सुक्खू कैबिनेट के बड़े फैसले: आपदा में घर गिरने पर 7 लाख मुआवजा, MBBS सीटों में वृद्धि
अच्छी खबर है हिमाचलवासियों के लिए! मुख्यमंत्री सुक्खू साहब की कैबिनेट ने आज दो ऐसे फैसले किए हैं जो सीधे आम आदमी की जिंदगी को छूने वाले हैं। पहला तो यह कि अब अगर किसी का घर प्राकृतिक आपदा में ध्वस्त हो जाए तो उसे 7 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा – और दूसरा, राज्य में MBBS की सीटें बढ़ाई जाएंगी। सच कहूं तो ये फैसले उन इलाकों के लिए तो वरदान से कम नहीं, जहां बारिश और भूस्खलन ने पिछले कुछ सालों में तबाही मचा रखी है।
पर ये फैसले अचानक क्यों?
असल में बात यह है कि हिमाचल में प्राकृतिक आपदाओं का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है। पिछले साल का भारी मानसून याद है न? उसने तो कई जिलों को तहस-नहस कर दिया था। सैकड़ों घर या तो पूरी तरह गिर गए थे या फिर आधे-अधूरे ढह गए थे। ऐसे में लोगों का मुआवजे को लेकर आक्रोश बढ़ना स्वाभाविक था। वहीं दूसरी तरफ, MBBS सीटों की कमी की वजह से हमारे बच्चों को दूसरे राज्यों में भटकना पड़ता था। सरकार ने इन्हीं दोनों समस्याओं पर एक साथ वार किया है। स्मार्ट मूव, है न?
क्या-क्या मिलेगा राहत पैकेज में?
तो सुनिए, इस पैकेज की सबसे बड़ी बात तो यही है कि अब पूरी तरह गिरे घर के लिए 7 लाख रुपये मिलेंगे – जो पहले के मुकाबले काफी ज्यादा है। आंशिक नुकसान के लिए भी अलग-अलग स्लैब में मुआवजा तय किया गया है। मानो या न मानो, यह उन हजारों परिवारों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है जो अपनी छत गंवा चुके हैं। पर सवाल यह है कि क्या यह रकम वास्तव में पर्याप्त है? खैर, यह तो वक्त ही बताएगा।
मेडिकल एजुकेशन में बड़ी छलांग
अब बात करते हैं MBBS सीटों की। सरकार ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों में 100 नई सीटें जोड़ने का फैसला किया है। यह कदम दो तरह से फायदेमंद है – एक तो हमारे बच्चों को पढ़ने के लिए बाहर नहीं भटकना पड़ेगा, दूसरा राज्य में डॉक्टरों की कमी भी कुछ हद तक दूर होगी। पर सच पूछो तो, क्या 100 सीटें पर्याप्त हैं? जब पूरे देश में डॉक्टरों की किल्लत चल रही है, तो शायद हमें और आक्रामक कदम उठाने की जरूरत है।
चार दिन तक चली बैठक का मतलब?
यहां एक दिलचस्प बात – ये फैसले एक ऐसी कैबिनेट बैठक में लिए गए जो लगातार चार दिन तक चली। हिमाचल के इतिहास में पहली बार! इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार इन मुद्दों को लेकर कितनी गंभीर थी। पर क्या यह सिर्फ दिखावा था या वास्तविक चिंता? ईमानदारी से कहूं तो, फैसले तो अच्छे हैं, पर अब इन्हें जमीन पर उतारने की बारी है।
क्या कह रही है राजनीति?
मुख्यमंत्री सुक्खू जी ने तो इन फैसलों को ‘जनहित में ऐतिहासिक’ बताया है। उनका कहना है कि यह मुआवजा पीड़ितों के पुनर्वास में मददगार होगा और MBBS सीटों से युवाओं को नई दिशा मिलेगी। पर विपक्ष? वो तो हर चीज में राजनीति ढूंढ ही लेता है। उनका कहना है कि यह सब चुनावी रणनीति का हिस्सा है। आम जनता की राय? कुछ लोग खुश हैं, तो कुछ का मानना है कि मुआवजा अभी भी कम है। सच तो यह है कि हर फैसले पर मतभेद होते हैं, है न?
