बिहार विधानसभा चुनाव: ‘हसबैंड-हसबैंड’ और ‘फादर-फादर’ वाला केस जिसने सबको हैरान कर दिया!
अभी तो बिहार में चुनावी गर्मी शुरू भी नहीं हुई थी कि एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सबको झकझोर कर रख दिया। सोचिए, एक महिला मतदाता मधु कुमारी के पति का नाम मतदाता सूची में ‘हसबैंड-हसबैंड’ और पिता का नाम ‘फादर-फादर’ दर्ज है! अब आप ही बताइए, ये कैसी लापरवाही है? आरजेडी ने तो इसे ‘एटम बम’ विवाद तक कह डाला है। सच कहूँ तो, चुनाव आयोग के लिए ये शर्मनाक स्थिति है।
पूरा माजरा क्या है?
देखिए, चुनाव से पहले विपक्षी दल मतदाता सूची की जाँच करते हैं – ये तो नॉर्मल प्रैक्टिस है। लेकिन इस बार जो मिला, वो किसी बुरे सपने जैसा है। ‘हसबैंड-हसबैंड’? सच में? ऐसा लगता है जैसे कोई फॉर्म भरते वक्त बोर हो गया हो! आरजेडी का कहना है कि ये कोई छोटी-मोटी गलती नहीं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया में गंभीर खामी दिखाती है। और सच कहूँ तो, उनकी बात में दम भी लगता है।
राजनीतिक भूचाल: कौन क्या बोला?
आरजेडी तो मानो आग बबूला हो गई है – चुनाव आयोग से तुरंत जवाब माँग रही है। उनका सवाल सही भी है – भई, ‘हसबैंड’ और ‘फादर’ नाम कैसे हो सकता है? ये तो वैसा ही है जैसे किसी का नाम ‘इंसान-इंसान’ लिख देना! हालाँकि, सरकारी पक्ष की प्रतिक्रिया भी कम दिलचस्प नहीं – भाजपा-जेडीयू ने इसे ‘बेबुनियाद राजनीति’ बताया है। एक भाजपा नेता तो यहाँ तक कह गए कि “ये सब विपक्ष का ड्रामा है।” पर सवाल ये उठता है कि फिर ये गलती हुई कैसे?
और हाँ, चुनाव आयोग की तरफ से अभी तक कोई ठोस बयान नहीं आया है। सूत्रों की मानें तो वे ‘तकनीकी गड़बड़ी’ की जाँच कर रहे हैं। मगर सच पूछो तो, ये ‘तकनीकी गड़बड़ी’ वाला बहाना अब थोड़ा पुराना हो चला है!
जनता और एक्टिविस्ट्स क्या कह रहे?
इस मामले ने आम लोगों को भी हैरान कर दिया है। एक मतदाता अधिकार समूह के प्रतिनिधि ने सही कहा – “अगर नाम ही गलत दर्ज होगा, तो लोग वोट कैसे डालेंगे?” ये तो बिल्कुल वैसा ही है जैसे रेलवे टिकट पर आपका नाम ‘पैसेंजर-पैसेंजर’ लिख दिया जाए! असल में, ये सिर्फ एक नाम की गलती नहीं, बल्कि मतदाताओं के अधिकारों का सवाल है।
अब आगे क्या?
चुनाव आयोग शायद इस गलती को सुधार ले, मगर ये विवाद तो अब चुनावी मुद्दा बन चुका है। विपक्ष इसे रैलियों में जरूर उछालेगा। और अगर ऐसे और केस सामने आए तो? फिर तो हंगामा और बढ़ेगा। एक बात तो तय है – अब मतदाता सूची की शुद्धता पर सवाल बड़े हो गए हैं।
आखिरी बात: ये मामला शायद जल्द ही शांत हो जाए, लेकिन ये सवाल तो छोड़ गया है कि हमारी चुनावी प्रणाली कितनी ‘फादर-फादर’ (यानी बेबस) है! क्या चुनाव आयोग इस गलती से सबक लेगा? वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो बिहार की राजनीति में एक नया मसाला पड़ गया है!
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अब देखिए न, आरजेडी वालों का यह ‘एटम बम’ वाला बयान कितना दिलचस्प है! एक तरफ तो यह चुनावी मैदान में तूफान ला दिया है, वहीं दूसरी ओर Political Circles में भी चर्चा का विषय बन गया है। सच कहूं तो, यह एक ऐसा मोव है जिसने सबका ध्यान खींच लिया।
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह चाल काम आएगी? या फिर यही Backfire हो जाएगी? अरे भई, यह तो वक्त ही बताएगा। जब तक Election Results आते हैं, तब तक तो यह बहस गर्म रहने वाली है। और हां, Political Circles में तो इसकी चर्चा लंबे समय तक होगी ही।
एकदम मस्त स्थिति है, है न? कभी-कभी तो लगता है सियासत एक सस्पेंस थ्रिलर से कम नहीं!
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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com