सुप्रीम कोर्ट का तमिलनाडु सरकार को झटका: सेंथिल बालाजी केस में ट्रायल के लिए क्रिकेट स्टेडियम जितनी जगह चाहिए!

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को दी ऐसी झटका, सेंथिल बालाजी केस में क्या हुआ?

अरे भई, सुप्रीम कोर्ट ने तो तमिलनाडु सरकार को सेंथिल बालाजी केस में जमकर लताड़ लगाई है! और साथ ही एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसकी मिसाल शायद ही कहीं मिले। सुनिए – कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि इस high-profile case की सुनवाई के लिए एक क्रिकेट स्टेडियम जितनी बड़ी जगह का इंतजाम करे। सच में! अब आप सोच रहे होंगे कि इतनी बड़ी जगह की क्या जरूरत? दरअसल, मामला है ही इतना गर्म – इसमें एक पूर्व मंत्री और कई बड़े-बड़े अमीर आरोपी शामिल हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने तो सीधे सरकारी वकीलों पर सवाल उठा दिए, कहा कि “निष्पक्ष न्याय हो पाएगा या नहीं, इस पर शक है”। बस, यही बात इस पूरे मामले को और भी सेंसिटिव बना देती है।

पूरा माजरा क्या है?

सेंथिल बालाजी, जो तमिलनाडु सरकार में मंत्री रह चुके हैं, उन पर भ्रष्टाचार और घूसखोरी के ऐसे-ऐसे आरोप लगे हैं कि सुनकर ही दिमाग चकरा जाए। पर यहाँ दिक्कत ये है कि ये मामला तो सालों से अटका पड़ा है – और क्यों? क्योंकि आरोपियों का राजनीतिक प्रभाव इतना ज्यादा है कि सुनवाई में बार-बार रोड़े अटकाए जाते रहे। पिछली कुछ सुनवाइयों में तो सरकारी वकीलों के रवैये पर भी सवाल उठे थे। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को खुद ही इस मामले में दखल देना पड़ा। और सच कहूँ तो, ये मामला इतना जटिल है कि normal courtrooms में इसकी सुनवाई करना तो मानो न्याय की भावना के साथ खिलवाड़ होगा।

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

अब यहाँ सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा, वो सच में कमाल का है। पहली बात तो ये कि सुनवाई के लिए इतनी बड़ी जगह चाहिए कि जैसे कोई क्रिकेट स्टेडियम हो। सोचिए! ये आदेश पूरी तरह पारदर्शिता के लिए दिया गया है। जस्टिस सूर्यकांत ने तो साफ-साफ कह दिया – “जब मामले में मंत्री और अमीर लोग शामिल हों, तो सरकारी वकीलों पर दबाव बनना लाज़मी है।” और फिर कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को साफ शब्दों में कह दिया कि जल्द से जल्द सारे इंतजाम करके इस मामले को आगे बढ़ाओ। एक तरह से देखें तो ये सरकार के लिए बड़ी चुनौती है।

लोग क्या कह रहे हैं?

इस फैसले पर तो हर तरफ अलग-अलग राय सुनने को मिल रही है। विपक्षी दल तो मानो खुशी से झूम उठे – उनका कहना है कि ये न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता की बड़ी जीत है। वहीं तमिलनाडु सरकार की तरफ से अभी तक कोई ऑफिशियल बयान नहीं आया है… हालांकि अंदरूनी सूत्र कह रहे हैं कि सरकार कोर्ट के आदेश मानने को तैयार है। सोशल एक्टिविस्ट्स और भ्रष्टाचार विरोधी संगठनों ने इस फैसले की जमकर तारीफ की है। कई एक्सपर्ट्स तो ये भी कह रहे हैं कि आने वाले समय में ऐसे high-profile केसों के लिए ये एक मिसाल बनेगा।

अब आगे क्या?

