स्पाइसजेट का वो हंगामा: जब एक आर्मी अफसर ने बैगेज नियमों पर तोड़ा तमाशा!
अरे भाई, क्या बताऊं… बुधवार को स्पाइसजेट के साथ हुआ वाकया सुनकर तो मैं भी हैरान रह गया। सोचिए, एक आर्मी अफसर और एयरलाइन स्टाफ के बीच झगड़ा हो गया – वो भी एक्स्ट्रा लगेज को लेकर! असल में, मामला तब गरमाया जब अफसर साहब ने 16 किलो का सामान लेकर चल पड़े, जबकि नियम तो सिर्फ 7 किलो का ही इजाजत देता है। और हां, जब स्टाफ ने चार्ज मांगा तो… अच्छा, वो आगे बताता हूँ।
देखा जाए तो ये पूरा विवाद स्पाइसजेट के उस छोटे से नियम से शुरू हुआ जो हम सभी को परेशान करता है – वो कैबिन बैग की वेट लिमिट। पर सवाल यह है कि क्या नियम तोड़ने का हल मारपीट है? अफसर ने तो जैसे ही ‘नो’ सुना, बस फिर तो बिना बोर्डिंग पूरी किए ही एयरोब्रिज में घुसने लगे। और जब स्टाफ ने रोका तो… चार बेचारों की धुनाई हो गई। बात सुनकर अजीब लगता है न?
अब तो ये केस पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर तो जैसे माहौल गरम है – कोई अफसर के सपोर्ट में है तो कोई कह रहा है कि नियम सबके लिए एक जैसे होने चाहिए। ईमानदारी से कहूं तो मेरी नजर में, चाहे कोई भी हो, एयरलाइन के नियम तो सभी पर लागू होने चाहिए। है न?
वैसे दोनों तरफ से बयान आ चुके हैं। स्पाइसजेट वालों का कहना है – “हमारे स्टाफ ने तो बस नियम फॉलो किया।” वहीं आर्मी की तरफ से आया जवाब – “जाँच चल रही है, अगर गलती निकली तो एक्शन लिया जाएगा।” एक यात्री ने तो बिल्कुल सही कहा – “अगर मैं नियम मानता हूँ तो बड़े ओहदे वालों को क्यों नहीं?” सच कहा न!
अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि आगे क्या होगा। क्या आर्मी अपने अफसर के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी? क्या स्पाइसजेट उन्हें ब्लैकलिस्ट कर देगी? और सबसे बड़ा सवाल – क्या हमारे समाज में अभी भी ‘ऊँचे पद’ वालों को नियमों से ऊपर समझा जाता है? ये तो वक्त ही बताएगा… पर ये घटना निश्चित ही हम सभी के लिए एक सबक है।
क्या आपको नहीं लगता कि ऐसे मामलों में हमें सिर्फ तमाशा देखने की बजाय सिस्टम पर सवाल उठाने चाहिए? सोचिए जरा…
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ये वाकया तो वाकई कुछ सोचने पर मजबूर कर देता है। सोचिए, आप एक लंबी flight के बाद थके हुए हैं, और फिर extra luggage को लेकर झगड़ा शुरू! SpiceJet का ये मामला तो बस एक उदाहरण है, पर असल सवाल ये है कि हम यात्रा के दौरान अपने patience का स्तर कैसे बनाए रखें?
अब, staff और passenger के बीच तनाव… ये तो होता रहता है। लेकिन सच तो ये है कि थोड़ी सी समझदारी और शांत दिमाग से बात करने पर ज़्यादातर issues solve हो सकते हैं। माना कि गुस्सा आना स्वाभाविक है – पर क्या ये आपकी पूरी यात्रा को खराब करने के लायक है?
एक तरफ airline के rules होते हैं, दूसरी तरफ passenger की परेशानियाँ। ईमानदारी से कहूँ तो, दोनों को थोड़ा adjust करना पड़ता है। वैसे भी, यात्रा का मज़ा तभी है जब सबकुछ smoothly चले। तो क्यों न थोड़ा patience और थोड़ा cooperation? सोचिएगा ज़रूर!
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