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“तेजस्वी यादव का बड़ा दावा: वोटर लिस्ट से नाम हटा तो राशन-पेंशन भी बंद? SIR पर भड़काऊ बयान!”

तेजस्वी यादव का बड़ा दावा: वोटर लिस्ट से नाम हटा तो राशन-पेंशन भी बंद? SIR पर भड़काऊ बयान!

बिहार की राजनीति में फिर से एक नया तूफान आ गया है। और इस बार तेजस्वी यादव ने ऐसा बयान दिया है जिसने सियासी गलियारों को हिलाकर रख दिया। सच कहूं तो, ये आरोप कोई मामूली नहीं – कि सरकार जानबूझकर गरीबों और विपक्षी समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से हटवा रही है। लेकिन यहीं खत्म नहीं होता मामला। तेजस्वी का दावा है कि ऐसे लोगों का राशन-पेंशन तक बंद कर दिया जाता है! अब सवाल यह है कि क्या यह सच में हो रहा है या फिर ये सिर्फ चुनावी रणनीति का हिस्सा है?

मामले की पृष्ठभूमि: पुराना विवाद, नया रूप

देखिए, बिहार में वोटर लिस्ट को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं। पिछले कुछ सालों में तो ये मामला बार-बार उठता रहा है। विपक्ष का आरोप है कि गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यकों को टारगेट किया जा रहा है। और अब जब चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट की समीक्षा शुरू की है, तो ये मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। सच तो ये है कि अगले चुनाव नजदीक हैं, तो ये विवाद और भी गरमा सकता है। क्या आपको नहीं लगता?

तेजस्वी का भड़काऊ बयान: “SIR लोगों के अधिकार छीन रही है”

तेजस्वी यादव ने तो जैसे बम फोड़ दिया है! उनका कहना है कि SIR (सरकार) लोगों के वोटर आईडी हटाकर उनके मौलिक अधिकारों पर हमला कर रही है। उनका ये बयान सुनकर तो लगता है जैसे कोई बड़ा खेल चल रहा हो। “ये कोई संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश है,” ये उनके शब्द हैं। और हां, उन्होंने लोगों को सलाह भी दी कि वो अपना नाम वोटर लिस्ट में जरूर चेक करें। अगर नाम नहीं मिले तो? तुरंत एक्शन लें!

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: गरमा गया माहौल

अब देखिए न, इस पर राजनीतिक दलों की क्या प्रतिक्रिया आई है। RJD तो इसे लोकतंत्र पर हमला बता रही है। उनका कहना है कि गरीबों को उनके बुनियादी अधिकार से वंचित किया जा रहा है। वहीं भाजपा की तरफ से जवाब आया है – “ये सब बेबुनियाद आरोप हैं।” भाजपा नेता का कहना है कि चुनाव आयोग पूरी पारदर्शिता से काम कर रहा है। सच कहूं तो, दोनों तरफ के बयान सुनकर आम आदमी कंफ्यूज हो जाएगा। आपको क्या लगता है?

जनता की आवाज: क्या कह रहे हैं आम नागरिक?

ग्राउंड लेवल पर क्या हो रहा है? असल में यहां कहानी दोहरी है। कुछ लोगों का कहना है कि उनके नाम वोटर लिस्ट से गायब हैं। पटना के रमेश कुमार जैसे लोगों की शिकायत है कि उनके पड़ोस में कई परिवारों के नाम गायब हैं, जबकि वे दशकों से यहीं रह रहे हैं। पर दूसरी तरफ कुछ लोग ये भी मानते हैं कि ये सिर्फ चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा है। किसकी बात सही है? शायद वक्त ही बताएगा।

आगे की राह: क्या होगा अगला कदम?

अब सवाल ये उठता है कि आगे क्या? राजनीतिक जानकारों की मानें तो विपक्ष इस मुद्दे को और उछालेगा। हो सकता है RJD और दूसरे दल प्रदर्शन करें। चुनाव आयोग पर दबाव बढ़ रहा है कि वो पूरी जांच करे। और अगर आरोप सही साबित हुए तो? तब तो ये मामला कोर्ट तक पहुंच सकता है। एक बात तो तय है – अगले चुनावों में ये मुद्दा बड़ा रोल अदा करेगा। क्या आपको नहीं लगता?

निष्कर्ष: लोकतंत्र बनाम राजनीति का नया मोर्चा

देखा जाए तो ये मामला सिर्फ वोटर लिस्ट तक सीमित नहीं है। यहां सवाल लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों का है। एक तरफ मतदान का अधिकार, तो दूसरी तरफ राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप। सच तो ये है कि जनता और नेताओं की नजरें अब चुनाव आयोग पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में ये देखना दिलचस्प होगा कि ये मामला किस रुख पर जाता है। और हां, बिहार की राजनीति पर इसका क्या असर पड़ता है – ये तो वक्त ही बताएगा। क्या आप तैयार हैं इस नए सियासी ड्रामा के लिए?

तेजस्वी यादव का बयान: वोटर लिस्ट से नाम हटा तो राशन-पेंशन भी गया? सच्चाई जानिए

क्या सच में वोटर लिस्ट से नाम हटने का मतलब है राशन कार्ड भी कैंसिल?

देखिए, तेजस्वी यादव ने एक बड़ा दावा किया है – कि अगर किसी voter का नाम लिस्ट से हटा दिया जाए, तो उसका राशन और पेंशन भी साथ में बंद हो जाता है। अब सवाल यह है कि क्या यह सच है या फिर सियासी दावे का हिस्सा? असल में, उन्होंने इसे SIR (Systematic Voters’ Education and Electoral Participation) प्रोग्राम से जोड़कर पेश किया, जो थोड़ा अजीब लगता है।

सच क्या है? क्या ऐसा कोई नियम है?

ईमानदारी से कहूं तो नहीं। अभी तक तो मैंने ऐसा कोई official rule नहीं देखा जो वोटर लिस्ट और राशन कार्ड को आपस में जोड़ता हो। यह ऐसा ही है जैसे कोई कहे कि अगर आपका Aadhaar कार्ड खो जाए तो आपका बैंक अकाउंट भी फ्रीज हो जाएगा – बिल्कुल बेबुनियाद। हालांकि, सरकार की तरफ से अभी तक कोई क्लियर जवाब नहीं आया है, जो थोड़ा हैरान करता है।

SIR क्या चीज है? और यह वोटर लिस्ट से कैसे जुड़ा?

अरे भई, SIR कोई नया सरकारी तंत्र नहीं है! यह तो Election Commission का एक पुराना प्रोग्राम है, जिसका मकसद सिर्फ इतना है कि लोगों को वोटिंग के बारे में educate किया जाए और voting percentage बढ़े। इसमें ऐसा कुछ नहीं कि यह राशन-पेंशन से कनेक्टेड है। समझ गए न? एकदम अलग चीजें हैं ये।

अगर मेरा नाम वोटर लिस्ट से गायब हो जाए तो?

तो फिर क्या करें? पहले तो घबराइए मत। आजकल तो Online ही चेक कर सकते हैं – Electoral Roll वेबसाइट पर जाकर। नाम नहीं मिला? तुरंत action लीजिए! अपने इलाके के electoral officer के पास जाइए, complaint दर्ज कराइए। वैसे भी, हर साल revision होता है न, तो ध्यान रखिएगा। एक छोटी सी शिकायत आपको बड़ी मुसीबत से बचा सकती है। सच कहूं तो!

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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