अजीत डोभाल और ट्रंप के दूत का एक ही प्लेन? ये कॉइन्सिडेंस है या कोई गेम चल रहा है?
भईया, अजीत डोभाल की ये रूस ट्रिप तो हलचल मचा दी है न! सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सबकी जुबान पर एक ही सवाल – आखिर ये पूरा माजरा क्या है? और सबसे मजेदार बात ये कि डोभाल साहब ट्रंप के खास दूत के साथ ही क्यों उड़ान भर रहे थे? ये तब की बात है जब भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर ठन्डा-ठन्डा माहौल चल रहा है। संयोग? शायद नहीं।
पहले थोड़ा कॉन्टेक्स्ट समझ लेते हैं
देखिए, पिछले कुछ महीनों से भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास आई हुई है। चाहे वो डिजिटल टैक्स का मसला हो या फिर मेडिकल डिवाइस एक्सपोर्ट का, दोनों देश एक-दूसरे पर नोटिस ले रहे हैं। और तो और, अमेरिका ने तो टैरिफ बढ़ाने की धमकी तक दे डाली थी! जवाब में हमारी सरकार ने भी कड़े रुख की बात कही।
अब दूसरी तरफ रूस है – हमारा पुराना और भरोसेमंद दोस्त, खासकर डिफेंस और एनर्जी के मामले में। तो जब डोभाल रूस जाते हैं और साथ में ट्रंप का दूत भी होता है, तो सवाल तो उठेगा ही न? क्या ये अमेरिका-भारत-रूस के इस पेचीदा तिकड़ी में संतुलन बिठाने की कोशिश है? ईमानदारी से कहूं तो लगता तो ऐसा ही है।
असली गेम क्या है?
सूत्रों की मानें तो ये यात्रा ‘confidential’ थी। पर भई, जब NSA साहब और ट्रंप का दूत एक ही फ्लाइट में सफर करें, तो ये कैसा कॉन्फिडेंशियल? कूटनीति के जानकारों का कहना है कि ये दोहरी रणनीति हो सकती है – एक तरफ रूस के साथ डिफेंस डील मजबूत करना, दूसरी तरफ अमेरिका से तनाव कम करने की कोशिश।
सबसे दिलचस्प बात? ये सब अमेरिकी चुनावों से ठीक पहले हो रहा है। क्या ये हमारी सरकार का सही समय पर सही चाल चलना है? या फिर अमेरिका हमें रूस से दूर करने की कोशिश में है? गंभीर सवाल है।
रिएक्शन्स क्या आ रहे हैं?
इस मामले पर अलग-अलग लोग अलग-अलग राय दे रहे हैं। विपक्ष तो सरकार पर सीधे हमला बोल रहा है – “स्पष्ट करो कि अमेरिका और रूस के बीच हमारा स्टैंड क्या है? ये गोपनीयता देशहित में नहीं!”
वहीं एक्सपर्ट्स की राय थोड़ी अलग है। उनका कहना है कि ये हमारी ‘multi-alignment’ पॉलिसी का हिस्सा हो सकता है, जहां हम अमेरिका और रूस दोनों के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका की तरफ से भी बयान आया है, पर वो बहुत सामान्य सा – “हम भारत के साथ रिश्ते मजबूत करना चाहते हैं।” असल में क्या सोच रहे हैं, वो तो वही जानें!
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल – इस यात्रा का असर क्या होगा? अगर सब कुछ ठीक रहा, तो हम अमेरिका से टैरिफ विवाद सुलझा सकते हैं और रूस से नई डिफेंस डील भी कर सकते हैं। जीत-जीत की स्थिति।
लेकिन…हमेशा एक लेकिन तो होता ही है न? अगर बातचीत फेल हो गई, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। भारत-अमेरिका रिश्तों में और खटास आ सकती है। एक बात तो तय है – डोभाल साहब की ये ट्रिप कोई सामान्य विदेश दौरा नहीं है। ये हमारी विदेश नीति के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। या फिर…बस एक और न्यूज स्टोरी? वक्त ही बताएगा!
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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com