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“मां के बिना नहीं चलता ऑटो! 10 साल से बेटे के साथ हर सफर में रहीं सत्यवती”

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मां के बिना ऑटो चलता ही नहीं! 10 साल से बेटे की हर राइड में शामिल रहीं सत्यवती

आंध्र प्रदेश के एक छोटे से शहर की सड़कों पर एक ऑटो चलता है… पर यह कोई आम ऑटो नहीं। सच कहूं तो यह तो प्यार की चलती-फिरती मूरत है! गोपी नाम के इस ड्राइवर और उनकी मां सत्यवती की कहानी सुनकर आपका दिल भर आएगा। सोशल मीडिया पर तो लोग इन्हें देखकर रो पड़े। सोचिए, पिछले 10 साल से गोपी हर रोज़ अपनी मां को ऑटो में बिठाकर चलते हैं। शुरुआत तो एक दुख की वजह से हुई थी – पिता के अचानक चले जाने के बाद मां की हालत देखी नहीं जा रही थी। लेकिन आज? यह रिश्ता पूरे इलाके की पहचान बन चुका है।

कहानी तब शुरू हुई जब गोपी के पिता अचानक इस दुनिया में नहीं रहे। सत्यवती तो जैसे टूट सी गईं – पति गए, साथ में उनकी खुशी भी चली गई। ईमानदारी से कहूं तो उनका दिमागी संतुलन तक डगमगाने लगा था। ऐसे में गोपी ने क्या किया? बस एक साधारण सा फैसला लिया – “मां को कभी अकेला नहीं छोड़ूंगा।” ऑटो चलाने लगे तो मां को भी साथ बिठा लिया। पहले तो लोगों को अजीब लगा, पर अब? यही तो उनकी पहचान है!

आज गोपी और उनकी मां पूरे इलाके का गर्व बन चुके हैं। सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद तो इनकी चर्चा पूरे देश में होने लगी। मजे की बात ये कि यात्री भी सत्यवती के साथ सफर करना पसंद करते हैं। कुछ तो जानबूझकर गोपी का ऑटो ही चुनते हैं! एक यात्री ने तो मुझे बताया – “भईया, उनकी मां के साथ बैठकर ऐसा लगता है जैसे अपनी ही मां के साथ घूम रहे हों।” सच में, ये बात दिल को छू जाती है।

लोग क्या कहते हैं? एक स्थानीय दुकानदार ने तो मुझसे कहा – “आजकल तो बच्चे माता-पिता को ओल्ड एज होम छोड़ आते हैं, पर गोपी ने दिखा दिया कि असली बेटा कैसा होता है!” सोशल मीडिया पर तो लोगों के संदेश पढ़कर आंखें नम हो जाती हैं। गोपी का कहना सीधा-साधा है – “जब तक मां हैं, मैं हूं। उन्हें अकेला कैसे छोड़ दूं?” सच कहूं तो ये शब्द ही काफी हैं।

आज ये जोड़ी पूरे समाज के लिए मिसाल बन चुकी है। प्रशासन भी इन्हें सम्मानित करने की तैयारी कर रहा है। समाजशास्त्री कहते हैं कि ऐसी मिसालें हमें याद दिलाती हैं कि परिवार का मतलब क्या होता है। गोपी का मैसेज तो बिल्कुल क्लियर है – “मां-बाप की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं।”

सच तो ये है कि ये कहानी साबित करती है कि प्यार हर दुख की दवा है। गोपी और सत्यवती ने न सिर्फ अपना दुख भुलाया, बल्कि पूरे समाज को एक सबक भी दिया। एक छोटे से ऑटो में बैठी ये मां और उसका बेटा असल में हमारे दिलों में बस गए हैं। क्या आपको नहीं लगता कि ऐसी ही कहानियां हमारे समाज को बचाए रखेंगी?

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ये कहानी तो सच में दिल छू लेने वाली है, है न? गोपी और सत्यवती की ये जोड़ी साबित करती है कि जब दिल में प्यार हो और इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मुश्किल आखिरकार छोटी पड़ जाती है। सोचिए, एक बेटा जो अपनी माँ के लिए इतना कुछ कर गुजरता है – ये सिर्फ़ ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि प्यार का वो सच्चा स्वरूप है जो हम सभी को सीखना चाहिए।

असल में, इन दोनों की ये यात्रा सिर्फ़ एक माँ-बेटे के रिश्ते की खूबसूरती ही नहीं दिखाती, बल्कि एक बड़ा सबक भी देती है। वो ये कि family को life में हमेशा top priority देना चाहिए। और सत्यवती का हर कदम पर गोपी के साथ खड़े रहना… अरे भई, यही तो है असली प्यार!

मैं तो कहूँगा, आजकल के इस भागदौड़ भरे ज़माने में जहाँ हर कोई अपने में मशगूल है, ऐसी कहानियाँ हमें रुककर सोचने पर मजबूर कर देती हैं। क्या आपको नहीं लगता?

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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