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“TDP का बड़ा ऐलान: SIR में बदलाव की मांग से BJP के सामने नया सिरदर्द!”

TDP का ऐलान: SIR में बदलाव की मांग ने BJP को दिया नया सिरदर्द!

अरे भाई, आंध्र प्रदेश की राजनीति में फिर से हलचल शुरू हो गई है। TDP यानी तेलुगू देशम पार्टी ने SSR (Special Summary Revision) को लेकर एक बड़ा बयान देकर सबको चौंका दिया है। सोचिए, ये SSR है क्या? दरअसल, ये वो प्रक्रिया है जिसमें मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है। लेकिन TDP की मांग है कि इसे चुनाव से छह महीने पहले न किया जाए और इसे Citizenship Verification से अलग रखा जाए। मजे की बात ये कि TDP तो NDA का हिस्सा है – यानी BJP के लिए ये सिरदर्द बन सकता है। बिहार में पहले से ही मतदाता सूची को लेकर बवाल चल रहा है, अब आंध्र में ये नया मुद्दा। क्या ये 2024 के चुनावों से पहले की राजनीतिक चाल है? सोचने वाली बात है!

SSR पर विवाद: असली मुद्दा क्या है?

असल में देखा जाए तो SSR एक रूटीन प्रक्रिया है। नए वोटर जुड़ते हैं, गलत एंट्रीज हटती हैं – सब सही। पर TDP को क्या दिक्कत है? उनका कहना है कि इस प्रक्रिया को गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। कैसे? Citizenship Verification के नाम पर! यानी कुछ लोगों के वोटिंग राइट्स पर सवाल उठ सकते हैं। और भई, बिहार में तो ये मुद्दा पहले से ही गरमाया हुआ है। सच कहूं तो TDP का ये कदम BJP के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है, खासकर जब 2024 के चुनाव करीब हैं। NDA में रहकर ही सहयोगी पार्टी का ऐसा बयान – राजनीति का दिलचस्प खेल है न?

TDP ने क्या मांगा? चुनाव आयोग को लिखा पत्र!

तो TDP ने बाकायदा चुनाव आयोग को पत्र लिखकर तीन बड़ी मांगें रखी हैं:
1. SSR प्रक्रिया चुनाव से छह महीने पहले पूरी हो – ताकि लोगों को आपत्ति दर्ज करने का टाइम मिले
2. इसे CAA या NRC से न जोड़ा जाए – ये बड़ा प्वाइंट है
3. पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो

देखिए, TDP के नेता साफ कह रहे हैं कि ये वोटर राइट्स का मामला है। उनका डर है कि कहीं SSR का इस्तेमाल किसी खास समुदाय को टारगेट करने के लिए न हो। और सच्चाई ये है कि आजकल के राजनीतिक माहौल में ये डर बिल्कुल बेबुनियाद भी नहीं लगता। क्या आपको नहीं लगता?

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: BJP चुप, विपक्ष का समर्थन

मजेदार बात ये है कि BJP इस पर चुप्पी साधे हुए है। हालांकि कुछ नेताओं ने प्राइवेट में कहा है कि मांगों पर विचार होगा। लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेस और YSRCP जैसे विपक्षी दल TDP के साथ खड़े हैं। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट में कोई भी बदलाव पारदर्शी होना चाहिए। राजनीतिक एजेंडे से इसका कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए। सच कहूं तो ये एक दुर्लभ मौका है जब विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन का सदस्य एक ही मुद्दे पर साथ आया है। क्या ये BJP के लिए मुश्किलें बढ़ाएगा?

आगे क्या? चुनाव आयोग का फैसला महत्वपूर्ण

अब बड़ा सवाल ये है कि चुनाव आयोग क्या करेगा? अगर TDP की मांगें मान ली गईं तो ये उनके लिए बड़ी जीत होगी। वहीं अगर BJP इन्हें नजरअंदाज करती है तो NDA में तनाव बढ़ सकता है। कुछ विश्लेषक तो ये भी कह रहे हैं कि TDP 2024 से पहले अपने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। राजनीति है भई – हर चाल अपनी जगह सही। फिलहाल तो सबकी नजरें चुनाव आयोग पर हैं। देखते हैं आगे क्या होता है!

TDP का बड़ा ऐलान और SIR में बदलाव – जानिए पूरा मामला

TDP ने SIR में बदलाव की मांग क्यों की है? असल में क्या है माजरा?

देखिए, TDP (तेलुगु देशम पार्टी) वालों को लगता है कि SIR (Special Investment Region) की मौजूदा नीतियों में कुछ खामियां हैं। और सच कहूं तो, उनकी बात में दम भी है। किसानों को उनकी ज़मीन का सही दाम नहीं मिल रहा, स्थानीय लोगों को रोज़गार के मौके कम मिल रहे हैं… तो फिर सवाल यही उठता है कि ये ‘विकास’ हो किसके लिए? TDP का तर्क साफ है – नीतियों में बदलाव करके आम आदमी को फायदा पहुंचाना चाहिए।

BJP के लिए यह मामला क्यों बन गया है सरदर्द?

अब यहां मज़ा आता है! BJP (भारतीय जनता पार्टी) फंसी हुई है। एक तरफ तो TDP उनका alliance partner है… दूसरी तरफ अपनी policies पर अड़े रहना है। समझिए न, अगर TDP की बात मान ली तो अपनी credibility पर सवाल… और नहीं मानी तो गठबंधन डगमग। राजनीति का यह classic दुविधा वाला गेम है। ऐसा लगता है कि BJP इस वक्त चुप्पी साधे बैठी है – शायद समय की ताक देख रही है!

SIR में बदलाव से किसानों को क्या मिलेगा? सच्चाई या सिर्फ वादे?

अच्छा सवाल! TDP का दावा है कि नई नीतियों से किसानों को उनकी ज़मीन का सही मूल्य मिलेगा। पर सिर्फ मुआवज़ा ही नहीं… बात यह है कि स्थानीय लोगों को jobs में priority मिलनी चाहिए। वैसे भी, किसानों की आय बढ़ाने की बातें तो हर कोई करता है… असली सवाल यह है कि ये सब ground level पर कितना लागू होगा? एक तरह से देखें तो यह मांग जायज़ है, पर execution पर नज़र रखनी होगी।

क्या यह मुद्दा TDP-BJP गठबंधन को तोड़ देगा? राजनीति का नया ट्विस्ट?

ईमानदारी से कहूं तो… अभी तक तो ऐसा कुछ नहीं दिख रहा। पर राजनीति में कुछ भी हो सकता है, है न? विश्लेषकों की राय है कि दोनों पार्टियां इस मुद्दे को negotiate करके हल कर लेंगी। पर एक बात clear है – अगर BJP ने TDP की बात नहीं सुनी, तो tension बढ़ सकता है। और हां, election का समय भी तो दूर नहीं… तो समझदारी इसी में है कि बातचीत से हल निकाला जाए। वैसे भी, राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी स्थायी कहाँ होती है?

Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com

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