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ट्रंप का ऐतिहासिक फैसला: भारत पर 50% टैरिफ! क्या होगा असर? अब क्या करेगा मोदी सरकार?

ट्रंप ने भारत को दिया झटका! 50% टैरिफ… अब क्या करेगी मोदी सरकार?

बस, हो गया! अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक ऐसा फैसला लिया जिसने भारत के लिए आर्थिक तूफान खड़ा कर दिया। सीधे शब्दों में कहें तो – भारतीय सामान अब अमेरिका में 50% महंगे हो जाएंगे। यानी पहले जहां 25% टैरिफ था, अब डबल! और ये सब क्यों? असल में, भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया। ट्रंप को ये बात इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने ये बड़ा कदम उठा लिया। अब सवाल यह है कि क्या ये सिर्फ टैरिफ की बात है या दोनों देशों के रिश्तों में दरार आने का संकेत?

पीछे की कहानी: ट्रंप को चुभ गई भारत की चाल?

देखिए, भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ की लड़ाई नई नहीं है। पिछले कुछ सालों में स्टील-एल्युमिनियम पर तो टैरिफ बढ़ते ही रहे। लेकिन इस बार की बात अलग है। पूरी कहानी यूक्रेन वॉर से जुड़ी है। जब पश्चिमी देश रूस पर प्रतिबंध लगा रहे थे, भारत ने वहां से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा। और ट्रंप? वो तो ‘America First’ की रट लगाए बैठे हैं। कई बार उनके लोगों ने भारत को लताड़ा भी – “ये अनुचित व्यापार है!” अब ये टैरिफ उसी का नतीजा है। सच कहूं तो, ये होना ही था।

तुरंत असर: किस-किस की चूलें हिलेंगी?

अब बात करते हैं नुकसान की। चार बड़े सेक्टर्स पर सीधा वार होगा:
– स्टील (जिसका सबसे बड़ा बाजार अमेरिका ही तो है)
– टेक्सटाइल
– दवाएं
– IT सेवाएं

एक वाणिज्य मंत्रालय के बाबू ने (बिना नाम बताए) कहा – “SMEs को सबसे ज्यादा झटका लगेगा।” मतलब, छोटे-मझोले कारोबारियों की कमर टूट सकती है। और हां, आम आदमी को भी महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है। क्योंकि जब निर्यात घटेगा, तो रुपया और कमजोर होगा। समझ रहे हैं ना माजरा?

किसने क्या कहा? प्रतिक्रियाओं का हंगामा

भारत सरकार तो जैसे आग बबूला हो गई! विदेश मंत्रालय ने इसे “एकतरफा और बेईमानी” बताया। वहीं FIEO के मुखिया की चिंता देखिए – “छोटे निर्यातक तबाह हो जाएंगे।” अर्थशास्त्रियों की राय? ये कदम trade deficit को और बढ़ाएगा। मतलब साफ है – अमेरिका से ज्यादा आयात, कम निर्यात। और इसका बोझ अंततः हम सब पर आएगा।

अब क्या? मोदी सरकार के पास कौन-कौन से विकल्प?

तो अब सवाल यह है कि सरकार क्या करेगी? सूत्रों की मानें तो तीन रास्ते हैं:
1. अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ (जैसे iPhone और Boeing विमान महंगे कर दें)
2. WTO में शिकायत दर्ज कराना
3. बातचीत से हल निकालना

लेकिन यहां मुश्किल ये है कि ट्रंप तो अपने अंदाज में ही मस्त हैं। उनसे बात करना आसान नहीं होगा। क्या मोदी सरकार सीधी टक्कर लेगी या फिर चुपके से कोई चाल चलेगी?

लंबे समय में क्या? बदल सकती है पूरी तस्वीर!

असल में ये टैरिफ सिर्फ आज की समस्या नहीं है। इसके दूरगामी नतीजे हो सकते हैं। जैसे:
– भारत को यूरोप और दूसरे एशियाई बाजारों में ज्यादा ध्यान देना होगा
– ‘China plus one’ strategy पर जोर बढ़ सकता है (यानी कंपनियां चीन के अलावा भारत को चुनें)
– Defense और technology के deals पर भी असर पड़ सकता है

एक बात तो तय है – आजकल अर्थव्यवस्था और राजनीति अलग-अलग नहीं चलती। ट्रंप ने तो अपना रास्ता चुन लिया। अब देखना है कि मोदी सरकार कैसे जवाब देती है। अगले कुछ हफ्ते बहुत मजेदार होने वाले हैं! क्योंकि ये फैसला सिर्फ टैरिफ नहीं, बल्कि भारत-अमेरिका रिश्तों का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

यह भी पढ़ें:

ट्रंप का वो झटका: भारत पर 50% टैरिफ! – समझिए पूरा मामला

1. ट्रंप ने अचानक भारत पर टैरिफ क्यों थोप दिया?

देखिए, Donald Trump का ये move कोई हैरानी वाली बात नहीं है। आखिरकार, ये वही शख्स हैं जिन्होंने ‘America First’ का नारा दिया था। उनका तर्क सीधा है – भारत से आने वाले products अमेरिकी कारखानों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। पर सच कहूं तो, क्या सच में trade imbalance इतना बड़ा मुद्दा है? या फिर ये 2024 elections से पहले एक political stunt है? सोचने वाली बात है…

2. हमारी अर्थव्यवस्था पर क्या गिरेगी इसकी छाया?

अब यहां थोड़ा गंभीर होना पड़ेगा। textiles और pharmaceuticals जैसे sectors तो एकदम चपेट में आएंगे – बिल्कुल वैसे ही जैसे गर्मी में बिना छतरी के निकलना! short-term तो झटका लगेगा ही। लेकिन हमारे experts का कहना है कि भारत नए markets तलाश लेगा। Russia और Africa की तरफ रुख कर सकते हैं। असल में, हर संकट में एक मौका छुपा होता है – शायद यही वक्त है diversify करने का?

3. मोदी सरकार के पास क्या-क्या विकल्प हैं?

अब ये दिलचस्प हो जाता है! पहला तो diplomatic channels हैं – बातचीत से हल निकालने की कोशिश। पर अगर बात न बने तो? फिर तो जवाबी कार्रवाई के रास्ते खुलते हैं। WTO में case दर्ज करना हो या फिर अमेरिकी products पर खुद टैरिफ लगाना – options तो हैं। पर क्या ये smart move होगा? क्योंकि अमेरिका हमारा दूसरा सबसे बड़ा trading partner है। बैलेंस बनाना होगा।

4. क्या दोस्ती पर पड़ेगा दाग?

सुनिए, अमेरिका के साथ हमारे relations बहुत layers वाले हैं। हां, अभी थोड़ी तल्खी आएगी – जैसे दो दोस्तों में झगड़ा हो जाए। पर strategic partnership, defense deals, China के मुद्दे – ये सब इतनी जल्दी खत्म नहीं होने वाले। मेरा personal अनुमान? 6-8 महीने में स्थितियां सामान्य हो जाएंगी। बस तब तक थोड़ा rollercoaster ride तो झेलना ही पड़ेगा!

Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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