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“व्यापारियों को बड़ी राहत! 15 हजार करोड़ के टैक्स विवाद से मिलेगी मुक्ति”

व्यापारियों को मिलने वाली है बड़ी छुट्टी! 15 हज़ार करोड़ के टैक्स झंझट से छुटकारा

अरे भई, अच्छी खबर सुनने को मिल रही है! सरकार जल्द ही एक बड़ा ऐलान करने वाली है जिससे लाखों व्यापारियों की जिंदगी आसान हो जाएगी। सूत्रों की मानें तो, एक नई “Tax Litigation Scheme” आने वाली है जो GST से पहले के सारे पुराने टैक्स के झगड़ों को हमेशा के लिए खत्म कर देगी। सोचो, 3.5 लाख से ज्यादा व्यापारी और कंपनियाँ जो सालों से 15 हज़ार करोड़ के टैक्स विवादों में फंसी थीं, अब आज़ाद हो जाएंगी! कैबिनेट ने हरी झंडी दिखा दी है, बस अब आधिकारिक घोषणा का इंतज़ार है।

पर ये सारा माजरा क्या है?

देखिए न, 2017 में GST आने से पहले तक हमारे देश की टैक्स व्यवस्था क्या-क्या नहीं थी! केंद्र और राज्यों के अलग-अलग कानून, फिर सेवा कर, Excise Duty, VAT… इतने सारे टैक्स कि पता ही नहीं चलता था किसका कहाँ भुगतान करें। नतीजा? हजारों केस अदालतों में लटके पड़े हैं। और सच कहूँ तो, ये सिर्फ व्यापारियों का ही नुकसान नहीं कर रहे, सरकारी संसाधन भी इनमें फँसे हुए हैं।

हाँ, सरकार ने पहले भी Sabka Vishwas और Vivad se Vishwas जैसी स्कीम्स लाई थीं। लेकिन ये नई योजना… वाह! ये तो पूरे गेम को ही बदल देगी। एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि इससे Ease of Doing Business में क्रांति आ जाएगी। सचमुच!

तो क्या है इस योजना में खास?

अब जरा इसके मसालेदार पॉइंट्स पर नजर डालते हैं:

पहली बात तो ये कि GST से पहले के सारे टैक्स विवाद इसके दायरे में आएंगे। दूसरा, छोटे से लेकर बड़े तक सभी 3.5 लाख व्यापारियों को फायदा होगा। तीसरा और सबसे ज़रूरी – 15 हज़ार करोड़ रुपये के इन विवादों को जल्द से जल्द निपटाने का लक्ष्य!

और हाँ, यहाँ मिठाई भी है! सुनने में आ रहा है कि अगर व्यापारी विवादित रकम का एक हिस्सा ही चुका दें, तो बाकी माफ हो जाएगी। खासकर छोटे दुकानदारों के लिए तो ये किसी वरदान से कम नहीं।

बाज़ार में क्या है रिएक्शन?

अरे भाई, खुशी का तूफान आ गया है! FICCI और CII जैसे बड़े संगठन तो मानो झूम ही रहे हैं। FICCI के एक बड़े अधिकारी ने तो यहाँ तक कह दिया – “ये तो गेम-चेंजर साबित होगा। विदेशी निवेशकों को भी भारत और ज्यादा आकर्षक लगेगा।”

छोटे व्यापारियों की बात करें तो दिल्ली के राजेश गुप्ता जैसे कारोबारी तो राहत की सांस ले रहे हैं। उनका कहना है – “हाँ, देर से मिली है ये खबर, पर अब कोर्ट-कचहरी के चक्करों से छुट्टी मिलेगी।” हालाँकि कुछ लोगों को लगता है कि सरकार को और ज्यादा रियायतें देनी चाहिए थीं।

आगे क्या होगा?

अब तो बस सरकार के गाइडलाइन्स जारी करने का इंतज़ार है। एक्सपर्ट्स की मानें तो ये स्कीम न सिर्फ बिजनेस करने को आसान बनाएगी, बल्कि पूरी इकोनॉमी को ही गति दे देगी। सोचिए, जब व्यापारी कानूनी झंझटों से मुक्त हो जाएंगे, तो उनका ध्यान बिजनेस बढ़ाने पर होगा।

और एक बड़ा फायदा ये भी है कि कोर्ट्स पर से केसों का बोझ कम होगा। हजारों मामले तो बाहर ही सुलझ जाएंगे! सच कहूँ तो, ये तो विन-विन सिचुएशन है – सरकार, व्यापारी और न्यायपालिका, सभी के लिए फायदे का सौदा।

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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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