trump india tariff warning

ट्रंप का भारत पर गरम तेवर: “टैरिफ मसला सुलझेगा, तभी होगी बात” | EXCLUSIVE

ट्रंप का भारत पर गरम तेवर: “टैरिफ मसला सुलझेगा, तभी होगी बात” | EXCLUSIVE

अरे भई, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो आजकल फिर से सुर्खियां बटोर ली हैं। भारत-अमेरिका व्यापार को लेकर उनका ताजा बयान कुछ ऐसा है जिसने दोनों देशों के बीच की हवा में फिर से तनाव घोल दिया है। सीधे शब्दों में कहें तो उन्होंने यही कहा – “जब तक भारत पर लगे 50% टैरिफ का मामला सुलझ नहीं जाता, अमेरिका किसी नई डील पर बात तक नहीं करेगा।” और ये बयान ऐसे वक्त आया है जब दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत चल रही है। सोचिए, अब क्या होगा?

मामले की पृष्ठभूमि: पुराने घावों की गूंज

देखिए, भारत और अमेरिका के बीच ये टैरिफ की लड़ाई कोई नई नहीं है। 2018 की बात याद है? जब ट्रंप प्रशासन ने हमारे स्टील और एल्युमिनियम पर अतिरिक्त टैक्स लगा दिया था। हमने भी तो जवाब में अमेरिकी सामानों पर कर बढ़ा दिए थे न! हालांकि बाद में कुछ छोटे-मोटे समझौते हुए, पर असली मसला तो वहीं का वहीं रहा। असल में ये पूरा विवाद अमेरिका की “America First” policy और हमारी “आत्मनिर्भर भारत” योजना के बीच की टक्कर है। दोनों ही अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं।

ट्रंप का हालिया बयान: साफ और सख्त

पिछले दिनों एक exclusive इंटरव्यू में ट्रंप ने जो कहा, वो तो बिल्कुल साफ था: “भारत को टैरिफ के मुद्दे पर गंभीरता से बात करनी होगी। बिना इसके हल हुए कोई नई बातचीत नहीं होगी।” और साथ ही अमेरिकी प्रतिनिधियों ने हमारे डिजिटल टैक्स और फार्मा पॉलिसीज पर भी आपत्तियां दोहरा दीं। हैरानी की बात ये कि भारत सरकार की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। पर सूत्रों की मानें तो विदेश और वाणिज्य मंत्रालय इस पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। क्या ये सब चुप्पी किसी बड़ी चाल का हिस्सा है? समय बताएगा।

विश्लेषकों की नजर में: चुनावी चाल या असली मुद्दा?

अब यहां दिलचस्प बात ये है कि जानकार क्या कह रहे हैं। कुछ का मानना है कि ये ट्रंप की महज एक चुनावी रणनीति है। वो भी ऐसे वक्त में जब 2024 के अमेरिकी चुनावों की तैयारियां चल रही हैं। मतलब साफ है – अमेरिकी मजदूरों और उद्योगपतियों को ये दिखाना कि “देखो, मैं तुम्हारे हितों की रक्षा कर रहा हूं।”

लेकिन दूसरी तरफ, हमारे यहां के उद्योग जगत की चिंताएं भी कम नहीं हैं। अगर ये टैरिफ युद्ध बढ़ा तो IT, फार्मा और हस्तशिल्प जैसे सेक्टरों को भारी नुकसान हो सकता है। और ये तो हम सभी जानते हैं कि ये सेक्टर हमारे exports का कितना बड़ा हिस्सा हैं।

आगे की राह: समझौता या टकराव?

तो अब सवाल यही है कि आगे क्या? दो रास्ते हैं – या तो भारत सरकार ट्रंप की मांगों पर विचार करे, जिससे नई वार्ता का रास्ता खुले। पर ये इतना आसान नहीं। क्योंकि अगर हम टैरिफ में छूट देंगे तो कुछ लोग इसे “अमेरिकी दबाव में झुकना” भी कह सकते हैं। राजनीति है भई, सबको मौके की तलाश रहती है।

वहीं दूसरा विकल्प ये कि अमेरिका अपने रुख पर अड़ा रहे। अगर ऐसा हुआ तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। क्या पता, फिर WTO जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मामले को ले जाना पड़े। पर इतना तो तय है कि ट्रंप का ये बयान भारत-अमेरिका रिश्तों में नया मोड़ ला सकता है। अब देखना ये है कि हमारे कूटनीतिज्ञ इस चुनौती को कैसे हैंडल करते हैं।

एक बात और – अगर आपको लगता है कि ये सिर्फ टैरिफ का मामला है तो थोड़ा और गहराई से सोचिए। ये तो दो देशों की आर्थिक नीतियों और राष्ट्रीय हितों की टकराहट है। और ऐसे मामलों में समाधान हमेशा बीच का रास्ता ही निकलता आया है। शायद इस बार भी वही हो।

यह भी पढ़ें:

ट्रंप और भारत का टैरिफ विवाद – जानिए पूरी कहानी, बिना फिल्टर के!

ट्रंप ने भारत को लेकर क्या बम फोड़ा?

सुनिए, ट्रंप साहब ने तो एकदम सीधी बात कह दी – “भारत के साथ trade और टैरिफ का मामला सुलझेगा, तभी आगे की बात होगी।” और हां, उन्होंने high tariffs की धमकी भी दे डाली। मतलब साफ है – या तो हमारे नियम मानो, या फिर… आप समझ गए न?

भारत ने इस पर क्या जवाब दिया? क्या हमने भी कोई एक्शन लिया?

देखिए, हमारी सरकार ने अभी तक बहुत शांत तरीके से respond किया है। मोदी जी के दफ्तर से आधिकारिक बयान आया कि हम diplomatic रास्ते से हल निकालेंगे। पर सच बताऊं? हमारे officials पहले से ही अमेरिकी counterparts के साथ बातचीत में जुटे हुए हैं। यही तो है हमारी चालाकी!

यार, पर सच में – क्या ये झगड़ा हमारे trade को चौपट कर देगा?

ऐसा मत सोचिए! हां, short term में थोड़ा झटका लग सकता है। लेकिन एक बात याद रखिए – जब दो बड़े दोस्त (या कहें trade partners?) आपस में लड़ते हैं, तो जल्दी ही सुलह भी हो जाती है। Experts भी यही कह रहे हैं कि दोनों देश इस मसले को जल्द solve कर लेंगे। क्यों? क्योंकि business तो business है भाई!

सबसे बड़ा सवाल – अगर बात नहीं बनी तो?

अरे भई, नकारात्मक सोचने से क्या फायदा? लेकिन अगर मान भी लें कि बात नहीं बनी (जो कि होने वाला नहीं), तो हां, trade war की आशंका है। जिसका मतलब – exports-imports का नुकसान, बाजार में उथल-पुथल। पर रहने दीजिए ये काल्पनिक बातें! अभी तो हालात पूरी तरह नॉर्मल हैं। सरकार भी alert है, बिजनेस लीडर्स भी। तो relax!

Source: Aaj Tak – Home | Secondary News Source: Pulsivic.com

More From Author

linux terminal app android native development benefits 20250808040528695200

Android पर Linux टर्मिनल ऐप से नेटिव डेवलपमेंट क्यों है फायदेमंद? मेरी राय

रक्षाबंधन 2025: भैया को खुश करने के 10 यूनिक रिटर्न गिफ्ट आइडियाज | बेस्ट राखी गिफ्ट्स

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Comments