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“तकनीक से टूटेंगी भौगोलिक बाधाएं, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने कहा – कानूनी सहायता अब घर तक”

तकनीक से टूटेंगी भौगोलिक बाधाएं? जस्टिस सूर्यकांत का बड़ा बयान – अब न्याय आपके दरवाज़े तक!

अरे भाई, भारत की न्याय व्यवस्था में कुछ दिलचस्प होने वाला है! सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने तो जैसे बम फोड़ दिया है। उनका कहना है कि अब तकनीक की मदद से वो सारी दूरियाँ मिट जाएंगी जो आम आदमी और न्याय के बीच खड़ी हैं। सोचिए, अब कानूनी मदद आपके घर बैठे मिल सकेगी। क्या बात है न? लेकिन सवाल यह है कि यह सब कैसे काम करेगा?

देखिए, हम सभी जानते हैं कि भारत में कानूनी प्रक्रियाएँ… ईमानदारी से कहूँ तो थोड़ी (बल्कि बहुत) जटिल हैं। खासकर गाँवों और छोटे शहरों में तो यह और भी मुश्किल हो जाता है। कोर्ट की दूरी, लंबी-चौड़ी प्रक्रियाएँ, और वो सारे कागज़ी कार्यवाही… अरे भगवान! मगर अब सुप्रीम कोर्ट और सरकार ने तकनीक को हथियार बनाया है। e-Courts, video conferencing – ये सब तो अब नए नहीं हैं, लेकिन जस्टिस सूर्यकांत की बातों से लगता है कि अब गेम बदलने वाला है।

एक कार्यक्रम में जस्टिस साहब ने Digital India की तारीफ़ करते हुए कुछ दिलचस्प बातें कहीं। उन्होंने तो AI और Blockchain जैसी चीज़ों का भी ज़िक्र किया! अब ये सब कानून के चक्कर में कैसे काम आएंगे, यह तो समय ही बताएगा। पर एक अच्छी खबर यह है कि सुप्रीम कोर्ट का e-Seva पोर्टल तो शुरू हो ही चुका है। अब आप चाय पीते-पीते अपने केस का अपडेट चेक कर सकते हैं। क्या यह पहले होना चाहिए था? शायद हाँ। लेकिन देर आयद दुरुस्त आयद!

अब सवाल यह है कि हर कोई इसका फायदा उठा पाएगा? विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिस्टम पारदर्शिता लाएगा और केसों का बोझ कम करेगा। लेकिन गाँवों में तो अभी भी internet की स्थिति… खैर, आप समझ ही गए होंगे। कुछ नेताओं ने सही सवाल उठाया है – क्या सरकार वास्तव में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रही है? या फिर यह सब सिर्फ दिखावा है?

आगे की योजनाएँ? Digital Courtroom का विस्तार, virtual hearings को और आसान बनाना… बातें तो अच्छी हैं। अगर सब कुछ ठीक से लागू हुआ, तो सच में भारत की न्याय व्यवस्था दुनिया के लिए मिसाल बन सकती है। पर याद रखिए, तकनीक तो सिर्फ एक टूल है। असली चुनौती है इसे सही तरीके से इस्तेमाल करने की। तो क्या आपको लगता है कि यह सिस्टम वाकई काम करेगा? कमेंट में बताइएगा ज़रूर!

आजकल तकनीक हर चीज़ को बदल रही है, और जस्टिस सूर्यकांत का यह विजन भी क्या कमाल का है! सोचिए, अब Digital तरीकों से कानूनी मदद उन इलाकों तक पहुँच रही है जहाँ पहले कुछ नहीं था। यानी अब दूर-दराज के गाँवों में बैठा कोई भी व्यक्ति बिना किसी रुकावट के न्याय पा सकता है। क्या यह क्रांतिकारी नहीं है?

लेकिन सिर्फ यही नहीं। देखा जाए तो यह सिस्टम को और भी पारदर्शी बना रहा है। मतलब, अब आम आदमी के लिए कानूनी प्रक्रियाएँ वैसी ही सरल हो रही हैं जैसे किसी shopping app पर ऑर्डर देना। हालाँकि, अभी बहुत कुछ करना बाकी है।

और तो और, technology और innovation के साथ तो यह सिलसिला और भी तेज़ होने वाला है। कल्पना कीजिए, आने वाले समय में क्या-क्या हो सकता है! लेकिन यह सब तभी सार्थक होगा जब हर किसी तक इसकी पहुँच हो। वरना, सिर्फ बातों का खेल रह जाएगा। सच कहूँ तो…

Source: Hindustan Times – India News | Secondary News Source: Pulsivic.com

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