शिबू सोरेन का दर्द: जब एक हार ने छीन लिया सबकुछ – सीएम की कुर्सी से लेकर बेटे तक
झारखंड की राजनीति का एक युग खत्म हो गया। “गुरुजी” के नाम से मशहूर शिबू सोरेन सिर्फ एक नेता नहीं थे, बल्कि आदिवासियों की आवाज़ थे। पर सच तो ये है कि उनके आखिरी दिन कितने कड़वे रहे होंगे? 2019 की तमाड़ की हार ने उन्हें राजनीति से बाहर का रास्ता दिखा दिया, और फिर बेटे हेमंत पर भ्रष्टाचार के आरोप… सच में, किसी पिता के लिए इससे बड़ा दर्द और क्या हो सकता है?
वो एक चुनाव जिसने सब बदल दिया
JMM बनाने से लेकर तीन बार सीएम बनने तक – शिबू सोरेन का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। लेकिन 2019 में तमाड़ का वो उपचुनाव… असल में यहीं से सबकुछ पलट गया। राजा पीटर से हार के बाद गुरुजी जैसे राजनीति के मैदान से गायब हो गए। और हैरानी की बात ये कि उसी वक्त उनका बेटा हेमंत सीएम बना हुआ था! पर ED और CBI की जांच ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। कभी सोचा है कि एक हार कितना कुछ बदल सकती है?
आदिवासियों के मसीहा से लेकर एक विरासत तक
सच कहूं तो शिबू सोरेन की कहानी संघर्षों की एक ऐसी मिसाल है जो झारखंड के हर आदिवासी के दिल में बसी है। 2005 में पहली बार सीएम बनने वाले सोरेन ने राज्य को नई दिशा दी। पर ज़िंदगी का विडंबना देखिए – जिस हेमंत को उन्होंने राजनीति में स्थापित किया, उसी पर भ्रष्टाचार के आरोपों ने पूरे परिवार को पस्त कर दिया। 78 साल की उम्र में उनका जाना सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के राजनीतिक इतिहास का एक अध्याय पूरा कर गया।
राजनीति के गलियारों में क्या चल रहा है?
गुरुजी के जाने पर कांग्रेस और RJD जैसे दलों ने उन्हें “आदिवासियों का असली हीरो” बताया। BJP ने भी शोक जताया, पर साथ ही JMM पर परिवारवाद का इल्ज़ाम भी लगा दिया। पर सबसे दिलचस्प बात? झारखंड के आदिवासी इलाकों में लोग आज भी उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं। क्या आपको नहीं लगता कि ये सच्ची विरासत की निशानी है?
अब आगे क्या? JMM का भविष्य किसके हाथ में?
अब JMM की बागडोर पूरी तरह हेमंत सोरेन के हाथ में है। पर सवाल ये है कि क्या वो इस विरासत को संभाल पाएंगे? ED की जांच, आरोपों का साया… ये सब JMM के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। राजनीति के जानकार कह रहे हैं कि झारखंड में अब नए नेतृत्व का दौर शुरू होगा। और आदिवासी मुद्दों पर पार्टी की नीतियां भी बदल सकती हैं। एक तरफ तो गुरुजी का जाना एक व्यक्ति की कहानी है, पर दूसरी तरफ ये झारखंड की राजनीति का पूरा एक दौर खत्म होने जैसा है। क्या आपको नहीं लगता?
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शिबू सोरेन: एक झारखंडी सपने का दर्द… और कुछ सवाल
CM की कुर्सी गई कैसे?
असल में बात ये है कि शिबू सोरेन की कहानी सिर्फ एक नेता की नहीं, बल्कि झारखंड के संघर्ष की कहानी है। CM पद से हटना? वो तो राजनीति का खेल है भाई! पार्टी के अंदरूनी खेल, विरोधियों की चालें… और हां, कुछ अपनों के भी छुरे घोंपे गए। लेकिन सच तो ये है कि झारखंड की जनता आज भी उन्हें ‘गुरुजी’ कहकर बुलाती है।
बेटे की मौत – एक बाप का सबसे बड़ा दर्द
ईमानदारी से कहूं तो इससे बड़ा दुख किसी भी पिता के लिए क्या हो सकता है? दुर्गा सोरेन की वो सड़क दुर्घटना… सिर्फ एक खबर नहीं थी। एक परिवार की तबाही थी। राजनीति के पन्नों में ये घटना शायद सिर्फ एक लाइन है, लेकिन गुरुजी के लिए ये ज़ख्म आज भी ताजा होगा।
आज कहां हैं शिबू सोरेन?
सुनो, असली नेता कभी रिटायर नहीं होते! 80 साल की उम्र में भी वो झारखंड की राजनीति में सक्रिय हैं। पार्टी के लिए काम कर रहे हैं, युवाओं को गाइड कर रहे हैं। पर एक बात… अब वो पहले जैसे aggressive नहीं रहे। शायद ज़िंदगी ने उन्हें कुछ सबक सिखाए हैं।
सबसे बड़ी चुनौती? ज़िंदगी ने दिया कड़वा इम्तिहान
देखिए, राजनीति में तो चुनौतियां आती-जाती रहती हैं। लेकिन जब CM पद से हटना पड़े और उसके कुछ ही समय बाद बेटे को खोना पड़े… ये दोहरा घाव है। मैं समझ सकता हूं कि ये वो दौर रहा होगा जब शायद गुरुजी ने सबकुछ छोड़ देने के बारे में सोचा होगा। लेकिन वो झारखंड के लौह पुरुष हैं न! उठ खड़े हुए और आज भी मैदान में हैं।
क्या आपको नहीं लगता कि ऐसे नेताओ की कहानियां सिर्फ राजनीति नहीं, ज़िंदगी के सबक सिखाती हैं? मुझे तो लगता है…
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com
