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“रूस-चीन-भारत गठबंधन से डॉलर की दादागिरी होगी खत्म! ट्रंप की चिंता बढ़ी”

रूस-चीन-भारत की जुगलबंदी से डॉलर की हेकड़ी खत्म? ट्रंप की नींद उड़ी!

अरे भाई, क्या आपने सुना? डोनाल्ड ट्रंप फिर से अपनी पुरानी आदत पर आ गए – भारत, रूस और चीन को टैरिफ के नाम पर धमकाने लगे। लेकिन इस बार तीनों देशों ने मिलकर जो जवाबी चाल चली है, वो सच में game-changer हो सकती है। सोचिए, अगर ये तीनों मिलकर डॉलर के बिना ही ट्रेड करने लगें, तो अमेरिका का क्या होगा? बिल्कुल वैसा ही जैसे किसी पार्टी में सबसे popular लड़के को ignore कर दिया जाए!

डॉलर का राज: कैसे अमेरिका सबको रूलता आया है

देखिए न, सालों से अमेरिका ने डॉलर को global currency बनाकर क्या-क्या नहीं किया। किसी पर भी प्रतिबंध लगाओ, किसी को भी आर्थिक रूप से घुटने टेकने पर मजबूर कर दो। लेकिन अब? अब तो भारत, रूस और चीन ने पलटवार करने की तैयारी कर ली है। असल में, पिछले कुछ सालों से ये तीनों देश धीरे-धीरे डॉलर से छुटकारा पाने की कोशिश कर रहे थे। चीन-रूस तो पहले से ही इस पर काम कर रहे थे। अब भारत के साथ आने से ये मूव और भी interesting हो गया है। सच कहूं तो, ट्रंप को शायद इसकी उम्मीद नहीं थी!

नया गेम, नए नियम: जब रुपया-युआन-रूबल ने मिलकर प्लान बनाया

तो क्या है ये पूरा मामला? सीधे शब्दों में कहें तो अब ये तीनों देश आपस में ट्रेड डॉलर में नहीं, बल्कि अपनी-अपनी करेंसी में करेंगे। जैसे भारत और रूस का सौदा रुपया-रूबल में होगा। स्मार्ट न? इससे तीन फायदे:
1. अमेरिकी प्रतिबंधों से छुटकारा
2. हमारी करेंसी की value बढ़ेगी
3. और सबसे मजेदार – अमेरिका की नींद उड़ जाएगी!

ट्रंप तो इतने गुस्से में हैं कि भारत पर “गलत दोस्त” चुनने का आरोप लगा रहे हैं। और हां, भारतीय उत्पादों पर नए टैरिफ की धमकी भी दे डाली। पर सच पूछो तो, इससे हमारे नेताओं की हिम्मत और बढ़ गई लगती है!

दुनिया क्या कह रही है? चाय की चुस्कियों के साथ गपशप!

अब जरा देखिए इस पर कौन क्या बोल रहा है:
– भारत सरकार का स्टैंड clear है: “हम अपने फायदे की बात करेंगे, चाहे वो अमेरिका हो या कोई और”
– रूस तो बिल्कुल खुश है – उनका कहना है अमेरिकी दादागिरी का जमाना लद गया
– चीन ने तो इसे “अमेरिकी आर्थिक धौंस के खिलाफ ऐतिहासिक कदम” बता दिया
– और अमेरिकी experts? वो तो डर के मारे कह रहे हैं कि अगर ये प्लान सफल हो गया तो डॉलर की दुकानदारी ही बंद हो जाएगी!

मजे की बात ये कि अब और देश भी इस मूवमेंट में शामिल हो सकते हैं। जैसे कोई ट्रेंडिंग हैशटैग हो!

आगे क्या? एक बड़े बदलाव की शुरुआत?

असल में देखा जाए तो ये सिर्फ करेंसी की बात नहीं है। ये तो एक तरह से वैश्विक सत्ता के समीकरण बदलने की कोशिश है। हालांकि, अमेरिका बिना लड़े हार मानने वाला नहीं। नए प्रतिबंध, नई धमकियां – सब कुछ आने वाला है। लेकिन अगर ये तिकड़ी अपने प्लान पर टिकी रही, तो देखते-देखते दुनिया का economic मैप ही बदल सकता है। और तब? तब तो ट्रंप साहब को नया ट्वीट करना पड़ेगा: “बहुत बुरा हाल है, बहुत बुरा!”

क्या आपको लगता है ये गठबंधन सफल हो पाएगा? कमेंट में बताइएगा जरूर!

देखिए, रूस, चीन और भारत का यह तिकड़ी गठजोड़… सच कहूं तो डॉलर की हुकूमत को हिला देने वाला मामला हो सकता है। अब सोचिए, अगर ये तीनों देश मिलकर काम करने लगें, तो क्या अमेरिकी डॉलर की वही ताकत रहेगी? शायद नहीं। और यही तो ट्रंप जैसे नेताओं की नींद उड़ा रहा है!

पर सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक सियासी दिखावा है या असल में कुछ बदलाव लाने वाला कदम? मेरा मानना है कि अगर यह साझेदारी टिकी रही (और यह बड़ा ‘अगर’ है), तो वैश्विक अर्थव्यवस्था का पूरा नक्शा ही बदल सकता है। एक तरह से देखें तो यह नए आर्थिक युग की शुरुआत हो सकती है।

हालांकि… बात इतनी आसान भी नहीं। क्योंकि डॉलर को हटाना वैसा ही है जैसे किसी पुराने, जमे हुए सिस्टम को उखाड़ फेंकना। मुश्किल तो है, लेकिन नामुमकिन? शायद नहीं।

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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