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“शुभांकर मिश्रा की कचहरी: जेल या गैंगस्टरों का अड्डा? अपराधियों का VIP राज़ उजागर!”

शुभांकर मिश्रा की कचहरी: जेल या गैंगस्टरों का अड्डा? अपराधियों का VIP राज़ उजागर!

अरे भाई, क्या आपने शुभांकर मिश्रा का वो धमाकेदार एपिसोड देखा? जिसमें उन्होंने भारतीय जेलों का वो कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। सच कहूं तो हम सब जानते थे कि जेलों में कुछ गड़बड़ है, लेकिन इतना बड़ा खेल? ये तो पूरा ‘क्राइम corporate hub’ बन चुका है जहां बंद लोग भी खुलेआम अपराध चला रहे हैं। और हमें लगता था कि जेल सुधार का स्थान है… हंसी आती है न?

एक सिस्टम जो अपराधियों के हाथों बंधक बन गया

देखिए, भारत में जेलों को लेकर हमेशा से अफवाहें चलती रही हैं। लेकिन अब ये अफवाह नहीं, खुला सच है। चोटा राजन से लेकर बिश्नोई तक – ये सभी जेल को अपना ‘corporate office’ बना चुके हैं। सोचिए, जेल की चारदीवारी के अंदर बैठकर ड्रग्स से लेकर online fraud तक का कारोबार! और सबसे हैरानी की बात? ये सब बिना अंदरूनी मदद के संभव ही नहीं। तो सवाल यह है कि क्या हमारा पूरा सिस्टम ही इनके हाथों की कठपुतली बन चुका है?

वो गुप्त दस्तावेज जिसने उड़ाए सिस्टम के पर्दे

अब आते हैं मिश्रा जी के उन ‘बम’ पर जिन्होंने पूरे मामले को ही पलटकर रख दिया। phone recordings, bank transactions… सब कुछ साफ-साफ दिखा रहा है कि कैसे जेल के अंदर से पूरा नेटवर्क चलाया जा रहा है। और तो और, कुछ अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। भईया, ये तो वाकई डरावना है। सच कहूं तो मैंने पहले भी ऐसी खबरें सुनी थीं, लेकिन इतने सबूत? एकदम ज़बरदस्त।

देश की प्रतिक्रिया: सियासत से लेकर सड़क तक

अब देखिए न मजा – एक तरफ तो गृह मंत्री जी तुरंत कार्रवाई की बात कर रहे हैं, वहीं विपक्ष सरकार को कोस रहा है। राहुल गांधी जी ने तो पूरा ‘system failure’ घोषित कर दिया। और social media? वहां तो #JailMafia ट्रेंड कर रहा है। पर सच पूछो तो ये सब देखकर लगता है कि हर कोई अपनी रोटी सेक रहा है। असली सवाल यह है कि क्या कोई वास्तव में इस समस्या को हल करने की सोच रहा है?

आगे की राह: सुधार या सिस्टम का ढहना?

तो अब क्या? क्या CCTV और strict monitoring से ही सब ठीक हो जाएगा? मेरी नज़र में तो ये समस्या बहुत गहरी है। जब तक पूरे सिस्टम में transparency नहीं आएगी, तब तक ये सब चलता रहेगा। और हां, ये मत सोचिए कि ये नया है – ये तो बस अब ज़्यादा साफ दिख रहा है। सच तो यह है कि हमारी जेल व्यवस्था सालों से खोखली हो चुकी है। बस अब तो ये देखना है कि क्या इस बार सच में कुछ बदलाव आएगा, या फिर ये भी वही ‘चलता है’ वाली कहानी साबित होगी?

एक बात तो तय है – शुभांकर मिश्रा ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पत्रकारिता की ताकत क्या होती है। लेकिन अब बारी हमारी है – क्या हम सिर्फ shock होकर रह जाएंगे, या फिर इस बार कुछ बदलवाने की कोशिश करेंगे? सोचने वाली बात है…

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Source: NDTV Khabar – Latest | Secondary News Source: Pulsivic.com

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