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“YF-12 से F7U तक: इतिहास के 5 सबसे बड़े फेल फाइटर जेट्स जो कभी नहीं उड़ पाए!”

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YF-12 से F7U तक: जब दुनिया के सबसे कूल फाइटर जेट्स ने कहा – “यार, नहीं हो पाएगा!”

सुनो जी, हवाई जहाज़ों की दुनिया में कुछ ऐसी कहानियाँ भी हैं जो कभी पूरी नहीं हो पाईं। वो जेट्स जिन्होंने बस कागज़ों पर ही आसमान छूने के सपने देखे… असल में, ये कहानियाँ उतनी ही दिलचस्प हैं जितनी कि सफल जेट्स की। सोचिए न, इनमें से कुछ तो अपने ज़माने के iPhone 15 Pro Max लेवल के इनोवेटिव थे! लेकिन फिर क्या हुआ? या तो पैसा खत्म हो गया, या फिर राजनीति ने बीच में आकर सारा मज़ा किरकिरा कर दिया। आज हम बात करेंगे ऐसे ही 5 जेट्स की जिन्होंने “ट्रायल” तो किया, लेकिन “एरर” ही रह गया।

1. लॉकहीड YF-12: जब ब्लैकबर्ड का भाई भी नहीं उड़ पाया

अरे भाई, SR-71 ब्लैकबर्ड तो हर कोई जानता है – वो जो इतनी तेज़ उड़ता था कि मिसाइलें भी पीछे छूट जाती थीं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका एक छोटा भाई भी था? YF-12 को तो देखकर लगता था जैसे कोई साइंस फिक्शन मूवी से निकलकर आया हो। मच 3 से भी तेज़, और रडार तकनीक जो आज के ज़माने में भी कमाल की है। पर यार, कोल्ड वॉर के दौरान जब नीतियाँ बदलीं तो ये प्रोजेक्ट ही ठंडे बस्ते में चला गया। क्या पता, अगर यह बन जाता तो आज हमारे पास कुछ और ही तकनीक होती!

2. वॉट F7U कटलास: नेवी के पायलटों का सबसे बड़ा डर

1950s का दशक… जब जेट्स नई-नई टेक्नोलॉजी थी। और इसमें F7U कटलास तो जैसे किसी बच्चे की ड्रॉइंग से उतरकर आया हो – बिना पूँछ का! लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी समस्या बन गई। इंजन कमज़ोर, हाइड्रोलिक्स बार-बार फेल… सच कहूँ तो यह जेट इतना खतरनाक था कि पायलट इसे “विडो मेकर” कहने लगे। मतलब? अगर आपने इसमें उड़ान भरी, तो आपकी पत्नी विधवा बन सकती थी। डरावना सच!

3. नॉर्थ्रॉप YB-49: जब 1940s में ही स्टील्थ टेक्नोलॉजी आ गई थी

आज का B-2 स्पिरिट देखकर हैरान होते हो न? पर यकीन मानो, इसकी जड़ें तो 1940s में ही पड़ गई थीं। YB-49 देखने में ठीक वैसा ही था जैसा हम UFOs को फिल्मों में देखते हैं – पूरा का पूरा फ्लाइंग विंग! लेकिन समस्या यह थी कि यह अपने समय से कहीं आगे था। स्टेबिलिटी इश्यूज और फिर USAF का B-36 को प्राथमिकता देना… बस, यही इसके अंत की कहानी बन गया। काश, थोड़ा और समय मिल पाता!

4. मिकोयान मिग-1.44: रूस का वो सुपरजेट जो कभी सुपर नहीं बन पाया

सुखोई-57 से पहले रूस के पास यह ज्वेल था – मिग-1.44। थ्रस्ट वेक्टरिंग? हाँ! सुपरक्रूज? हाँ! लेकिन फिर… सोवियत यूनियन का विघटन हो गया। और जब देश ही नहीं रहा तो पैसा कहाँ से आता? ईमानदारी से कहूँ तो यह जेट तकनीकी तौर पर बहुत आगे था, लेकिन राजनीति ने इसे ज़मीन पर ही रोक दिया। क्या पता, अगर यह बन जाता तो आज एयर शो में कुछ और ही नज़ारा होता!

5. कॉन्वेयर XF-92A: डेल्टा विंग का पहला प्यार

आज तो डेल्टा विंग वाले जेट्स आम हैं – मिराज से लेकर तेजस तक। लेकिन 1948 में? XF-92A तो जैसे किसी साइंटिस्ट का पागलपन भरा सपना था! यह जेट आगे चलकर कई सफल जेट्स के लिए प्रेरणा बना, लेकिन खुद कभी मास प्रोडक्शन तक नहीं पहुँच पाया। इंजन प्रॉब्लम्स और फंडिंग इश्यूज ने इसे हमेशा के लिए प्रोटोटाइप बना दिया। पर यार, पहला कदम तो इसने ही रखा था न?

