“क्या सिद्धारमैया, डीके शिवकुमार को गहलोत-पायलट स्टाइल में निपटाएंगे? राजनीतिक भूचाल की आहट!”

क्या सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की कहानी भी गहलोत-पायलट ड्रामा जैसी होगी? राजनीति का नया सीजन शुरू!

अरे भई, कर्नाटक की राजनीति तो मानो साला ओटीटी सीरीज की तरह हो गई है – नए एपिसोड, नए ट्विस्ट! सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच की यह टेंशन अब खुलकर सामने आने लगी है। असल में देखा जाए तो यह वही पुरानी कहानी है – सत्ता, अहंकार और राजनीति। पर इस बार का मामला राजस्थान के उस विवाद की याद दिलाता है जब गहलोत और पायलट की लड़ाई ने कांग्रेस को झकझोर दिया था। और अब तो 2024 के Lok Sabha elections भी नजदीक हैं… समझ रहे हैं न मामले की गंभीरता?

पूरा माजरा क्या है? जानिए असली कहानी

देखिए, कर्नाटक में Congress सरकार बनते ही यह तनाव शुरू हो गया था। शिवकुमार जी, जो कर्नाटक में Congress के बड़े धुरंधर माने जाते हैं, खुद को CM पद का असली दावेदार समझते हैं। पर high command ने सिद्धारमैया को चुन लिया। और यहाँ से शुरू हुई नई कहानी! शिवकुमार के लोग इसे ‘इनसाफ का मामला’ बता रहे हैं। सच कहूँ तो, राजस्थान में पायलट जी ने भी ऐसा ही कुछ कहा था न? और फिर क्या हुआ, सब जानते हैं।

अब ताजा हालात क्या हैं? विद्रोह की आहट?

पिछले कुछ दिनों में तो मामला और भी गरमाया है। शिवकुमार ने अपने वफादारों के साथ एक बंद कमरे में मीटिंग की – और राजनीति की दुनिया में ऐसी मीटिंग्स का मतलब सब जानते हैं! दूसरी तरफ, सिद्धारमैया जी भी बैठे नहीं हैं – उन्होंने cabinet reshuffle करके अपनी चाल चल दी। Congress leadership ने emergency talks तो की हैं, पर अभी तक कोई हल नहीं निकला। और हाँ, इस पूरे खेल में BJP भी मौके की ताक में बैठी है। वो तो बस कोई मौका ढूंढ रही है सरकार को हिलाने का!

कौन क्या कह रहा है? सुनिए जनाब!

Congress के कुछ बड़े नेता तो इसे ‘मीडिया का बनाया हुआ मामला’ बता रहे हैं। मजे की बात यह है कि शिवकुमार के समर्थक खुलेआम बोल रहे हैं – “हक नहीं मिला तो सड़कों पर उतर आएंगे!” Political analysts की मानें तो Congress को अभी समय रहते इस आग पर काबू पाना होगा, नहीं तो 2024 में यह आग उन्हें ही जला देगी। सच कहूँ तो, यह स्थिति उस छाते जैसी है जो खुद बारिश में भीग रहा हो!

आगे क्या होगा? किसकी चलेगी?

अब सबकी नजरें Delhi में बैठे high command पर हैं। अगर जल्दी कोई हल नहीं निकला तो… अरे भई, शिवकुमार के लोग सड़कों पर उतर सकते हैं! संभावनाएं तो कई हैं – शायद direct talks हो, या फिर किसी एक को झुकना पड़े। पर एक बात तय है – BJP इस मौके को हाथ से जाने नहीं देगी। 2024 से पहले Congress के लिए यह वाकई में do or die moment है। एक गलत कदम और दक्षिण की राजनीति में उनकी पकड़ ढीली हो सकती है। सोचिए, क्या Congress इस बार सही चाल चल पाएगी?

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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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