ट्रंप का बड़ा फैसला! भारत समेत इन देशों पर 10% से 41% तक टैरिफ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरकार वो किया जिसका इंतज़ार था – एक Executive Order पर दस्तखत कर दिए। और ये कोई मामूली फैसला नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के व्यापार को हिला देने वाला कदम है। भारत, चीन, मैक्सिको और यूरोपीय संघ जैसे देशों से आने वाले सामानों पर अब 10% से लेकर 41% तक का Reciprocal Tariff लगने वाला है। सीधे शब्दों में कहें तो, जितना टैक्स आप अमेरिकी सामान पर लगाते हैं, उतना ही अब आपको चुकाना पड़ेगा। क्या ये अमेरिका के बढ़ते Trade Deficit को कंट्रोल कर पाएगा? देखते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि: क्यों लिया ये फैसला?
असल में बात ये है कि अमेरिका पिछले कई सालों से एक बड़ी समस्या से जूझ रहा है – उनका आयात निर्यात से कहीं ज़्यादा है। 2018 में भी ट्रंप ने चीन और यूरोप के खिलाफ ऐसे ही कड़े कदम उठाए थे, जिससे दुनिया भर में Trade War जैसे हालात पैदा हो गए थे। अब भारत की बात करें तो… हमारे साथ अमेरिका का Trade Deficit करीब 21 बिलियन डॉलर का है। यानी हम उन्हें जितना सामान बेचते हैं, उससे ज़्यादा खरीदते नहीं। और अब ट्रंप साहब को ये बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा!
किसको होगा सबसे ज़्यादा नुकसान?
भारत के लिए तो ये बड़ा झटका हो सकता है, खासकर स्टील, एल्युमिनियम, केमिकल्स और कृषि उत्पादों के लिए। ये सभी चीज़ें हम अमेरिका को बड़ी मात्रा में एक्सपोर्ट करते हैं। चीन की हालत और भी खराब है – उनके कुछ प्रोडक्ट्स पर तो 41% तक का भारी-भरकम टैरिफ लग सकता है! यूरोपीय संघ तो बिल्कुल नाराज़ है और जवाबी कार्रवाई की धमकी दे रहा है। मज़े की बात ये कि अमेरिका की अपनी ही कंपनियां इसका विरोध कर रही हैं। क्यों? क्योंकि Production Cost बढ़ेगी और आखिरकार अमेरिकी जनता को महंगा सामान खरीदना पड़ेगा। Irony देखिए!
दुनिया क्या कह रही है?
भारत सरकार ने अभी तक बहुत ही संतुलित रुख अपनाया है – वो Diplomatic Talks जारी रखने की बात कर रही है। लेकिन Trade Experts चिंता जता रहे हैं कि इससे वैश्विक Supply Chain बिगड़ सकती है और Inflation बढ़ सकता है। अमेरिका के अपने ही Industry Associations कह रहे हैं कि लंबे समय में ये उनके Work Force और Manufacturing Sector के लिए नुकसानदायक होगा। सच कहूं तो, ये फैसला किसी के लिए भी अच्छा नहीं लग रहा।
आगे क्या होगा?
ज़ाहिर है भारत चुप नहीं बैठेगा। 2019 में भी जब ऐसा हुआ था, तो हमने 28 अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगा दिया था। कुछ वैसा ही इस बार भी हो सकता है। और तो और, WTO में केस भी दर्ज हो सकता है। एक बात तो तय है – ये फैसला आने वाले सालों में Global Trade Policies को नए सिरे से परिभाषित कर देगा। क्या ये सही दिशा में उठाया गया कदम है? वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो बस इतना कह सकते हैं – ब्रेस योरसेल्व्स, स्टॉर्म आ रहा है!
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