EC का सख्त रुख! राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ दावे पर क्या बोले चुनाव आयोग?
अरे भई, चुनाव आयोग (EC) फिर से सुर्खियों में है। और इस बार की वजह है EVM को लेकर चल रही राजनीतिक बहस। कांग्रेस के राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ का जो आरोप लगाया, उस पर EC ने साफ कह दिया – ये सब बेबुनियाद बातें हैं। सच कहूं तो, आयोग ने तो यहां तक कह दिया कि ऐसे बयानों से चुनाव प्रक्रिया पर शक पैदा होता है। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये बयान विवाद को शांत कर पाएगा? मुझे तो नहीं लगता!
मामले की जड़: राहुल का EVM पर सवाल
देखिए, पूरा मामला क्या है? पिछले कुछ दिनों से EVM को लेकर बवाल मचा हुआ है। राहुल गांधी ने एक रैली में दावा किया कि सरकार EVM के जरिए वोट चोरी करवा रही है। 2014 और 2019 के चुनावों में हैकिंग की बात कही। पर सच ये है कि EC पहले भी इन आरोपों को खारिज कर चुका है।
अजीब बात ये है कि आयोग ने कितनी बार EVM की सुरक्षा के बारे में बताया है। फिर भी, हर बार चुनाव आते ही ये मुद्दा गरमा जाता है। क्या आपको नहीं लगता कि ये एक पुरानी रिकॉर्ड की तरह बजाई जा रही है?
चुनाव आयोग की कड़ी प्रतिक्रिया
इस बार EC ने राहुल के बयान को लेकर जो रिएक्शन दिया, वो काफी सख्त था। उन्होंने इसे ‘बिना सबूत के गंभीर आरोप’ बताया। और साथ ही ये भी कहा कि EVM में छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश ही नहीं।
मजे की बात ये है कि EC ने तो यहां तक दावा कर दिया कि भारत का चुनाव सिस्टम दुनिया में सबसे पारदर्शी है। पर सवाल ये उठता है – अगर ऐसा है तो फिर ये विवाद हर बार क्यों उठता है? थोड़ा सोचने वाली बात है न?
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं
अब देखिए इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं क्या आईं। भाजपा वाले तो राहुल पर ही चढ़ बैठे – कहने लगे कि ये तो हार का बहाना बना रहे हैं। वहीं कांग्रेस का कहना है कि वो चुनाव सुधार की बात कर रहे हैं।
एक दिलचस्प प्वाइंट – कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि EVM पर लगातार सवाल उठाने से आम जनता का विश्वास कमजोर होता है। पर क्या ये सच में ऐसा है? या फिर सवाल उठाना ही लोकतंत्र का हिस्सा है?
आगे की राह: क्या होगा अगला कदम?
अब सवाल ये है कि आगे क्या होगा? EC ने कुछ नए कदम उठाने की बात की है। जैसे कि EVM की टेक्निकल जानकारी देने के लिए विशेष सत्र आयोजित करना।
और हां, VVPAT की मांग फिर से उठ सकती है। 2024 के चुनाव से पहले ये मुद्दा संसद में भी उछाला जा सकता है। क्या आपको नहीं लगता कि अगले कुछ महीने काफी दिलचस्प होने वाले हैं?
निष्कर्ष: विश्वास बनाम सवाल
तो फाइनली, क्या समझें इस पूरे मामले से? EC तो अपनी बात पर अड़ा हुआ है कि EVM सुरक्षित हैं। पर विपक्ष की मांग है कि और पारदर्शिता होनी चाहिए।
एक तरफ तकनीक पर भरोसा, दूसरी तरफ सवाल। पर असल में ये बहस सिर्फ मशीनों तक ही सीमित नहीं है। ये तो हमारे लोकतंत्र में जनता के विश्वास की बात है। और यही सबसे बड़ा सवाल है – क्या हम वाकई अपनी चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा करते हैं? आप क्या सोचते हैं?
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EC की यह एक्शन तो वाकई में चर्चा का विषय बन गया है। सोचिए, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बहस फिर से गर्म हो गई – पर क्या यह सिर्फ़ एक बहस है या कुछ और? राहुल गांधी के आरोप और EC का जवाब… देखा जाए तो यह मामला अब राजनीतिक गलियारों में ज़ोर-शोर से चर्चा में है।
असल में बात सिर्फ़ वोटिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाने की नहीं है। यह तो EC के अधिकारों और उसकी जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। ऐसा लगता है जैसे यह मामला एक पेंडोरा बॉक्स खोलने जैसा हो।
अब सबकी निगाहें आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तो आएँगी ही – कुछ तीखी, कुछ संतुलित। पर असली सवाल यह है कि क्या इससे हमारी चुनावी व्यवस्था में कोई सुधार आएगा? या फिर यह सब सिर्फ़ एक मीडिया सर्कस बनकर रह जाएगा?
एक तरफ़ तो EC की सख्ती सराहनीय लगती है, वहीं दूसरी ओर कुछ सवाल अनुत्तरित भी हैं। जैसे कि – क्या यह सच में निष्पक्षता की दिशा में एक कदम है? या फिर… खैर, समय ही बताएगा।
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com