Elon Musk की Tesla को Autopilot हादसे में 329 मिलियन डॉलर का झटका – क्या यह सिर्फ पैसे की बात है?
अरे भाई, सुना आपने? Elon Musk की चर्चित कंपनी Tesla को अभी हाल में एक बड़ा झटका लगा है। 329 मिलियन डॉलर! यानी हमारे भारतीय रुपये में करीब 2,700 करोड़। सोचिए, इतने पैसे में तो कोई छोटा-मोटा देश चलाया जा सकता है! मजे की बात यह है कि यह जुर्माना किसी साधारण केस में नहीं, बल्कि उनके Autopilot सिस्टम से जुड़े एक घातक हादसे के लिए लगाया गया है। असल में, यह मामला तो चार साल से चल रहा था, लेकिन अब जाकर फैसला आया है। और देखिए न, यह केस इसलिए भी खास है क्योंकि Autopilot तकनीक को लेकर यह पहला बड़ा मामला है जो ट्रायल तक पहुंचा। Tesla ही नहीं, पूरे self-driving इंडस्ट्री के लोगों की नींद उड़ गई होगी इस फैसले से!
2018 का वह काला दिन – क्या सच में गलती सिर्फ ड्राइवर की थी?
याद है न 2018 का वह दुखद मामला? जब Autopilot मोड में चल रही एक Tesla कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी और ड्राइवर की जान चली गई थी। ईमानदारी से कहूं तो, मैं जब पहली बार इस खबर को पढ़ रहा था, तो मन में सवाल उठा – आखिर गलती किसकी थी? Tesla का तर्क था कि ड्राइवर ने सिस्टम का गलत इस्तेमाल किया। लेकिन अदालत ने यह बात नहीं मानी। और सच कहूं तो, मुझे भी लगता है कि जब आप ‘Autopilot’ नाम देकर कोई फीचर लॉन्च करते हैं, तो आम आदमी तो यही समझेगा न कि कार खुद चलेगी! है न? खैर, अदालत ने भी कंपनी को ही जिम्मेदार ठहराया है।
अदालत का फैसला – सिर्फ जुर्माना नहीं, एक सन्देश!
329 मिलियन डॉलर! यह सुनने में तो बस एक नंबर लगता है, लेकिन असल में यह एक बड़ा संदेश है। पहली बार किसी अदालत ने साफ कहा है कि हां, तकनीक में खामी थी और कंपनी को इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। अब सोचिए, आगे क्या होगा? मेरे ख्याल से तो यह फैसला एक domino effect पैदा कर सकता है। Tesla के खिलाफ और भी केस आ सकते हैं। और सिर्फ Tesla ही क्यों, सभी self-driving कार बनाने वाली कंपनियों को अब डर लगने लगा होगा। मजे की बात यह है कि इस फैसले ने तकनीक और कानून की दुनिया की एक दिलचस्प बहस को फिर से जिंदा कर दिया है – कि आखिर तकनीकी कंपनियों की जवाबदेही कितनी होनी चाहिए?
किसने क्या कहा – प्रतिक्रियाओं का दिलचस्प मेल
पीड़ित परिवार की बात सुनिए – “हमें न्याय मिला है।” सिर्फ चार शब्द, लेकिन कितना कुछ कह जाते हैं। वहीं Tesla का रिएक्शन भी देखने लायक है – “हम निराश हैं और अपील कर सकते हैं।” यानी मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। तकनीक के जानकार तो यहां तक कह रहे हैं कि यह फैसला भविष्य में आने वाले ऐसे सभी मामलों के लिए एक benchmark बन जाएगा। एक तरह से देखें तो यह तकनीकी दुनिया के लिए एक wake-up call है।
आगे क्या? – Tesla के सामने चुनौतियों का पहाड़
अब सवाल यह उठता है कि इस फैसले के बाद Tesla का क्या होगा? मेरे हिसाब से तो उनके सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं:
1. पहली तो यह कि और भी केस आ सकते हैं – जैसे कोई chain reaction शुरू हो गया हो।
2. दूसरी, उन्हें अपने Autopilot सिस्टम में बड़े सुधार करने होंगे। वो भी जल्दी।
3. और तीसरी सबसे बड़ी चुनौती – दुनिया भर की सरकारें अब इस तकनीक पर और सख्त नियम बना सकती हैं।
सच कहूं तो, यह सिर्फ Tesla की नहीं, पूरी self-driving टेक्नोलॉजी के भविष्य की लड़ाई है।
तो दोस्तों, अंत में बस इतना ही – यह मामला साबित करता है कि नई तकनीकों के साथ नई जिम्मेदारियां भी आती हैं। जैसे हम कहते हैं न, “जितनी बड़ी चादर हो, उतने ही पैर पसारने चाहिए।” Tesla और दूसरी कंपनियों को अब यह सीखना होगा कि innovation और responsibility दोनों एक साथ चलते हैं। वैसे देखा जाए तो यह फैसला सिर्फ एक कंपनी के लिए नहीं, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री के लिए एक सबक है। क्या पता, भविष्य में यह केस business schools में पढ़ाया जाने लगे!
Source: NY Post – Business | Secondary News Source: Pulsivic.com