“लखनऊ में मोहर्रम जुलूस में भगवा पहनकर मुस्लिमों के साथ मातम मनाने वाले स्वामीजी कौन हैं? जानिए पूरा मामला”

लखनऊ में मोहर्रम जुलूस में भगवा पहनकर शामिल हुए स्वामी सारंग: क्या है पूरा मामला?

लखनऊ में मोहर्रम का जुलूस तो हर साल निकलता है, लेकिन इस बार एक ऐसी घटना हुई जिसने सबका ध्यान खींच लिया। स्वामी सारंग नाम के एक हिंदू संत ने भगवा पहनकर मुस्लिम समुदाय के साथ मातम में शामिल होकर कर्बला के शहीदों को याद किया। सोशल मीडिया पर तो यह ट्रेंड कर ही रहा है, लेकिन असल सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक फोटो ऑप है या फिर सच्ची सांप्रदायिक एकता की मिसाल? मैं तो यही कहूंगा – ऐसी घटनाएं आज के दौर में सोने के समान हैं। दुर्लभ, लेकिन कीमती।

मोहर्रम और लखनऊ: एक पुराना नाता

असल में बात करें तो मोहर्रम इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना होता है, और यौम-ए-आशूरा के दिन इमाम हुसैन की शहादत को याद किया जाता है। लखनऊ में तो यह परंपरा किसी त्योहार से कम नहीं। इमामबाड़ा नाजिम साहब से कर्बला तालकटोरा तक का जुलूस तो देखने लायक होता है। अलग-अलग समुदायों के लोग इसमें शामिल होते हैं। लेकिन इस बार? इस बार तो स्वामी सारंग ने भगवा पहनकर सबको चौंका दिया। सच कहूं तो मैं भी पहले दिन इस खबर को फेक समझकर नजरअंदाज करने वाला था!

स्वामी सारंग कौन हैं?

देखिए, स्वामी सारंग कोई नए खिलाड़ी नहीं हैं। ये पहले भी हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए काम कर चुके हैं। मौलाना कल्बे जव्वाद के साथ इनकी जोड़ी तो कुछ वैसी ही है जैसे चाय और बिस्कुट – अलग-अलग स्वाद, लेकिन साथ में परफेक्ट। भगवा पहनकर मातम में शामिल होना? यह तो वाकई एक साहसिक कदम है। कुछ लोग कहेंगे यह सिर्फ दिखावा है, लेकिन मेरा मानना है कि ऐसे प्रतीकात्मक कदमों की भी अपनी अहमियत होती है।

लोग क्या कह रहे हैं?

सोशल मीडिया पर तो जैसे मीनाक्षी नाम की एक यूजर ने लिखा – “यही तो असली हिंदुस्तान है!” वहीं दूसरी तरफ @TruePatriot123 जैसे अकाउंट्स इसे “हिंदू अस्मिता पर हमला” बता रहे हैं। मौलाना जव्वाद ने तो इसे धर्मनिरपेक्षता की मिसाल कहा है। और सच कहूं? लखनऊ के राहुल शर्मा जैसे आम लोगों की प्रतिक्रिया सबसे संतुलित लगी – “यह लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब को दिखाता है।” पर सवाल यह है कि क्या यह तहजीब सच में जिंदा है या सिर्फ किताबों तक सीमित होकर रह गई है?

आगे क्या होगा?

अब देखना यह है कि क्या यह सिर्फ एक इवेंट था या फिर इससे बड़ी पहल की शुरुआत होगी। स्वामी सारंग और मौलाना जव्वाद के बीच और कार्यक्रम होने की बात चल रही है। कुछ संगठन तो इसे मॉडल बनाने की बात कर रहे हैं। मेरा व्यक्तिगत विचार? ऐसी पहलें तभी सफल होती हैं जब आम जनता इन्हें अपनाती है, न कि सिर्फ नेताओं और धर्मगुरुओं तक सीमित रह जाती हैं।

अंत में बस इतना कहूंगा – चाहे भगवा हो या काला, दुख का रंग तो सबके लिए एक जैसा ही होता है। लखनऊ की यह घटना हमें यही याद दिलाती है। पर सवाल यह है कि क्या हम इस संदेश को समझ पाएंगे? या फिर अगले हफ्ते ही भूल जाएंगे? वक्त ही बताएगा।

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लखनऊ मोहर्रम जुलूस और स्वामीजी का मामला – वो सवाल जो आप पूछना चाहते हैं

1. अरे भई, ये स्वामीजी कौन हैं जो भगवा पहनकर मोहर्रम जुलूस में शामिल हुए?

देखिए, नाम तो स्वामी प्रसाद मौर्य है… एक हिंदू संत जिन्होंने मोहर्रम के मातम में भगवा पहनकर सबको हैरान कर दिया। असल में बात ये है कि उन्होंने मुस्लिम भाइयों के साथ खड़े होकर एक अलग ही तरह का संदेश दिया। कुछ लोग कह रहे हैं ये सिर्फ नाटक है, तो कुछ इसे सच्ची एकता का प्रतीक मान रहे हैं। आप क्या सोचते हैं?

2. सवाल तो ये उठता है कि आखिर स्वामीजी ने मोहर्रम जुलूस में हिस्सा क्यों लिया?

ईमानदारी से कहूं तो… स्वामीजी का कहना है कि वो “धर्म से ऊपर इंसानियत” को मानते हैं। पर सच्चाई ये भी है कि आजकल हर छोटी-बड़ी घटना के पीछे कोई न कोई राजनीति जरूर होती है। हालांकि, अगर नीयत साफ है तो ये कदम वाकई तारीफ के काबिल है। आपको नहीं लगता?

3. लोगों और नेताओं ने इस पर क्या बोला? सोशल मीडिया तो जरूर गर्म हुआ होगा!

अरे भाई, सोशल मीडिया तो हर बात पर दो फाड़ हो जाता है! कुछ लोग इसे secularism की मिसाल बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि ये सिर्फ दिखावा है। Twitter पर तो #BhagwaInMuharram ट्रेंड कर रहा था। राजनीतिक लोग? उनकी प्रतिक्रिया तो आप अंदाजा लगा सकते हैं – जिसकी जैसी चाशनी, वैसी प्रतिक्रिया!

4. क्या ये पहली बार हुआ है जब किसी हिंदू नेता ने मोहर्रम में हिस्सा लिया?

नहीं यार, ऐसा तो पहले भी होता आया है। लेकिन स्वामीजी ने जो किया, वो थोड़ा अलग है। भगवा पहनकर मातम में शामिल होना… ये तो कुछ-कुछ उस कहावत जैसा है – “अपनों के साथ खुशी में तो हर कोई शामिल होता है, लेकिन दुख में साथ देने वाले ही असली दोस्त होते हैं।” हालांकि, कुछ लोग इसकी मंशा पर सवाल भी उठा रहे हैं। आपका क्या ख्याल है?

Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com

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