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि तमिलनाडु सरकार कोर्ट के इन निर्देशों को कैसे और कितनी जल्दी लागू कर पाती है। अगली सुनवाई जल्द ही होनी है, जहाँ आरोपियों के खिलाफ सबूतों की बारीकी से जाँच होगी। और हाँ, अगर सरकार कोर्ट के आदेशों को लेकर लापरवाही दिखाती है, तो सुप्रीम कोर्ट और भी सख्त हो सकता है। कानून जानकार तो ये भी कह रहे हैं कि ये मामला भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।

अंत में इतना ही कहूँगा कि सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला न सिर्फ सेंथिल बालाजी केस में इंसाफ दिलाएगा, बल्कि पूरी न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब देखना ये है कि तमिलनाडु सरकार इस पर कैसे अमल करती है। सच कहूँ तो, सबकी नज़रें अब उन पर ही टिकी हैं!

यह भी पढ़ें:

सेंथिल बालाजी केस और सुप्रीम कोर्ट का फैसला – जानिए पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को क्यों लगाई फटकार?

देखिए, मामला कुछ ऐसा है – तमिलनाडु सरकार ने सेंथिल बालाजी केस की सुनवाई के लिए क्रिकेट स्टेडियम जितनी जगह माँगी! सुप्रीम कोर्ट को यह बात हजम नहीं हुई। और सच कहूँ तो, हमें भी नहीं हुई। कोर्ट ने साफ कहा कि यह माँग न सिर्फ unreasonable है, बल्कि पूरी तरह impractical भी। अब सोचिए, इतनी बड़ी जगह का इंतजाम करने में कितना वक्त लगेगा? केस तो और भी पीछे चला जाएगा!

सेंथिल बालाजी केस – क्या है पूरा गोरखधंधा?

असल में यह कोई आम केस नहीं है। एक high-profile corruption case है जिसमें तमिलनाडु के पूर्व मंत्री समेत कई बड़े officials फँसे हुए हैं। corruption और money laundering के आरोप… और केस चल रहा है सालों से! ईमानदारी से कहूँ तो, आम जनता का इस पर से भरोसा उठने लगा था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने कुछ ऐसे important directions दी हैं जो game changer साबित हो सकती हैं।

कोर्ट ने trial को लेकर क्या निर्देश दिए? समझिए आसान भाषा में

सुप्रीम कोर्ट की बात सुनकर तो लगता है कि उन्होंने सरकार को थोड़ा सा ‘समझदारी का पाठ’ पढ़ाया है। कोर्ट का कहना है – “भई, जगह की माँग reasonable रखो!” Court ने साफ-साफ कहा कि practical solution निकालो, वरना केस का क्या होगा? एक तरफ तो न्याय का ढिंढोरा पीटते हो, दूसरी तरफ खुद ही रोड़े अटकाते हो। और हाँ, कोर्ट ने यह भी clear कर दिया कि अब और delays बर्दाश्त नहीं किए जाएँगे। सीधी सी बात – ‘काम कीजिए, बहाने नहीं!’

फैसले का असर – केस पर क्या पड़ेगा असर?

अब तो लगता है केस में गति आएगी। सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह सरकार को लताड़ा है, उसके बाद तो सरकार को practical arrangements करने ही होंगे। और guidelines के मुताबिक trial शुरू करना होगा। एक अच्छी बात यह है कि अब शायद हम जल्दी ही इस केस का निष्कर्ष देख पाएँ। पर सवाल यह है कि क्या सच में न्याय मिलेगा? वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो कोर्ट ने एक सही कदम उठाया है। बाकी… देखते हैं!

Source: NDTV Khabar – Latest | Secondary News Source: Pulsivic.com

More From Author

ARM अपने खुद के चिप्स डिज़ाइन करने की दिशा में काम कर रहा है, CEO ने क्या कहा?

UK सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बैंकों पर कार फाइनेंस का झटका कम होने की उम्मीद

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Comments