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“सुधांशु त्रिवेदी का बड़ा खुलासा: क्या अमेरिका भारत के मतदाताओं में घुसपैठ कर रहा है?”

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सुधांशु त्रिवेदी का बड़ा खुलासा: क्या अमेरिका वाकई भारत के मतदाताओं में घुसपैठ कर रहा है?

अरे भई, भारतीय राजनीति में तो हर दिन नया ड्रामा आता है! और इस बार बीजेपी के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने न्यूज18 के शो “आरपार” में ऐसा बम फोड़ा कि सबके होश उड़ गए। उद्धव गुट की प्रियंका चतुर्वेदी से बहस के दौरान उन्होंने सीधे-सीधे दावा कर दिया कि अमेरिका ने हमारे मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की थी। सच कहूं तो, ये बयान सिर्फ टीवी डिबेट तक नहीं रुका – ट्विटर से लेकर दिल्ली की सियासी गलियारों तक में आग लगा दी।

पूरा माजरा क्या है? समझते हैं पूरा कॉन्टेक्स्ट

देखिए, ये सारा विवाद न्यूज18 के उसी शो “आरपार” से शुरू हुआ जिसमें अमीश देवगन मेजबानी कर रहे थे। त्रिवेदी ने ये आरोप ऐसे वक्त में उठाया जब पहले से ही चुनावों में विदेशी दखलंदाजी की चर्चाएं चल रही थीं। असल में, हमारी सरकार पहले भी social media platforms और कुछ विदेशी एजेंसियों पर ऐसे आरोप लगा चुकी है। लेकिन इस बार? सीधे अमेरिका का नाम लेकर बयान देना… ये तो गेम चेंजर है!

त्रिवेदी ने आखिर क्या कहा? मसला क्या है?

सुधांशु त्रिवेदी ने शो में कमाल की बात कही – “अमेरिकी एजेंसियों ने हमारे मतदाताओं को टारगेट किया था”। उनका कहना है कि सरकार ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया। और सच मानिए, इसके बाद तो #ForeignInterference ट्रेंड करने लगा। ट्विटर पर तो ऐसा तूफान आया कि देखते ही बनता था!

अब सियासत में क्या हलचल मची है?

यार, त्रिवेदी के इस बयान ने तो राजनीति की दुनिया में भूचाल ला दिया! बीजेपी वाले तालियां बजा रहे हैं – “भारत की संप्रभुता पर सवाल? बिल्कुल नहीं!” वहीं दूसरी तरफ, विपक्ष वालों का कहना है कि ये बिना सबूत के गंभीर आरोप हैं। कांग्रेस वाले तो सीधे सबूत मांगने लगे। और मीडिया एक्सपर्ट्स? वो इसके अंतरराष्ट्रीय असर को लेकर चिंता जता रहे हैं।

अब आगे क्या? क्या होगा अगला स्टेप?

अभी तो सरकार के आधिकारिक बयान का इंतज़ार है। सूत्रों की मानें तो अमेरिकी दूतावास की प्रतिक्रिया पर सबकी नज़र है। अगर मामला बढ़ा तो संसद में बहस तो होगी ही। और हां, Election Commission भी इसकी जांच कर सकती है। कुछ विश्लेषक तो यहां तक कह रहे हैं कि ये मामला भारत-अमेरिका रिश्तों की असली परीक्षा हो सकता है। सच्चाई ये है कि अभी सब कुछ अनसुलझा है।

आखिर में: सबसे बड़ा सवाल क्या है?

देखिए, त्रिवेदी के इस बयान ने विदेशी दखलंदाजी की बहस को नया जीवन दे दिया है। पर असली सवाल ये है कि क्या कोई ठोस सबूत सामने आएगा? या फिर ये सिर्फ एक सियासी हंगामा बनकर रह जाएगा? जैसे-जैसे ये केस आगे बढ़ेगा, दोनों देशों की प्रतिक्रिया देखने लायक होगी। एक बात तो तय है – ये मामला अभी और सुर्खियां बटोरेगा!

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सुधांशु त्रिवेदी के ये खुलासे… अरे भाई, सच में कुछ सोचने पर मजबूर कर देते हैं। एक तरफ तो हम ‘विश्वगुरु’ बनने की बात करते हैं, और दूसरी तरफ ये विदेशी हस्तक्षेप के सवाल? देखा जाए तो यह सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला नहीं है – बल्कि सीधे-सीधे हमारे फैसले लेने की आज़ादी से जुड़ा सवाल है।

त्रिवेदी जी ने जो कुछ बताया है, अगर वो सच निकला तो? ईमानदारी से कहूं तो ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं है। भारत जैसे बड़े democracy के लिए ये चुनौती किसी भूचाल से कम नहीं।

और हां, एक बात और। जब ऐसे मुद्दे उठते हैं तो हम सबका क्या रोल है? सिर्फ social media पर टिप्पणी करके छोड़ देंगे, या फिर गंभीरता से सोचेंगे? क्योंकि ये मामला… असल में हम सबका मामला है।

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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