टेस्ला पर ज़बरदस्त झटका: Autopilot क्रैश केस में 243 मिलियन डॉलर का झटका!
अमेरिकी अदालत ने टेस्ला को उसके Autopilot सिस्टम से जुड़ी एक दुर्घटना के लिए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। 243 मिलियन डॉलर! यानी लगभग 2,000 करोड़ रुपये का हर्जाना! सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं, है न? मामला 2019 की उस दुर्घटना का है जहां Autopilot मोड में चल रही टेस्ला कार पेड़ से टकरा गई और ड्राइवर की मौत हो गई। सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक कंपनी के लिए चेतावनी है या पूरे autonomous vehicle इंडस्ट्री के लिए बड़ा सबक?
क्या हुआ था असल में?
कहानी तो 2019 की है, लेकिन असल मसला आज भी उतना ही ज्वलंत है। टेस्ला का Autopilot मोड… जिसे लोग ‘खुद-ब-खुद चलने वाली कार’ समझ बैठे थे। हकीकत? एक पेड़ से टक्कर और एक जान चली गई। अदालत में पता चला कि टेस्ला ने ग्राहकों को पूरी तरह नहीं बताया था कि यह सिस्टम पूरी तरह safe नहीं है। और हैरानी की बात ये कि यह पहली बार नहीं जब Autopilot पर सवाल उठे हैं। पिछले कुछ सालों में ऐसी कितनी ही दुर्घटनाएं हो चुकी हैं!
अदालत ने क्या कहा?
जूरी ने साफ कहा – टेस्ला 60% ज़िम्मेदार! 243 मिलियन डॉलर का मुआवज़ा। अब सोचिए, यह रकम टेस्ला के लिए क्या मायने रखती है? एक तरफ तो यह उनके लिए बड़ा वित्तीय झटका है, वहीं दूसरी तरफ brand image पर भी गहरा असर। फिलहाल टेस्ला चुप्पी साधे हुए है, लेकिन जानकारों का कहना है कि कंपनी जल्द ही अपील कर सकती है। देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या होता है।
लोग क्या कह रहे हैं?
पीड़ित परिवार के वकील तो खुशी से झूम रहे हैं – इसे “न्याय की जीत” बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह फैसला सभी ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए चेतावनी है। वहीं automotive experts की राय है कि अब टेस्ला और दूसरी कंपनियों को अपने driver-assistance systems पर फिर से विचार करना होगा। सोशल मीडिया पर तो #Tesla और #Autopilot ट्रेंड कर रहे हैं – कुछ लोग टेक्नोलॉजी को कोस रहे हैं तो कुछ इसके भविष्य पर सवाल उठा रहे हैं।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नज़रें टेस्ला के अगले कदम पर हैं। क्या वे इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे? और अमेरिकी परिवहन विभाग autonomous vehicles के लिए नए नियम लाएगा? एक बात तो तय है – यह केस पूरी इंडस्ट्री के लिए wake-up call है। जैसे हम मोबाइल फोन खरीदते समय specifications पढ़ते हैं, वैसे ही अब कारों के autonomous features को भी गंभीरता से जांचना होगा।
सच तो यह है कि टेक्नोलॉजी और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना कोई आसान काम नहीं। जैसे-जैसे autonomous vehicles बढ़ेंगे, ऐसे मामले और भी सामने आएंगे। यह केस शायद इतिहास में एक turning point के रूप में याद किया जाएगा। क्या आपको नहीं लगता कि अब टेस्ला और दूसरी कंपनियों को अपनी तकनीक पर फिर से गौर करना चाहिए?
अब ये Tesla का Autopilot सिस्टम लेकर बवाल मचा ही दिया! 243 मिलियन डॉलर का हर्जाना? सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। और सच कहूं तो, ये सिर्फ पैसे का मामला नहीं है – Autonomous Vehicle Technology के पूरे भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है।
तो अब सवाल यह है कि Tesla आगे क्या करेगी? क्योंकि इतने बड़े हर्जाने के बाद तो उन्हें अपने Autopilot की सुरक्षा को लेकर गंभीरता से सोचना ही पड़ेगा। वैसे भी, जब आप किसी की जिंदगी की बात कर रहे होते हैं, तो ‘टेक्नोलॉजी में गड़बड़’ जैसा कोई बहाना चलता नहीं। है न?
एक तरफ तो ये टेस्ला के लिए बड़ा झटका है, लेकिन दूसरी तरफ… शायद ये पूरी इंडस्ट्री के लिए एक जरूरी वेक-अप कॉल है। क्योंकि अगर आप लोगों को सड़कों पर ‘गिनी पिग’ समझकर टेस्ट करेंगे, तो ऐसे फैसले तो आने ही थे। सच में।
(Note: HTML tags preserved as instructed, conversational tone with rhetorical questions, sentence fragments like “सच में”, mixed sentence lengths, and natural Hindi phrasing while keeping English terms like “Autopilot” in original form.)
Source: WSJ – US Business | Secondary News Source: Pulsivic.com