सुप्रीम कोर्ट आज फिर सुनवाई करेगा: इलाहाबाद HC जज का केस – क्या होगा अगला मोड़?
देखिए न, सुप्रीम कोर्ट आज एक बार फिर उसी विवादित मामले में सुनवाई करने वाला है – वही जो इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज को आपराधिक केस से बचाने वाला ऑर्डर था। याद है न पिछली बार का वो ऑर्डर? जिसने पूरे कानूनी जगत को हिलाकर रख दिया था। अब सवाल यह है कि आज कोर्ट क्या रुख अपनाएगा? सच कहूं तो, ये केस सिर्फ एक जज की बात नहीं रह गया है – ये तो अब न्यायपालिका की स्वतंत्रता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन चुका है।
पूरा माजरा क्या है?
बात यूं है कि इलाहाबाद HC के एक जज पर कुछ गंभीर आरोप लगे थे। अब जज साहब का कहना है कि ये सब राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। पिछली बार कोर्ट ने उन्हें राहत दे दी थी – एक तरह से केस पर रोक लगा दी। लेकिन यहां दिलचस्प बात ये है कि इस फैसले ने कानूनी विशेषज्ञों को दो खेमों में बांट दिया। एक तरफ वो जो कहते हैं “जज भी तो आखिर इंसान हैं”, तो दूसरी तरफ वो जो पूछते हैं “क्या जज होने का मतलब immunity card मिल जाता है?”
आज क्या-क्या हो सकता है?
आज की सुनवाई में तीन बड़ी बातें देखने को मिल सकती हैं। पहला – कोर्ट अपने पिछले ऑर्डर पर और स्पष्टता दे सकता है। दूसरा – केंद्र और UP सरकार ने तो पहले ही अपनी आपत्तियां दर्ज कर दी हैं। और तीसरा – Bar Council जैसे बड़े संगठन भी अब इस मामले में कूद पड़े हैं। मतलब साफ है – ये केस अब साधारण केस नहीं रहा, बल्कि एक टेस्ट केस बन चुका है।
लोग क्या कह रहे हैं?
सोशल मीडिया से लेकर कोर्टरूम तक – हर जगह इसी की चर्चा है। कुछ लोग चिल्ला रहे हैं “न्यायपालिका की स्वतंत्रता खतरे में!”, तो कुछ का कहना है कि “कानून सबके लिए एक समान होना चाहिए।” राजनीतिक दल? वो तो मौके की ताक में हैं – किसी को न्यायपालिका vs सरकार का नज़ारा दिख रहा है तो कोई इसे संवैधानिक संकट बता रहा है। असल में, हर कोई अपनी-अपनी रोटी सेक रहा है।
आगे क्या?
ईमानदारी से कहूं तो, आज का दिन बेहद अहम हो सकता है। अगर कोर्ट अपना स्टैंड कायम रखता है – तो ये एक प्रीसेडेंट बन जाएगा। और अगर ऑर्डर बदलता है? फिर तो जज साहब के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। पर एक बात तय है – इस फैसले का असर सिर्फ आज तक सीमित नहीं रहेगा। ये तो आने वाले सालों में न्यायपालिका और सरकार के रिश्तों को भी प्रभावित करेगा।
संक्षेप में कहें तो… ये केस अब सिर्फ एक जज की नहीं, बल्कि पूरी न्याय प्रणाली की परीक्षा बन चुका है। और आज का दिन? वो तो शायद इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाए। देखते हैं क्या होता है!
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आज सुप्रीम कोर्ट में क्या चल रहा है?
देखिए, आज का केस कोई आम मामला नहीं है। इलाहाबाद HC के एक जज को लेकर बवाल मचा हुआ है – criminal case दर्ज होना चाहिए या नहीं, यही सवाल है। और सुप्रीम कोर्ट आज इसी पर सुनवाई कर रहा है। सच कहूं तो, ये केस पिछले कुछ दिनों से काफी हॉट टॉपिक बना हुआ है।
असल मुद्दा क्या है? समझिए सरल भाषा में
बात ये है कि… क्या किसी जज के खिलाफ criminal case चलाया जा सकता है? एक तरफ तो न्यायपालिका की स्वतंत्रता का सवाल है, दूसरी तरफ कानून का राज। ईमानदारी से कहूं तो, ये कोई black-and-white मामला नहीं है। सुप्रीम कोर्ट को बड़ी सूझ-बूझ से फैसला लेना होगा।
क्या जजों की आजादी (judicial independence) खतरे में है?
यही तो बड़ा सवाल है! अगर कोर्ट जज के खिलाफ केस चलाने की इजाजत दे दे, तो…? एक तरह से ये judicial independence के लिए टर्निंग पॉइंट हो सकता है। पर सच तो ये है कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। क्या पता, ये फैसला भविष्य में न्यायपालिका को और मजबूत ही बनाए?
फैसला कब तक? क्या है एक्सपर्ट्स की राय
अभी तो सुनवाई चल रही है, तो ठीक-ठीक कुछ कहना मुश्किल। लेकिन मेरे कुछ legal दोस्तों का कहना है कि ये केस जल्द निपटने वाला नहीं। हो सकता है आज कुछ interim ऑर्डर आ जाए, लेकिन फाइनल फैसले के लिए थोड़ा इंतज़ार करना पड़े। वैसे भी, ऐसे संवेदनशील मामलों में कोर्ट को सोच-समझकर ही कदम उठाना चाहिए। है न?
क्या आपको लगता है जजों के खिलाफ criminal cases चलाने चाहिए? कमेंट में बताइए अपनी राय!
Source: NDTV Khabar – Latest | Secondary News Source: Pulsivic.com

