tcs 12000 employees job saved due to government rule 20250731090714451930

“TCS के 12,000 कर्मचारियों की नौकरी बच सकती है? सरकार के नए नियम ने छंटनी पर लगाई रोक!”

TCS के 12,000 कर्मचारियों की नौकरी बच सकती है? सरकार ने छंटनी पर लगाई रोक!

अरे भई, ये TCS वाली खबर ने तो पूरे IT सेक्टर को हिला कर रख दिया था! Tata Consultancy Services (TCS) ने जब 12,000 से ज्यादा कर्मचारियों को निकालने का ऐलान किया, तो लगा जैसे पूरे बंगलुरू में भूकंप आ गया हो। सच कहूं तो, मैं भी पहले दिन ये खबर पढ़कर चौंक गया था – इतनी बड़ी संख्या? लेकिन अब लगता है कि कर्नाटक सरकार के नए नियमों और कर्मचारी यूनियनों के दबाव ने गेम बदल दिया है। और सुनो, मामला तो और दिलचस्प हो गया जब कानूनी लड़ाई शुरू हो गई!

पूरा माजरा क्या है? TCS की छंटनी योजना पर सवाल

देखिए, TCS ने तो कहा कि ये सब “performance-based appraisal” के तहत हो रहा है। पर सच्चाई क्या है? असल में कर्नाटक के श्रम कानून कहते हैं कि बड़े पैमाने पर छंटनी (mass layoffs) से पहले सरकारी मंजूरी लेना जरूरी होता है। और हैरानी की बात – TCS ने ये मंजूरी ली ही नहीं! ऐसे में कर्मचारी संघों का गुस्सा तो समझ आता है। उन्होंने तुरंत कोर्ट का रुख किया। सच कहूं तो, कंपनियां अक्सर ये भूल जाती हैं कि कानून सबके लिए बना है।

ताजा अपडेट: सरकार ने कसा शिकंजा!

अब क्या हुआ? सीन बदल गया है दोस्तों! कर्नाटक सरकार ने TCS को झटका देते हुए official notice भेजकर छंटनी पर रोक लगा दी। और तो और, Labour Department में complaint दर्ज हो चुकी है। मजे की बात ये कि अब TCS भी पीछे हटती नजर आ रही है। सुनने में आ रहा है कि वो “voluntary retirement scheme” जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है। पर सवाल ये है कि क्या ये सच में समाधान होगा? या सिर्फ टाइम पास?

किसने क्या कहा? सबके अपने-अपने तर्क

इस पूरे विवाद में सबकी अपनी-अपनी बातें हैं। कर्मचारी संघ वाले तो बिल्कुल साफ कह रहे हैं – “TCS ने कानून तोड़ा है!” वहीं कंपनी का कहना है कि वो performance के आधार पर ही फैसले लेते हैं। पर सबसे जबरदस्त बयान तो कर्नाटक श्रम मंत्रालय का आया – उन्होंने साफ कह दिया कि बिना approval के छंटनी गैरकानूनी है। और हां, IT एक्सपर्ट्स की राय? ये केस तो पूरे सेक्टर के लिए वेक-अप कॉल बन सकता है!

आगे क्या? सिर्फ TCS नहीं, पूरे सेक्टर पर असर

अब सोचने वाली बात ये है कि आगे क्या होगा? कोर्ट का फैसला सिर्फ TCS के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे Indian IT sector के लिए important precedent सेट कर सकता है। अगर छंटनी रद्द होती है – जो कि होनी भी चाहिए – तो TCS को employees के साथ किसी समझौते पर पहुंचना होगा। और लगता है सरकार अब इस तरह के मामलों पर और सख्त हो जाएगी। कर्मचारी यूनियनें भी अब ज्यादा सक्रिय हो सकती हैं।

आखिर में एक बात तो साफ है – ये मामला सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं रहने वाला। ये तो companies और employees के बीच नए रिश्ते की शुरुआत हो सकती है। जहां कानून का पालन और कर्मचारियों के अधिकार दोनों को बराबर का महत्व मिले। क्या आपको नहीं लगता कि ये पूरा विवाद हमारे देश के corporate culture को नए सिरे से परिभाषित कर देगा?

सरकार के नए नियमों ने TCS के 12,000 कर्मचारियों की नौकरी बचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। सच कहूं तो, यह खबर सुनकर मन में एक सवाल उठता है – क्या यह सिर्फ TCS तक सीमित रहेगा या पूरे IT सेक्टर के लिए एक नई मिसाल बनेगा? देखा जाए तो यह फैसला कर्मचारियों के लिए तो राहत भरा है ही, लेकिन असल बात यह है कि यह IT इंडस्ट्री में एक स्थिरता का संकेत भी देता है।

अब सवाल यह है कि TCS इन नियमों को कैसे लागू करेगा? क्योंकि नियम बनाना एक बात है और उन्हें सही तरीके से लागू करना दूसरी। मेरा मानना है कि कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखना कंपनी की जिम्मेदारी है, बिल्कुल वैसे ही जैसे एक अच्छा मालिक अपने घर की देखभाल करता है।

और सबसे दिलचस्प बात? इस बदलाव से उम्मीद बंधी है कि अन्य कंपनियां भी अब छंटनी के बजाय कर्मचारी-केंद्रित नीतियों की तरफ रुख करेंगी। पर क्या यह सच में हो पाएगा? वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो यह एक सकारात्मक कदम है – बस देखना यह है कि यह कितना असरदार साबित होता है।

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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