थाईलैंड PM की लीक हुई फोन कॉल ने मचाया तूफान: “इस्तीफा दो!” की गूंज
अरे भई, थाईलैंड की राजनीति में फिर से नाटक शुरू हो गया है! आपने सुना नहीं? प्रधानमंत्री पैटोंगटार्न शिनावात्रा के खिलाफ बैंकॉक की सड़कें आग बनकर भड़क उठी हैं। और वजह? एक लीक हुई फोन कॉल। है न मजेदार? असल में, उनकी कंबोडिया के पूर्व PM हुन सेन के साथ हुई निजी बातचीत रिकॉर्डिंग अचानक public हो गई। और फिर क्या? जैसे माचिस की तीली से आग लग जाए। राजनीतिक गलियारे ही नहीं, आम लोग भी आगबबूला हो गए।
युवा PM पर बढ़ता दबाव
देखिए न, पैटोंगटार्न शिनावात्रा का केस बड़ा दिलचस्प है। थाईलैंड की पहली महिला PM होने के साथ-साथ सबसे युवा नेता भी हैं। लेकिन यहां एक पेंच है – उन पर हमेशा से ही पापा की छाया का आरोप लगता रहा है। जी हां, उनके पिता थाक्सिन शिनावात्रा भी तो पूर्व PM रह चुके हैं। अब इस लीक कॉल में थाईलैंड-कंबोडिया के बीच कुछ गोपनीय बातें हुईं, और विपक्ष तो मानो मछली को पानी मिल गया। “राष्ट्रीय हितों से खिलवाड़” का नारा लगाकर हमला बोल दिया।
बैंकॉक: जहां सड़कें बोल उठीं
अब स्थिति ये है कि जैसे ही यह खबर फैली, बैंकॉक के central इलाकों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव… ऐसा लग रहा था जैसे कोई बारूद का ढेर हो। संसद में भी हंगामा। विपक्ष चिल्ला रहा है – “विशेष बहस चाहिए!” सरकार की तरफ से जवाब? “ये तो edited रिकॉर्डिंग है, असली सच नहीं।” पर साथ ही जांच का ऐलान भी कर दिया। क्या आपको नहीं लगता कि ये सब बहुत… predictable लग रहा है?
राजनीति का पेंच: कौन किसके खिलाफ?
विपक्षी नेता प्रितवी चान-ओ-चा तो बिल्कुल बिफरे हुए हैं – “PM ने राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ किया है!” वहीं सरकार का कहना है कि ये सब opposition का नाटक है। और तो और, कुछ प्रदर्शनकारी तो लोकपाल से जांच की मांग कर रहे हैं। मतलब साफ है – अगर PM के हाथ साफ हैं, तो डर किस बात का? पर सवाल ये है कि क्या वाकई कोई नेता खुलकर सामने आता है?
अब आगे क्या?
सरकार जांच कराएगी, विपक्ष कह रहा है “ये तो समय की बर्बादी है।” राजनीतिक एक्सपर्ट्स की राय? अगर प्रदर्शन बढ़े तो सरकार इंटरनेट शटडाउन या कर्फ्यू जैसे कदम उठा सकती है। और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर? कंबोडिया और ASEAN देशों के साथ relations पर भी असर पड़ सकता है। बड़ा मसला है ये।
देखा जाए तो ये मामला थाईलैंड की उस पुरानी बहस को फिर से जगा रहा है – स्थिरता या पारदर्शिता? PM पैटोंगटार्न का भविष्य अब उनके अगले कदम पर निर्भर करेगा। और जनता? वो तो बस तमाशा देख रही है। पर क्या ये तमाशा थाईलैंड के लिए भारी पड़ेगा? वक्त ही बताएगा।
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1. आखिर PM की लीक हुई फोन कॉल में ऐसा क्या बोल दिया?
देखिए, मामला कुछ ऐसा है – थाईलैंड के PM की एक निजी बातचीत अचानक सार्वजनिक हो गई। और है न, इसमें कुछ ऐसे बयान सामने आए जिन्हें लेकर लोगों के तीखे सवाल उठने लगे। सच कहूं तो, ये कॉल इतनी controversial निकली कि पूरा देश इस पर बहस करने लगा। और अब तो हालात ये हैं कि लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
2. बैंकॉक में ये प्रदर्शन क्यों? समझिए पूरा गणित
असल में बात ये है कि लोगों का गुस्सा अब फूट पड़ा है। जब से ये कॉल लीक हुई, लोगों का भरोसा और भी डगमगा गया। हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर हैं, और उनकी एक ही मांग – PM को इस्तीफा देना होगा! पर सवाल ये उठता है कि क्या सिर्फ एक लीक कॉल इतना बड़ा तूफान खड़ा कर सकती है? शायद ये तो बस एक चिंगारी थी, आग तो पहले से ही सुलग रही थी।
3. क्या ये मामला थाईलैंड की राजनीति को हिला देगा?
ईमानदारी से कहूं तो, हालात काफी गंभीर लग रहे हैं। Opposition पार्टियां तो मानो जैसे इस मौके का इंतजार ही कर रही थीं – अब वो PM पर जमकर हमला बोल रही हैं। अगर प्रदर्शन और बढ़े, तो सरकार के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। Political crisis? हो सकता है। लेकिन ये भी समझना जरूरी है कि थाईलैंड की राजनीति में ऐसे उतार-चढ़ाव नए नहीं हैं।
4. PM ने अब तक क्या कहा? या चुप्पी साधे बैठे हैं?
दिलचस्प बात ये है कि PM खुद अभी तक मुंह नहीं खोल रहे। Official तौर पर तो कोई बयान नहीं आया। हां, सरकार की तरफ से एक बात कही गई है – कि ये एक private कॉल थी जिसे जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। पर सवाल ये है कि क्या ये बयान लोगों को शांत कर पाएगा? मुझे तो नहीं लगता।
Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com