तो क्या ये फेलियर्स वास्तव में फेल थे?

देखिए, असफलता तो तभी होती है जब आप सीखना बंद कर दें। ये सभी जेट्स, चाहे वे कभी नहीं उड़ पाए हों, आज के एडवांस्ड एविएशन की नींव बने। यह ठीक वैसा ही है जैसे फ्लॉप होने वाले स्मार्टफोन्स के फीचर्स आज हर फोन में देखने को मिलते हैं। तो अगली बार जब कोई प्रोजेक्ट फेल हो, तो याद रखिए – शायद यही किसी और की सफलता का आधार बने!

बताइए तो, इनमें से कौन सा जेट आपको सबसे ज़्यादा “यार, यह तो बनना चाहिए था!” लगा? कमेंट्स में बताइएगा ज़रूर। और हाँ, ऐसी ही मस्त-मस्त टेक स्टोरीज के लिए हमें फॉलो करना न भूलिएगा!

क्या आप जानते हैं कि इतिहास में ऐसे भी फाइटर जेट्स रहे जो कभी सफल नहीं हो पाए? जी हाँ, YF-12 और F7U जैसे जेट्स की कहानियाँ तो बिल्कुल वैसी ही हैं जैसे कोई बॉलीवुड फ्लॉप फिल्म – पैसा और मेहनत तो डूबा, लेकिन कुछ सीख ज़रूर मिली! असल में देखा जाए तो innovation का सफर कभी सीधा नहीं होता।

हालांकि ये जेट्स आसमान में अपनी ताकत नहीं दिखा पाए, पर इन्होंने engineers के लिए नई राहें खोल दीं। एक तरफ तो ये असफलताएँ थीं, लेकिन दूसरी तरफ… सच पूछो तो यही वो सीढ़ियाँ थीं जिन पर चढ़कर आज के modern fighter jets बने।

अगली बार जब आप कोई शानदार जेट देखें, तो याद रखिए – उसकी चमक के पीछे ऐसी ही कई ‘फेल’ कहानियाँ छुपी हैं। है न मज़ेदार बात?

YF-12 से F7U तक: जब हवाई जहाज़ों के सपने धराशायी हुए – 5 बड़े फ्लॉप्स और उनकी कहानियाँ

1. YF-12 और F7U – ये ‘फ्लाइंग फेल्योर्स’ क्यों बने?

देखिए, असल में कहानी ये है कि इन जेट्स ने वादे तो बहुत किए थे, लेकिन… हुआ कुछ नहीं। YF-12 की बात करें तो सुपरसोनिक स्पीड का खुमार था, पर टेक्नोलॉजी उस स्तर की नहीं थी। और F7U? उसका तो डिज़ाइन ही कुछ ऐसा था जैसे किसी ने साइंस फिक्शन मूवी से उठा लिया हो! Performance, मेन्युवरेबिलिटी, बजट – हर मोर्चे पर नाकामी। सच कहूँ तो कभी-कभी बहुत ज्यादा एम्बिशन भी नुकसानदायक हो जाता है।

2. क्या इन फेलियर्स का कोई फायदा भी हुआ?

अरे भई, फेल्योर से ही तो सीख मिलती है न! ये जेट्स aviation industry के लिए एक तरह का स्कूल साबित हुए। इनकी गलतियों ने engineers को सिखाया कि क्या नहीं करना चाहिए। आज जो fifth-gen जेट्स देख रहे हैं, उनमें इन्हीं प्रोजेक्ट्स के सबक छुपे हैं। थोड़ा अजीब लगेगा, पर सच यही है – कभी-कभी असफलता ही सबसे बड़ी टीचर होती है।

3. इतिहास का सबसे बड़ा ‘महंगा सबक’ कौन सा था?

लिस्ट में सबसे ऊपर तो Lockheed YF-12 ही आएगा। सोचिए, इतना पैसा खर्च किया… इतनी मेहनत… और फिर USAF ने मना कर दिया! ऐसा लगा जैसे कोई बॉलीवुड फिल्म फ्लॉप हो गई हो। High-speed capabilities पर काम करने में अमेरिकी टैक्सपेयर्स का खूब पैसा डूबा। पर शायद यही तो रिसर्च का खेल है – हर सफलता के पीछे ऐसी ही कई असफलताएँ छुपी होती हैं।

4. कोई ऐसा जेट जिसने ‘फेल्योर से सफलता’ तक का सफर तय किया?

हाँ! F-16 का किस्सा तो बड़ा दिलचस्प है। शुरू में तो इसे ठुकरा दिया गया था, लेकिन बाद में… वाह! क्या कमाल किया engineers ने। मॉडिफिकेशन करके इसे दुनिया का सबसे जाना-माना फाइटर जेट बना दिया। पर हैरानी की बात ये कि YF-12 या F7U को दोबारा चांस ही नहीं मिला। शायद कभी-कभी फर्स्ट इम्प्रेशन ही लास्ट इम्प्रेशन बन जाता है।

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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