकती है। बैलेंस बनाना होगा। वरना… वरना फिर से वही पुरानी कहानी दोहराई जा सकती है।

कुल मिलाकर? एक दिलचस्प मोड़ आ रहा है यूके की अर्थव्यवस्था में। देखते हैं ये कहां ले जाता है। आपको क्या लगता है – ये सही कदम है या जोखिम भरा? कमेंट में बताइएगा जरूर!

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Source: Financial Times – Companies | Secondary News Source: Pulsivic.com

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