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ट्रंप ने जॉर्ज सैंटोस को माफी देने से किया इनकार – ‘उसने बहुत झूठ बोला!’

ट्रंप ने जॉर्ज सैंटोस को माफी देने से मना कर दिया – और बोले, “यार, इतना झूठ तो मैंने भी नहीं बोला!”

अमेरिकी राजनीति में फिर से वही पुराना सवाल उठ खड़ा हुआ है – नेता कितना झूठ बोल सकते हैं? और देखिए, इस बार डोनाल्ड ट्रंप खुद ही सबसे बड़े नैतिकतावादी बन गए हैं! उन्होंने जॉर्ज सैंटोस को माफी देने से साफ इनकार करते हुए कहा, “अरे भाई, इसने तो रिकॉर्ड तोड़ दिए। मेरी बात नहीं मानोगे तो जेल ही जाना पड़ेगा ना?” ये बयान ऐसे वक्त आया है जब सैंटोस ने अभी-अभी fraud के मामले में सात साल की सजा शुरू की है। सच कहूं तो, ये पूरा मामला एक सस्ते सीरियल जैसा लग रहा है!

क्या था पूरा ड्रामा?

जॉर्ज सैंटोस, जो कभी Republican पार्टी का चमकता सितारा हुआ करते थे, अब उनके resume में इतने छेद निकले कि Swiss cheese शर्मा जाए! Campaign funds का दुरुपयोग? हां। Donors को ठगना? बिल्कुल। अपनी qualifications के बारे में झूठ? अरे भई, वो तो बेसिक था! कोर्ट ने उन्हें 23 charges पर दोषी ठहराया – wire fraud से लेकर identity theft तक। सच बताऊं तो अगर झूठ बोलने के लिए ओलंपिक होता, तो सैंटोस गोल्ड मेडल लेकर घर जाते!

राजनीति के अखाड़े में क्या चल रहा है?

ट्रंप के इस फैसले पर तो जैसे मचल ही गया है सब। Republican पार्टी के कुछ नेताओं ने तालियां बजा दीं – “शाबाश! ऐसे ही चाहिए!” वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो चुपके से सैंटोस के लिए clemency की गुहार लगा रहे हैं। पर सच तो ये है कि पार्टी खुद इस मामले से परेशान है। एक senior leader (जो नाम नहीं लेना चाहते) ने कहा भी – “यार, हमें तो शर्म आ रही है।”

और Democrats? वो तो मानो दिवाली मना रहे हों! House Minority Leader ने तो ऐसा statement दिया जैसे पूरी Republican पार्टी ही fraud करने वालों का अड्डा हो। हालांकि, हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि glass houses में रहने वाले पत्थर नहीं फेंकते!

अब आगे क्या?

सैंटोस की legal team तो अपील करने की तैयारी में है, मगर experts की राय में उनकी हालत उस बिल्ली जैसी है जो पेड़ पर चढ़ तो गई, लेकिन उतरना नहीं आता। ट्रंप ने अभी के लिए तो pardon देने से मना कर दिया है, पर राजनीति में तो कल कुछ भी हो सकता है। आज ना नहीं, कल हां हां भी हो सकता है!

2024 elections से पहले ये मामला Republican पार्टी के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है। Ethics और accountability पर बहस तो होगी ही, पर असल सवाल ये है कि क्या voters इसे याद रखेंगे? मेरा ख्याल है, अमेरिकी जनता की याददाश्त goldfish से बेहतर नहीं होती।

एक political commentator ने सही कहा – “सच्चाई तो सामने आनी ही थी। चाहे वो ballot box में हो या courtroom में।” पर सच कहूं तो, अमेरिकी राजनीति में ये तो बस एक और एपिसोड है। अगले हफ्ते कुछ और नया होगा। क्योंकि यहां, show must go on!

Source: NY Post – US News | Secondary News Source: Pulsivic.com

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