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इस सप्ताह स्टॉक मार्केट के लिए बड़े ट्रिगर्स: RBI MPC मीटिंग, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और Q1 आय

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इस हफ्ते स्टॉक मार्केट: RBI का फैसला, अमेरिका से डील और कंपनियों के नतीजे क्या बदल देंगे गेम?

भईया, ये सेंसेक्स-निफ्टी का रोलरकोस्टर थमने का नाम ही नहीं ले रहा! लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट… और निवेशकों की नींद उड़ा दी है। पर सवाल यह है कि आखिर इसकी वजह क्या है? देखिए न, एक तरफ तो FIIs पैसा निकाल रहे हैं, दूसरी तरफ DIIs खरीदारी में जुटे हैं। ऐसे में तीन बड़ी खबरों ने इस हफ्ते बाजार का रुख तय किया – RBI की बैठक, अमेरिका के साथ ट्रेड डील की चर्चा और कंपनियों के Q1 नतीजे। सच कहूं तो ये तीनों ही गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं।

अब जरा हालात समझिए – पिछले कुछ महीनों से मार्केट वैसे ही उछल-कूद कर रहा है जैसे कोई नया क्रिकेटर पिच पर। महंगाई का भूत, ब्याज दरों का डर… और ऊपर से रुपया लुढ़कता जा रहा है। ऐसे में निवेशक क्या करें? हर छोटी-बड़ी खबर पर कान खड़े कर देते हैं। और इस बार तो RBI का फैसला सबसे बड़ा ट्रिगर रहा।

RBI वालों ने क्या सुनाया? ब्याज दरों का सस्पेंस

असल में बात ये है कि RBI की इस बैठक को लेकर सबके दिल धड़क रहे थे। आखिरकार, पिछले कुछ महीनों से तो रेपो रेट बढ़ते ही जा रहा था। लोगों के मन में सवाल – क्या इस बार भी ब्याज बढ़ेगा? या शायद रुक जाए? एक तरफ तो महंगाई पर लगाम जरूरी है, पर दूसरी तरफ ग्रोथ भी तो चाहिए न! बैंकरों से लेकर होम लोन लेने वालों तक, सबकी नजरें गवर्नर शक्तिकांत दास पर टिकी थीं। क्योंकि ये फैसला सीधे आपके पॉकेट पर असर डालने वाला था।

अमेरिका से डील: IT और फार्मा वालों के चेहरे खिले!

दूसरी बड़ी खबर जिसने मार्केट को हिलाया – वो थी भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील की बातचीत। सुनकर तो ऐसा लगा जैसे IT और फार्मा सेक्टर के शेयरों में जान आ गई! क्योंकि अगर ये डील हो जाती है, तो हमारे एक्सपोर्ट को बड़ा बूस्ट मिल सकता है। पर सच पूछो तो अभी तक सब कुछ साफ नहीं है। जानकार कह रहे हैं कि अगर सब कुछ ठीक रहा, तो ये डील कई सेक्टर्स के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। एकदम ज़बरदस्त।

कंपनियों के Q1 नतीजे: किसने मारी, किसने खाई?

इस हफ्ते तो कंपनियों के नतीजे भी आए – और क्या-क्या ड्रामा हुआ! कुछ कंपनियों ने तो एक्सपेक्टेशन्स को पार कर दिया, वहीं कुछ ने निवेशकों को निराश किया। बैंकिंग सेक्टर वालों का प्रदर्शन? ठीक-ठाक। IT वालों का? कुछ खास नहीं। FMCG? उम्मीद से बेहतर। ये तिमाही नतीजे तो हमेशा ही मार्केट को हिला देते हैं, क्योंकि इनसे पता चलता है कि कंपनी असल में कैसा कर रही है। और इस बार तो कुछ सरप्राइज रिजल्ट्स आए हैं जिन पर चर्चा होती रहेगी।

एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं? और छोटे निवेशक क्या करें?

मार्केट के जानकारों की मानें तो अभी वॉलैटिलिटी बनी रहेगी। RBI के फैसले से लेकर ग्लोबल मार्केट्स तक – हर चीज का असर होगा। छोटे निवेशक तो अभी डरे हुए हैं, बड़ी पोजीशन लेने से कतरा रहे हैं। पर बड़े फंड्स वाले? वो तो इस उथल-पुथल को ही मौका समझ रहे हैं! कुछ इंडस्ट्री वाले RBI से ब्याज दर न बढ़ाने की गुजारिश कर रहे हैं, वहीं एक्सपोर्टर्स अमेरिका डील का इंतजार कर रहे हैं।

अगले हफ्ते क्या? आपके पोर्टफोलियो के लिए मायने

तो अब सवाल यह है कि अगले हफ्ते क्या होगा? RBI का फैसला अगर ब्याज दरें बढ़ाता है, तो बैंकिंग और रियल एस्टेट वालों को झटका लग सकता है। वहीं अमेरिका डील पर कोई पॉजिटिव खबर आई तो IT और फार्मा सेक्टर उछल सकते हैं। Q1 रिजल्ट्स के आधार पर भी कुछ स्टॉक्स में हलचल होगी – खासकर जिन कंपनियों ने एक्सपेक्टेशन्स को धता बताया है। और हां, ग्लोबल मार्केट्स का रुख भी तो देखना होगा!

मेरी निजी राय? अभी का माहौल थोड़ा सावधानी मांगता है। पर लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए ये अच्छे स्टॉक्स में घुसने का गोल्डन चांस हो सकता है। बस, खबरों पर नजर रखिए और समझदारी से फैसला लीजिए। क्योंकि मार्केट में पैसा बनाना है तो नर्व्स ऑफ स्टील चाहिए!

इस हफ्ते Stock Market की चाल पर कई बड़े फैक्टर्स की छाप दिखने वाली है। RBI का MPC Meeting हो या फिर India-US Trade Deal पर चल रही बातचीत – ये सभी बाजार के मूड को सेट कर सकते हैं। और हां, Q1 Earnings तो है ही, जिसे इग्नोर करना निवेशकों के लिए बिल्कुल भी स्मार्ट मूव नहीं होगा।

अब सवाल यह है कि इन सबके बीच कैसे नेविगेट किया जाए? मेरा मानना है थोड़ा वेट-एंड-वॉच अप्रोच काम आ सकता है। बाजार में उछाल-गिरावट तो आती रहती है, लेकिन जो समझदारी से पोजीशन लेते हैं, वही लॉन्ग टर्म में मुनाफा कमाते हैं।

एक छोटी सी बात और – emotional होकर डिसीजन लेने से बचें। पहीदा रहें, स्टे ट्यून्ड रहें, और जानकारी के आधार पर ही अपना अगला कदम उठाएं। क्योंकि यही सही मायने में smart investing है!

(ध्यान दें: थोड़ा कैजुअल टोन, रिअलिस्टिक एडवाइस और सीधे पाठक से जुड़ने की कोशिश की गई है। साथ ही, सेंटेंस स्ट्रक्चर को वैराइटी देने के लिए छोटे-बड़े वाक्यों का मिक्स किया गया है।)

Source: Livemint – Markets | Secondary News Source: Pulsivic.com

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