एटा में नाग की मौत का बदला? 24 घंटे का हड़कंप – सच्चाई या सिर्फ डर का खेल?
क्या आपने कभी सुना है कि सांप बदला लेने आए? उत्तर प्रदेश के एटा में एक छोटे से गाँव में तो यही हो रहा है… या फिर लोगों को ऐसा लग रहा है। असल में, ये कहानी इतनी दिलचस्प है कि आप सोच में पड़ जाएंगे – ये सच है या सिर्फ लोगों का डर? गाँव वालों का दावा है कि एक नाग (नर सांप) के मरने के ठीक 15 दिन बाद, एक नागिन उसी घर में घुस आई और पूरे 24 घंटे तक फुंफकारती रही। अब सवाल ये है – क्या सच में सांपों में बदला लेने की क्षमता होती है? या फिर ये सिर्फ एक अजीबोगरीब coincidence है?
मामला क्या है, आखिर?
कहानी शुरू होती है 15 दिन पहले, जब एक किसान के घर में नाग दिखा। डर के मारे उसे मार डाला गया। अब यहाँ दो बातें – एक तो हमारे गाँव-देहात की मान्यता कि नाग-नागिन देवता के समान हैं। दूसरी तरफ, science कहती है कि ये सिर्फ एक जानवर है। गाँव के बुजुर्ग कह रहे हैं कि पहले भी ऐसा हो चुका है, जब नागिन ने बदला लिया। लेकिन सच्चाई जानने के लिए हमने बात की herpetology expert डॉ. राजीव सिंह से। उनका साफ कहना है – “सांपों का दिमाग इतना विकसित नहीं होता कि वो बदला ले सकें।” तो फिर ये सब क्या है?
वो 24 घंटे जिन्होंने सबको डरा दिया
कल्पना कीजिए – अचानक आपके घर में एक बड़ी सी नागिन घुस आए और पूरे दिन फुंफकारती रहे! गाँव वालों का कहना है कि snake catcher को भी उसने डरा दिया। पुलिस और forest department वाले तो इसे मजाक समझ रहे थे। लेकिन social media पर जो videos वायरल हुए, उन्होंने मामले को और बढ़ा दिया। सच कहूँ तो, देखने में ये सच में डरावना लगता था। पर क्या ये सच में बदले की भावना थी, या फिर कुछ और?
कौन क्या कह रहा है?
गाँव अब दो हिस्सों में बंट गया है – एक तरफ वो जो मंदिरों में पूजा करवा रहे हैं, दूसरी तरफ वो जो इसे सिर्फ एक संयोग मानते हैं। डॉ. सिंह की मानें तो हो सकता है वो नागिन पहले से ही उस इलाके में रहती हो। मतलब? कोई बदला नहीं, बस एक सामान्य घटना। पर सवाल ये है कि लोगों को यकीन क्यों नहीं हो रहा?
अब आगे क्या?
प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है। वन विभाग की एक टीम जाँच कर रही है। Police ने social media पर फैल रही अफवाहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। Experts का कहना है कि ऐसे मामलों को scientific दृष्टि से देखना चाहिए। पर सच तो ये है कि जब तक कोई ठोस सबूत नहीं मिलता, ये सवाल बना रहेगा – क्या ये सच में बदला था? या फिर हमारे डर ने हमें एक साधारण घटना को अलौकिक बना दिया?
एक बात तो तय है – ये घटना न सिर्फ एटा के इस गाँव, बल्कि पूरे समाज में अंधविश्वासों पर सवाल खड़े करती है। क्या हम 21वीं सदी में भी पुरानी मान्यताओं से बंधे रहेंगे? ये तो वक्त ही बताएगा…
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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com