TMC का बड़ा दांव: अभिषेक बनर्जी अब लोकसभा में पार्टी के नए मुखिया!
अरे भाई, पश्चिम बंगाल की राजनीति में तो बड़ा हलचल मच गया है! तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने एक ऐसा फैसला लिया है जिस पर पूरे देश की नज़रें टिकी हैं। अभिषेक बनर्जी को लोकसभा में पार्टी का नया नेता बना दिया गया है। और ये कोई छोटी-मोटी बात नहीं है। असल में देखा जाए तो ये TMC की उस रणनीति का हिस्सा है जहां युवाओं को आगे लाने की कोशिश हो रही है। अब देखना ये है कि इससे राष्ट्रीय राजनीति में TMC की भूमिका कैसे बदलती है।
अभिषेक बनर्जी… यानी ममता दीदी के भतीजे। इन्हें तो आप जानते ही होंगे। 2019 से सांसद हैं और पार्टी के युवा चेहरों में सबसे आगे। सच कहूं तो, सुदीप बंधोपाध्याय के इस्तीफे के बाद से ही ये तय था कि कोई न कोई बड़ा बदलाव आने वाला है। और अब ये हुआ! बिल्कुल साफ है कि पार्टी अब नई पीढ़ी को मौका देने पर जोर दे रही है।
एक दिलचस्प बात – TMC की कार्यसमिति की इस बैठक की अध्यक्षता खुद ममता दीदी ने की थी। यानी ये फैसला ऊपर से आया है, कोई अंदरूनी राजनीति नहीं। और अब तो TMC संसद में केंद्र सरकार के खिलाफ और भी ज्यादा मुखर होने वाली है। खासकर 2024 के चुनावों से पहले तो ये एक बड़ा कदम है।
लेकिन सब इससे खुश हैं? नहीं भई! राजनीतिक गलियारों में तो मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। TMC वाले इसे “युवाओं पर भरोसा” बता रहे हैं, वहीं BJP वाले “परिवारवाद” की बात कर रहे हैं। सच तो ये है कि अभिषेक का ये उदय TMC की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी को मजबूत करना है।
अब सवाल ये उठता है कि आगे क्या? देखिए, ये नियुक्ति अभिषेक के करियर में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। एक तरफ तो उनकी राष्ट्रीय राजनीति में पकड़ मजबूत होगी, वहीं TMC को संसद में एक जोशीला नेतृत्व मिलेगा। पर एक चुनौती भी है – पार्टी के युवा और वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल बिठाना। ये इतना आसान नहीं होगा।
एक बात तो तय है – TMC का ये फैसला सिर्फ पार्टी के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश की राजनीति के लिए अहम साबित हो सकता है। अब देखना ये है कि अभिषेक के नेतृत्व में TMC संसद में कैसा प्रदर्शन करती है। वक्त ही बताएगा। पर एक बात कहूं? ये तो बिल्कुल साफ है कि बंगाल की राजनीति अब दिलचस्प होने वाली है!
TMC का बड़ा फैसला: अभिषेक बनर्जी को लोकसभा नेता बनाने के पीछे की असली वजह क्या है?
अभिषेक बनर्जी – सिर्फ युवा चेहरा या असली गेम-चेंजर?
देखिए, TMC ने अभिषेक को लीडर बनाकर एक साथ तीन चीजें हासिल की हैं। पहला – युवाओं को लुभाने का मौका। दूसरा – एक ऐसा चेहरा जो TV debates से लेकर social media तक BJP को टक्कर दे सके। और तीसरा… ईमानदारी से कहूं तो, दीदी को एक विश्वसनीय चेहरा चाहिए था जो पार्टी को आगे ले जाए। लेकिन सवाल यह है कि क्या अभिषेक में वो दम है? वक्त बताएगा।
पावर स्ट्रगल वाली बातें – सच्चाई या सिर्फ गप्पें?
अरे भई, राजनीति में तो हर फैसले के साथ ये सवाल आता ही है! पार्टी के अंदरूनी सूत्र कह रहे हैं कि ये दीदी का ही प्लान था। पर… छोटी-मोटी बेचैनी तो होगी ही न? जब सीनियर लीडर्स को साइडलाइन किया जाता है तो मन तो खट्टा होता ही है। लेकिन TMC का दावा है कि सब कुछ शांतिपूर्वक होगा। हमें देखना है कि ground reality क्या कहती है।
अब TMC का नया गेम प्लान क्या होगा?
एक तरफ तो अभिषेक urban youth को टारगेट करेंगे – वो भी BJP के ही तरीकों से! Social media presence, catchy slogans, और हां… मोदी सरकार पर जमकर हमला। दूसरी तरफ, TMC को पश्चिम बंगाल में अपना base मजबूत करना है। मतलब साफ है – local issues + national narrative का कॉम्बो। कामयाब होगा? वो तो 2024 का चुनाव ही बताएगा।
क्या पार्टी में फूट का खतरा है?
सच बताऊं? राजनीति में तो ऐसे फैसलों के बाद कुछ न कुछ तो चलता ही है! Political experts की मानें तो 2-3 सीनियर लीडर्स नाराज हो सकते हैं। लेकिन दीदी की पकड़ इतनी आसानी से ढीली नहीं होती। बड़ा सवाल ये है कि क्या ये नाराजगी बाहर दिखेगी? अभी के लिए तो सब ‘हां’ में हां मिला रहे हैं। पर… आप तो जानते ही हैं न, राजनीति में ‘पर’ कभी खत्म नहीं होता!
Source: NDTV Khabar – Latest | Secondary News Source: Pulsivic.com
