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स्टारबक्स का मुनाफा गिरा, टर्नअराउंड की भारी लागत ने बढ़ाई मुश्किलें

स्टारबक्स का मुनाफा गिरा – पर क्यों? टर्नअराउंड की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है

अरे भाई, कॉफी का जादू बिखरता दिख रहा है! दुनिया की सबसे मशहूर कॉफी चेन Starbucks ने हाल ही में अपने नंबर्स जारी किए हैं, और खबर अच्छी नहीं है। तिमाही आय रिपोर्ट देखकर तो लगता है जैसे कंपनी की हालत वैसी ही है जैसे बिना एस्प्रेसो शॉट वाली लट्टे – बेजान! मुनाफे में जो गिरावट आई है, वो सिर्फ निवेशकों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मार्केट के लिए चौंकाने वाली है। और सबसे मजेदार बात? जिस टर्नअराउंड के लिए कंपनी जान तोड़ कोशिश कर रही है, उसी की लागत ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। नए baristas की भर्ती? हुई। Hospitality standards को टाइट किया? बिल्कुल। पर असल सवाल तो ये है कि – क्या ये सब करके भी वो अपने ग्राहकों को वापस ला पाएंगे?

पीछे देखें तो: मुसीबतों का सिलसिला नया नहीं

ईमानदारी से कहूं तो Starbucks की ये परेशानी अचानक नहीं आई। पिछले कुछ सालों से तो ये कंपनी एक के बाद एक चुनौतियों से जूझ ही रही थी। ग्राहक कम हो रहे हैं, competition बढ़ रहा है – ये तो वही पुरानी कहानी है। पर COVID के बाद तो हालात और भी खराब हो गए। पूरी दुनिया में coffee shops का बिजनेस ऊपर-नीचे हो रहा है, और Starbucks भी इससे बच नहीं पाया। कंपनी ने तो हर वो उपाय किया जो कोई कर सकता था – ज्यादा staff रखा, training programs चलाए, quality पर ध्यान दिया। लेकिन सच ये है कि अब तक इनका कोई खास फायदा नहीं दिखा। क्या आपको नहीं लगता कि शायद ये कंपनी अपनी ही सफलता का शिकार हो रही है?

ताजा हालात: पैसा कम, खर्चे ज्यादा – गणित बिगड़ा हुआ

अब आते हैं सबसे दिलचस्प हिस्से पर। Starbucks की latest financial report पढ़कर तो लगता है जैसे किसी ने उनके पूरे बिजनेस मॉडल को हिला कर रख दिया हो! पिछली तिमाही के मुकाबले profits कितने कम हैं, ये तो आप अंदाजा भी नहीं लगा पाएंगे। कारण? एक तरफ तो operating costs आसमान छू रहे हैं, दूसरी तरफ ग्राहकों का behavior ही बदल गया है। कंपनी ने customer experience को बेहतर बनाने के लिए जो कदम उठाए – नए baristas, बेहतर service standards – उन सबने costs को और बढ़ा दिया है। और सबसे बड़ी आयरनी? जिस “experience” पर वो इतना जोर दे रहे हैं, वो अभी तक पूरी तरह काम ही नहीं कर पाया है। क्या आपको नहीं लगता कि ये सब करने से पहले उन्हें market research पर थोड़ा और पैसा खर्च करना चाहिए था?

लोग क्या कह रहे हैं? – हर कोई अपनी-अपनी राग अलाप रहा है

अब सुनिए इस पर अलग-अलग लोग क्या कहते हैं। Market analysts तो यही बोल रहे हैं कि दिशा तो सही है, पर short-term costs ने investors की नींद उड़ा दी है। कर्मचारी? वो training programs से खुश जरूर हैं, पर कुछ तो overwork की शिकायत भी कर रहे हैं। और ग्राहक? उनकी राय तो पूरी तरह divided है – कुछ को service में सुधार दिख रहा है, तो कुछ के लिए बढ़ती prices ही सबसे बड़ी चिंता है। सच तो ये है कि जब तक ये तीनों ग्रुप एक साथ खुश नहीं होंगे, तब तक Starbucks के लिए रास्ता आसान नहीं होने वाला।

आगे क्या? – अगला कदम ही तय करेगा भविष्य

तो अब सवाल ये उठता है कि आगे क्या? अगले कुछ महीनों में ही पता चल जाएगा कि Starbucks की ये नई रणनीति काम करती है या नहीं। ग्राहक वापस आएंगे या नहीं – ये तो वक्त ही बताएगा। पर एक बात तो तय है – investors और experts सभी की नजरें अब कंपनी के हर कदम पर हैं। खासकर cost control और revenue बढ़ाने के उपायों पर। हालांकि, अगर ये प्लान सही से execute होता है, तो भविष्य में फायदा हो सकता है। पर फिलहाल तो स्थिति वैसी ही है जैसे बिना चीनी की कॉफी – थोड़ी कड़वी!

स्टारबक्स का मुनाफा गिरा – जानिए क्या है पूरा माजरा?

स्टारबक्स का मुनाफा क्यों गिरा? (और ये हमें क्यों परेशान कर रहा है?)

देखिए, अगर आसान भाषा में कहें तो स्टारबक्स की जेब पर दो तरफ़ से वार हुआ है। एक तरफ़ तो उनका खर्चा बढ़ गया – stores चलाना, employees की salaries… ये सब मिलाकर operational costs आसमान छू रहे हैं। और दूसरी तरफ़? हम जैसे customers भी अब पहले जितना खर्च नहीं कर रहे। सच कहूँ तो, ये वही कहानी है जब महंगाई आपके घर और कंपनी दोनों की जेब ढीली कर दे!

टर्नअराउंड स्ट्रैटेजी – ये क्या चीज़ है भाई?

अरे भई, इसे ऐसे समझिए – जब आपकी कार धंस जाए कीचड़ में, तो आप क्या करते हैं? या तो गाड़ी को push करते हैं, या फिर रस्सी से खींचते हैं। बिल्कुल वही हाल स्टारबक्स का है! उन्होंने stores को चमकाया, नए frappuccinos लॉन्च किए, और ऑनलाइन ऑर्डर पर ज़ोर दिया। पर ये सब करने में पैसा तो लगेगा न? और यही लागत अभी उनके profits को खा रही है।

क्या स्टारबक्स फिर से उठ पाएगा? (मेरी चाय की चुस्की के साथ एक सवाल)

एक्सपर्ट्स की राय? हाँ… पर शायद तुरंत नहीं। अगर उनकी ये नई strategies काम करती हैं – जैसे कि मैं और आप उनके नए oat milk latte को पसंद करने लगें – तो long-term में उम्मीद है। लेकिन याद रखिए, रातों-रात चमत्कार नहीं होता। कम से कम coffee business में तो नहीं!

स्टारबक्स vs बाकी दुनिया – कौन जीत रहा है?

ज़रा सोचिए – आपके locality में अब कितनी नई coffee shops खुल गई हैं? Dunkin’ और Costa Coffee तो हैं ही, पर असली competition तो वो छोटे-छोटे local cafes दे रहे हैं। क्यों? क्योंकि वो सस्ते भी हैं, और हमारे taste के ज्यादा करीब भी। सच पूछो तो, अब हर कोई बड़े brands के बजाय ‘वो वाला मसाला चाय वाला’ ढूंढ रहा है!

Source: Financial Times – Companies | Secondary News Source: Pulsivic.com

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