ट्रंप ने ‘रूसी युद्ध मशीन’ को लेकर जमकर आग उगली, पर क्या मॉस्को जा रहे अमेरिकी दूत कुछ बदल पाएंगे?
अरे भई, अमेरिकी राजनीति में डोनाल्ड ट्रंप का नाम आते ही माजरा गरम हो जाता है न! सोमवार को उन्होंने रूस पर जो तीखा वार किया, वो सुनकर लगा जैसे कोई बुलडोज़र सीधे दीवार से टकरा गया हो। ‘Russian war machine‘ को उन्होंने यूक्रेन में हो रहे नरसंहार का सीधा जिम्मेदार ठहराया। और सच कहूं तो, ये बयान ऐसे वक्त पर आया है जब अमेरिकी special envoy स्टीव विटकॉफ मॉस्को में युद्धविराम की बातचीत के लिए पहुंचने वाले हैं। संयोग? शायद नहीं।
ये जंग क्यों है इतनी अहम?
देखिए न, फरवरी 2022 से चल रही ये लड़ाई तो अब तक हजारों लोगों को मौत की नींद सुला चुकी है। लाखों लोग? उनके घर तबाह। अमेरिका और NATO nations यूक्रेन को हथियारों और पैसे की बाढ़ लगा रहे हैं, वहीं रूस पर war crimes के आरोपों की बौछार। International community बीच-बचाव करने की कोशिश कर रही है, पर अब तक तो स्थिति वही ढाक के तीन पात वाली है।
अभी क्या चल रहा है?
ट्रंप ने तो पुतिन को सीधे ‘निर्दयी’ कह डाला! Russian leadership को उन्होंने यूक्रेन में हो रहे कत्लेआम का दोषी ठहराया। असल में बात ये है कि अमेरिकी special envoy की ये मॉस्को ट्रिप इस पूरे मामले में game changer साबित हो सकती है। हालांकि Kremlin ने अभी तक official reaction तो नहीं दिया, पर वार्ता को लेकर उनके इशारे सकारात्मक लग रहे हैं। शायद कोई रास्ता निकले?
दुनिया क्या कह रही है?
यूक्रेन तो ट्रंप के बयान से खुशी में झूम उठा! उनका कहना है कि अमेरिका को रूस के खिलाफ और strong actions लेने चाहिए। वहीं रूसी state media ने इसे सीधे ‘अमेरिकी domestic politics’ का नाटक बता दिया। Experts की राय? बंटी हुई है। कुछ कह रहे हैं कि ये negotiation process पर दबाव बढ़ाएगा, तो कुछ को लगता है कि Russia-America relations में ये नया झटका साबित होगा।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि अमेरिकी envoy की मॉस्को यात्रा से कुछ concrete progress हो पाता है या नहीं। Experts का मानना है कि अगर talks सफल रहीं तो temporary ceasefire तो हो सकता है, पर दोनों पक्षों के बीच जो mutual distrust है, वो तो बड़ी दीवार बनी हुई है। और हां, 2024 के presidential elections को देखते हुए ट्रंप का ये बयान उनकी foreign policy approach को फिर से चर्चा में ला सकता है। राजनीति है, सब चाल चल रहे हैं!
सच तो ये है कि पूरी global community इस मामले पर नजर गड़ाए बैठी है। क्यों? क्योंकि यूक्रेन संकट का हल न सिर्फ regional stability के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की geopolitical स्थिति के लिए अहम है। अब देखना ये है कि ये शतरंज का खेल किसके पक्ष में जाता है।
Source: NY Post – World News | Secondary News Source: Pulsivic.com