सरकार ने Telecom Testing शुल्क में 95% की कटौती कर दी – अब क्या होगा?
अरे वाह! भारत सरकार ने तो बड़ा ही दिलचस्प फैसला लिया है। Telecom उपकरणों के testing और certification के शुल्क में 95% तक की कटौती! यानी अब कंपनियों को पहले के मुकाबले नाममात्र का ही शुल्क देना होगा। सोचिए, जहां पहले लाखों रुपये खर्च होते थे, वहीं अब शायद कुछ हजार में काम चल जाएगा। Nokia, Cisco जैसी बड़ी कंपनियों से लेकर छोटे MSMEs तक – सबके चेहरे पर मुस्कान आ गई होगी।
असल में ये MTCTE प्रक्रिया (जो कि mandatory है) पहले कितनी पेंचीदा और महंगी थी, है न? उत्पाद लॉन्च करने से पहले सरकारी मानकों के हिसाब से testing करवाना जरूरी था। समय भी खूब लगता था, पैसा भी खूब जाता था। अब सरकार ने इसमें से एक बड़ी रुकावट तो हटा ही दी। लेकिन…हमेशा की तरह एक ‘लेकिन’ तो होता ही है न?
सबसे बड़ी बात तो ये है कि कुछ केसेस में तो fees लगभग न के बराबर हो गई है। एकदम जबरदस्त! पर उद्योग के कुछ लोग अभी भी चिंतित हैं। क्यों? क्योंकि testing labs में पहले से ही भीड़ है। फीस कम हो गई तो और ज्यादा applications आएंगे। तो कहीं ये सस्ता सर्टिफिकेशन देरी का कारण तो नहीं बन जाएगा? सोचने वाली बात है।
अब सवाल यह उठता है कि industry का reaction कैसा है? ज्यादातर कंपनियां तो मान रही हैं कि ये game-changing decision है। विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि इससे निवेश बढ़ेगा। पर मेरी निजी राय? सिर्फ fees कम करने से काम नहीं चलेगा। सरकार को testing labs की संख्या बढ़ानी होगी, प्रक्रियाओं को और डिजिटल बनाना होगा। वरना सस्ता तो हो गया, पर समय तो लगेगा ही न!
भविष्य की बात करें तो…अगर सब कुछ ठीक से implement हुआ तो ये निर्णय consumer तक फायदा पहुंचा सकता है। मतलब आपके मोबाइल, broadband उपकरण सस्ते हो सकते हैं। सरकार ने और reforms की भी योजना बनाई है। अगर testing में speed आ गई तो भारत वाकई में telecom manufacturing का global hub बन सकता है। बस…अगर बड़ा ‘अगर’ हट जाए तो!
तो समझिए कि सरकार ने एक अच्छी शुरुआत तो की है। पर अभी बहुत कुछ करना बाकी है। Fees कम कर देना तो बस पहला कदम है। असली चुनौती तो अब शुरू होती है – process को efficient बनाने की। वरना सस्ता तो हो गया, पर लटका तो रहेगा न!
Source: Livemint – Industry | Secondary News Source: Pulsivic.com