अब आगे क्या?
सरकार का कहना है कि मुआवजे का वितरण जल्द शुरू होगा। इसके लिए एक विशेष टास्क फोर्स भी बनाई जा सकती है। MBBS सीटों को लेकर भी प्रक्रिया तेज की जाएगी ताकि नए एकेडमिक सेशन से ही स्टूडेंट्स को फायदा मिल सके। पर याद रखिए, अभी विधानसभा में गर्मा-गर्म बहस होनी बाकी है। विपक्ष तो अपना काम करेगा ही!
एक बात तो साफ है – सरकार ने आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी है। पर असली सवाल यह है कि क्या यह योजनाएं कागजों से निकलकर जमीन पर दिखेंगी? क्योंकि हम सभी जानते हैं कि घोषणाएं तो बहुत होती हैं, पर क्रियान्वयन हमेशा पीछे रह जाता है। तो चलिए, अब इंतजार करते हैं – देखते हैं यह कहानी कैसे आगे बढ़ती है।
सुक्खू कैबिनेट के बड़े फैसले: जानिए क्या मिलेगा आम आदमी को?
1. आपदा में घर गिरने पर 7 लाख मुआवजा – पर कैसे?
अरे भई, सुक्खू कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया है। अगर किसी का घर प्राकृतिक आपदा (natural disaster) में धराशायी हो जाए, तो अब 7 लाख रुपये तक का मुआवजा मिलेगा। लेकिन सवाल यह है कि यह पैसा आपके हाथ तक पहुंचेगा कैसे? देखिए, आपको अपने इलाके के प्रशासन (local administration) के चक्कर काटने होंगे। और हाँ, कागजी कार्रवाई तो करनी ही पड़ेगी – जैसा कि हमारे यहाँ हमेशा से होता आया है!
2. MBBS सीटें बढ़ीं – पर क्या यह काफी है?
अच्छी खबर यह है कि MBBS सीटों (seats) में इजाफा हो रहा है। 200 से ज्यादा नई सीटें! सुनने में तो बढ़िया लगता है, है ना? लेकिन असलियत यह है कि हर साल लाखों बच्चे NEET देते हैं। तो सवाल यह उठता है – क्या यह बढ़ोतरी वाकई पर्याप्त है? हालांकि, जो मिल रहा है, उसके लिए तो धन्यवाद देना ही चाहिए।
3. मुआवजा लेना है? तो ये दस्तावेज रखें तैयार
अब अगर आपको यह मुआवजा चाहिए, तो कान खोलकर सुन लीजिए। आधार कार्ड (Aadhaar Card) तो चाहिए ही – भला आजकल कौन सा काम बिना आधार के होता है? उसके साथ घर के कागजात (ownership proof) और सबसे जरूरी – आपदा की आधिकारिक रिपोर्ट (disaster report)। और हाँ, थोड़ा सब्र भी रखना पड़ेगा, क्योंकि बाबू लोग तो जांच-पड़ताल करेंगे ही न!
4. नई MBBS सीटें – कहाँ और किसके लिए?
अब ये नई सीटें आएंगी कहाँ? ज्यादातर सरकारी मेडिकल कॉलेजों (government medical colleges) में, खासकर उन इलाकों में जहाँ डॉक्टरों की कमी है। एक तरफ तो यह अच्छी बात है कि ग्रामीण क्षेत्रों (rural areas) के बच्चों को मौका मिलेगा। पर दूसरी तरफ, क्या इतनी सीटें ही काफी हैं? शायद नहीं। लेकिन शुरुआत तो हुई न!
Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com