“साध्वी प्रज्ञा का बयान – ‘मुसलमान आतंकवाद होता है’ पर मौलाना का जवाब, जानिए पूरा विवाद”

साध्वी प्रज्ञा का बयान – ‘मुसलमान आतंकवाद होता है’… और फिर शुरू हुआ तूफान!

अरे भई, भारतीय राजनीति बोरिंग होने का नाम ही नहीं लेती! अभी कुछ दिन पहले ही साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने एक ऐसा बम फोड़ा है जिसकी गूंज अभी तक सुनाई दे रही है। BJP की यह सांसद, जो पहले से ही मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी रह चुकी हैं, अब उन्होंने कह दिया कि “आतंकवाद का रंग हरा होता है”। सुनकर हैरानी हुई न? मतलब साफ-साफ हरे झंडे की तरफ इशारा। और फिर क्या था, सोशल मीडिया से लेकर TV स्टूडियो तक में बहस छिड़ गई।

पहले समझिए पूरा कॉन्टेक्स्ट

देखिए, साध्वी प्रज्ञा कोई नई खिलाड़ी तो हैं नहीं। 2008 के मालेगांव केस में नाम आया, फिर बरी हो गईं। लेकिन असल मजा तो अब शुरू हुआ है – BJP के झंडे तले सांसद बनकर वो अक्सर ऐसे बयान देती हैं जो सुर्खियां बटोर लेते हैं। इस बार उन्होंने हरे रंग को आतंकवाद से जोड़ दिया। अब आप ही बताइए, क्या यह किसी एक समुदाय को टार्गेट करने जैसा नहीं लगता? सोशल मीडिया पर तो मानो आग लग गई!

क्या-क्या हुआ अब तक?

एक तरफ #GreenTerrorism ट्रेंड कर रहा है तो दूसरी तरफ मौलाना महमूद मदनी जैसे लोग गुस्से में हैं। उनका कहना है – “आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता”। सच कहूं तो ये बात तो हम सब जानते हैं, लेकिन राजनीति में तर्कों की क्या औकात? कांग्रेस वालों ने तो मौका हाथ से जाने नहीं दिया – BJP पर सीधा हमला बोल दिया।

अब सबकी प्रतिक्रियाएं…

BJP का स्टैंड देखकर मजा आ जाता है। कुछ नेता चुपचाप मुस्कुरा रहे हैं, जैसे मन ही मन खुश हों। पर पार्टी का आधिकारिक बयान? अभी तक नदारद! मुस्लिम नेताओं का कहना है कि यह बयान समाज में तनाव फैलाने वाला है। और सच मानिए, ट्विटर पर तो जंग छिड़ी हुई है – हिंदू-मुस्लिम, दाएं-बाएं, हर कोई अपनी-अपनी राग अलाप रहा है।

आगे क्या होगा?

ईमानदारी से कहूं तो यह विवाद अभी शुरुआत है। कानूनी दांव-पेंच हो सकते हैं – धार्मिक भावनाएं आहत करने का केस भी। संसद का अगला सेशन? पक्का मसालादार होने वाला है! और सबसे बड़ा सवाल – क्या यह बयान हमारे सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करेगा? जबकि देश को एकजुट रहने की सख्त जरूरत है।

अंत में बस इतना – साध्वी प्रज्ञा ने एक पत्थर तो उछाल दिया है। अब देखना यह है कि इसकी लहरें कितनी दूर तक जाती हैं। राजनीति हो या समाज, यह बहस अभी लंबी चलने वाली है। आपकी क्या राय है? कमेंट में जरूर बताइएगा!

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ये विवाद तो हर बार की तरह फिर से धर्म और आतंकवाद पर बहस छेड़ देता है। सच कहूँ तो, साध्वी प्रज्ञा का बयान और मौलाना साहब का जवाब – दोनों ने मिलकर सच्चाई को और भी उलझा दिया है। ऐसा लगता है जैसे कोई गाँठ बन गई हो जिसे सुलझाना मुश्किल हो रहा हो।

अब सवाल यह है कि क्या किसी एक समुदाय को आतंकवाद से जोड़ना सही है? मेरा मानना है कि ऐसा करना वैसा ही है जैसे किसी पूरे बगीचे को एक सड़े हुए फल की वजह से नष्ट कर देना। हालांकि, जब तक हम अपने पूर्वाग्रहों से ऊपर नहीं उठेंगे, तब तक ऐसे मामलों का कोई हल नहीं निकलने वाला। सच्चाई? वो तो अक्सर इन सबके बीच दबकर रह जाती है।

और देखा जाए तो, ये बहस सिर्फ TV पर चिल्लाने या social media पर ट्रेंड करने तक ही सीमित रह जाती है। असल मुद्दे पर कोई बात ही नहीं होती। क्या आपको नहीं लगता?

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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