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RSS के 100वें स्थापना समारोह में पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश को क्यों नहीं बुलाया गया? जानें पूरा मामला

RSS का 100वां जन्मदिन: पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश को निमंत्रण क्यों नहीं? असली वजह जानकर हैरान रह जाएंगे!

अरे भाई, RSS तो इस बार जमकर धमाल मचाने वाला है! 26 अगस्त से दिल्ली में तीन दिन तक चलने वाले इस समारोह में दुनिया के 50 से ज्यादा देशों के लोग शामिल होंगे। लेकिन सबसे दिलचस्प बात? पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश को इस पार्टी में नहीं बुलाया गया है। है न मजेदार? ये तो वैसा ही हुआ जैसे आपने अपने बड़े दिन की पार्टी में पड़ोस के उन तीन लोगों को न बुलाया हो जिनसे आपकी हमेशा ही नहीं बनती।

देखिए, RSS कोई एक दिन का बच्चा तो है नहीं। 1925 में जन्मा ये संगठन अब पूरे 100 साल का हो गया है। और जब कोई इतना बड़ा हो जाए, तो उसे पता होता है कि किसे अपने घर बुलाना है और किसे नहीं। मतलब साफ है – इन तीन देशों के साथ RSS के रिश्ते हमेशा से ही… खैर, थोड़े ‘कॉम्प्लिकेटेड’ रहे हैं।

RSS के एक बड़े अधिकारी ने तो साफ कह दिया – “हमने जानबूझकर इन्हें नहीं बुलाया।” कारण? पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदूओं के साथ जो हो रहा है, वो तो आप भी जानते ही हैं। और तुर्की? उनकी कुछ नीतियां भारत को चुभती हैं। बिल्कुल वैसे ही जैसे कोई आपके घर आकर आपके ही बर्तन में थूक दे। लेकिन इसके उलट, अमेरिका और यूरोप वालों को तो खूब इज्जत दी जा रही है। क्या कहें… चुनिंदा मेहमानों वाली पार्टी है ये!

अब राजनीति वालों की क्या राय है? BJP तो खुश है – “शाबाश RSS, देश के हितों की रक्षा की।” पर विपक्ष वालों को लगता है कि इससे अंतरराष्ट्रीय रिश्ते खराब हो सकते हैं। और पाकिस्तान? उन्हें तो ये “भेदभाव” लग रहा है। भई साहब, जब आप खुद हमेशा भेदभाव करते रहेंगे, तो दूसरे भी तो… खैर, आप समझ गए होंगे।

कुछ एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि ये RSS का ये कदम भारत की नई विदेश नीति का संकेत हो सकता है। मतलब अब हम “soft power” दिखाएंगे, लेकिन अपनी शर्तों पर। जैसे कोई बुद्धिमान बाप अपने बच्चे को सिखाता है – “दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करो, लेकिन अपना सम्मान कभी मत खोना।”

तो कुल मिलाकर? ये कोई साधारण निमंत्रण नहीं बल्कि एक बड़ा संदेश है। घर में तो लोग खुश हैं, लेकिन बाहर वालों को ये बात हजम नहीं हो रही। पर सच तो ये है कि जब आप अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं, तो दुनिया आपको गंभीरता से लेना शुरू कर देती है। क्या पता, यही भविष्य में भारत की नई पहचान बन जाए!

RSS के 100वें स्थापना दिवस पर पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश को निमंत्रण नहीं – क्या है पूरा मामला?

1. आखिर RSS ने इन तीन देशों को क्यों नहीं बुलाया?

देखिए, RSS यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ… यह कोई सामान्य संगठन तो है नहीं। यह तो भारत की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा हुआ है। अब सवाल यह है कि इन देशों को न बुलाने के पीछे क्या वजह रही? असल में, ये तीनों देश भारत के साथ हमेशा से ही एक जटिल रिश्ता रखते आए हैं। कभी कश्मीर मुद्दा, तो कभी सीमा पार की घटनाएं। ईमानदारी से कहूं तो RSS ने शायद इस event को पूरी तरह ‘देसी’ रखने का फैसला किया हो। थोड़ा सोचिए, क्या आप अपने घर के जश्न में उन्हें बुलाते जिनसे नॉर्मल रिश्ते भी नहीं?

2. क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक चाल थी?

अरे भाई, राजनीति तो इसमें थोड़ी-बहुत होगी ही न! पर सच कहूं तो यह कोई नई बात भी नहीं। पाकिस्तान के साथ तो हालात ही ऐसे हैं – कभी 26/11, कभी पुलवामा। तुर्की के राष्ट्रपति अक्सर कश्मीर मुद्दे पर भारत को लेकर टिप्पणी करते रहते हैं। और बांग्लादेश? वहां तो अभी हाल ही में हिंदुओं पर हमले की खबरें आई थीं। तो RSS का यह फैसला कुछ हद तक समझ में आता है। या फिर शायद वे बस अपने मूल संदेश पर फोकस करना चाहते थे – भारत की एकता और संस्कृति।

3. क्या विदेश से किसी को भी नहीं बुलाया गया?

नहीं यार, ऐसा भी नहीं है! RSS ने कुछ चुनिंदा देशों के प्रतिनिधियों को और वैश्विक हिंदू समुदाय के लोगों को तो आमंत्रित किया था। पर यहां बात strategy की है। जैसे आप अपने बड़े family function में सभी रिश्तेदारों को नहीं बुलाते, बस खास लोगों को ही invite करते हैं। वैसा ही कुछ। मुख्य उद्देश्य था – भारत की आंतरिक एकजुटता। सीधी सी बात है न?

4. क्या इससे इन देशों के साथ रिश्तों पर असर पड़ेगा?

सुनिए, यह तो एक प्रतीकात्मक कदम है। ऐसा नहीं कि कल कोई दूतावास बंद हो जाएगा। परंतु… हां, यह जरूर संकेत देता है कि भारत अब अपनी foreign policy में किन बातों को प्राथमिकता दे रहा है। हालांकि, राजनयिक रिश्ते तो कई पहलुओं पर निर्भर करते हैं – trade, security, global equations। तो short-term में कोई बड़ा भूचाल आने वाला नहीं। पर long-term में? वक्त ही बताएगा।

एक बात और – यह RSS का अपना निर्णय था। सरकार का कोई direct role नहीं। यह भी समझ लीजिए।

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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