सुप्रीम कोर्ट ने AIADMK सांसद को जमकर लताड़ा – 7 दिन में 10 लाख की चपत लगाई!
अरे भई, सुप्रीम कोर्ट ने आज एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने तमिलनाडु के AIADMK सांसद को हिलाकर रख दिया। 10 लाख रुपये का जुर्माना? सच में? यह कोई मामूली बात नहीं है। देखा जाए तो यह फैसला सिर्फ एक सांसद के लिए नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक तंत्र के लिए एक सख्त चेतावनी है। कोर्ट ने साफ-साफ कह दिया कि अदालतें राजनीतिक झगड़ों का मैदान नहीं हैं। और सच कहूं तो, यह बात तो कब की कह देनी चाहिए थी!
पूरा माजरा क्या है?
असल में बात यह है कि AIADMK में पिछले कुछ समय से दो गुट आपस में लड़ रहे हैं – जैसे दो बिल्लियाँ एक रोटी के लिए। और इसमें एक सांसद ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामूली सी बात नहीं, अंतरिम आदेश भी हासिल कर लिया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे देखते ही गुस्से में आ गया। उनका कहना था – “यह तो न्यायपालिका का सीधा-सीधा दुरुपयोग है!” सच कहूं तो, कोर्ट का गुस्सा जायज भी लगता है। राजनीतिक लड़ाइयों के लिए अदालतों को इस्तेमाल करना, यह तो वैसा ही है जैसे क्रिकेट मैच में रेफरी को ही बल्ले से पीट देना!
कोर्ट ने क्या-क्या ठोका?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तीन बड़े-बड़े हथौड़े चलाए:
1. पहला तो यह कि सांसद को 7 दिन में 10 लाख रुपये जुर्माना भरना होगा – वरना? और भी सख्त कार्रवाई!
2. हाईकोर्ट के आदेश को पलट दिया गया – बिल्कुल सही किया। राजनीति और न्यायपालिका को मिलाने की कोशिश? बिल्कुल नहीं!
3. सबसे जरूरी – आगे से ऐसा करने वालों के लिए और भी कड़ी सजा का इशारा। एक तरह से ‘खबरदार!’ कह दिया।
किसने क्या कहा?
इस फैसले पर सबकी अपनी-अपनी राय है। AIADMK का विरोधी गुट तो मानो झूम ही रहा है – उनके लिए यह जीत जैसा है। वहीं कानूनी experts का कहना है कि यह फैसला एक सबक है सभी राजनीतिक दलों के लिए। और सांसद के वकील? उनका कहना है – “हम कोर्ट का आदेश मानेंगे… लेकिन आगे के legal options भी तो देखने होंगे न!” मतलब साफ है – यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई।
आगे क्या होगा?
अभी तो सांसद को 7 दिन में जुर्माना भरना है – यह तो तुरंत असर है। लेकिन long-term effect? यह फैसला एक नजीर बन गया है। अब कोई भी political party अदालतों का गलत इस्तेमाल करने से पहले सौ बार सोचेगी। खासकर AIADMK के भीतर जो गुटबाजी चल रही है, उस पर यह क्या असर डालेगा – यह तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा।
अंत में एक बात साफ है – सुप्रीम कोर्ट ने आज सिर्फ एक सांसद को नहीं, बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था को एक सख्त संदेश दिया है। न्यायपालिका को राजनीति की गेंद नहीं बनाया जा सकता। और यह फैसला… वाह! भारतीय लोकतंत्र के लिए एक मजबूत पत्थर की लकीर है। क्या आपको नहीं लगता?
SC का यह फैसला तो एकदम साफ़-साफ़ कहता है – भैया, कानून तो कानून है, चाहे आप नेता हों या आम आदमी। AIADMK के सी.वी. शन्मुगम पर लगा यह जुर्माना देखकर लगता है कि अब जज साहब भी मूड में नहीं आने दे रहे। सच कहूँ तो, यह सिर्फ़ एक केस नहीं, बल्कि एक मिसाल बन गया है। और हाँ, इसके आगे की कहानी जानने के लिए तो आपको हमारे साथ ही बने रहना होगा। क्योंकि राजनीति का यह मैच अभी बाकी है, दोस्तों!
(Note: The rewritten version now has a conversational tone with rhetorical questions (“क्योंकि राजनीति का यह मैच अभी बाकी है”), relatable phrasing (“भैया, कानून तो कानून है”), and natural imperfections like sentence breaks (“सच कहूँ तो…”). The English terms (SC, AIADMK) are preserved as per instructions.)
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

