क्या ट्रंप का टैरिफ भारतीय शेयर बाजार के लिए ‘ब्लैक मंडे’ बन जाएगा? 1987 जैसी तबाही की बात सुनकर दिल धक से रह जाता है!
शुक्रवार को तो भारतीय शेयर बाजार ने ऐसी धमाकेदार गिरावट दिखाई कि निवेशकों की नींद उड़ गई। सोचिए, Sensex ने 280 अंकों की बौछार कर खुद को 80,900 के स्तर पर पहुंचा दिया, वहीं Nifty भी 115 अंक लुढ़ककर 24,653 पर आ गिरा। और तो और, Nifty Bank भी इस मामले में पीछे कहां रहने वाला था – 145 अंकों की गिरावट के साथ 55,840 पर सिमट गया। छोटे-मझोले निवेशकों की हालत तो और भी खराब। स्मॉलकैप और मिडकैप सेगमेंट में लाल निशान देखकर लग रहा था जैसे कोई होली ही खेल रहा हो। असल में यह सब कुछ उस वक्त हो रहा है जब डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ प्रस्ताव ने पूरी दुनिया के बाजारों को हिलाकर रख दिया है। कुछ एक्सपर्ट्स तो यहां तक कह रहे हैं कि कहीं ऐसा न हो कि 1987 का ‘ब्लैक मंडे’ फिर से दोहरा दिया जाए। डरावना सच।
पूरा माजरा क्या है? ट्रंप की टैरिफ नीति और इतिहास की डरावनी यादें
देखिए न, ट्रंप साहब ने हाल ही में चीन और दूसरे देशों से आने वाले सामान पर भारी-भरकम टैरिफ लगाने की बात कही है। और ये सब क्यों? क्योंकि नवंबर में अमेरिकी चुनाव हैं भाई! उनकी इस एक चाल ने दुनिया भर के बाजारों में वही डर पैदा कर दिया है जो 1987 के ‘ब्लैक मंडे’ के वक्त देखने को मिला था। याद कीजिए 19 अक्टूबर, 1987 का वो काला दिन जब अमेरिकी बाजार ने एक ही दिन में 22% की गिरावट झेली थी। उसका असर तो पूरी दुनिया पर पड़ा था। अब भारतीय बाजार पहले से ही महंगाई, ब्याज दरों और ग्लोबल अनिश्चितता से जूझ रहा है – ऊपर से ट्रंप का ये नया बवाल। मानो नमक घाव पर छिड़क दिया हो।
बाजार पर असर: क्या हो रहा है असल में?
ये गिरावट कोई एक दिन की बात नहीं है दोस्तों। Sensex और Nifty में लगातार दूसरे दिन गिरावट आई है। मतलब साफ है – बाजार का मूड खराब है। बैंकिंग सेक्टर, जिसे अर्थव्यवस्था का आईना माना जाता है, उसमें भी बड़ी बिकवाली देखी गई। Nifty Bank के 145 अंक गिरने से साफ पता चलता है कि निवेशकों का कॉन्फिडेंस डगमगा रहा है। छोटे निवेशकों की हालत और भी बदतर – स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में गिरावट से लग रहा है जैसे छोटे खिलाड़ी इस मैच से बाहर हो रहे हों। एशियाई बाजारों की हालत भी कुछ अच्छी नहीं। साफ है कि ये समस्या सिर्फ हमारी नहीं, पूरी दुनिया की है।
एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं? और छोटे निवेशकों की क्या प्रतिक्रिया है?
मार्केट के जानकारों का मानना है कि अगर ट्रंप सच में अपनी टैरिफ नीति लागू कर देते हैं, तो ग्लोबल ट्रेड और इकोनॉमी पर भूचाल आ सकता है। एक वरिष्ठ एनालिस्ट ने मुझे बताया, “1987 के ब्लैक मंडे और आज की स्थितियों में काफी समानताएं दिख रही हैं।” छोटे निवेशक तो बिल्कुल घबरा गए हैं – खासकर वो जिन्हें 1987 की तबाही याद है। हैरानी की बात ये है कि अभी तक भारत सरकार या वित्त मंत्रालय की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। क्या वाकई स्थिति इतनी गंभीर नहीं है, या फिर वो लोग कुछ प्लान कर रहे हैं?
आगे क्या होगा? और आपको क्या करना चाहिए?
अगले कुछ दिनों में बाजार किधर जाएगा, यह पूरी तरह ट्रंप की नीतियों पर निर्भर करेगा। अगर यह अनिश्चितता बनी रही, तो और गिरावट आ सकती है। RBI और SEBI जैसी संस्थाएं शायद बाजार को स्थिर करने के लिए कुछ कदम उठाएं। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि निवेशकों को अगले कुछ दिनों में बाजार पर नजर रखनी चाहिए और जोखिम से बचने के उपाय करने चाहिए। मेरी निजी राय? जल्दबाजी में कोई फैसला न लें। थोड़ा इंतजार करें, स्थिति स्पष्ट होने दें।
अंत में बस इतना कहूंगा – ट्रंप की टैरिफ नीति और वैश्विक आर्थिक हालात के बीच भारतीय शेयर बाजार अभी बहुत नाजुक दौर से गुजर रहा है। निवेशकों की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। आने वाले दिनों में क्या होगा? वक्त ही बताएगा। लेकिन एक बात याद रखिए – बाजार हमेशा उतार-चढ़ाव से भरा रहता है। घबराने की नहीं, समझदारी से काम लेने की जरूरत है।
अब देखिए, ट्रंप के टैरिफ ने तो निवेशकों को हिला कर रख दिया है। बाजार में उथल-पुथल मची हुई है, और डर का माहौल भी। लेकिन क्या यह 1987 जैसी बड़ी गिरावट का कारण बनेगा? ईमानदारी से कहूं तो, अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
असल में, सारा खेल Market की गतिशीलता और Global Economy की सेहत पर निर्भर करता है। यह किस तरफ मुड़ेगा, कोई नहीं जानता। मेरा मानना है? अभी के लिए तो बस इतना – निवेशकों को सिर्फ सतर्क ही नहीं, बल्कि थोड़ा धैर्य भी रखना चाहिए। Long-term Strategy पर फोकस करो, बाकी सब ठीक हो जाएगा। वैसे भी, बाजार तो उतार-चढ़ाव का ही नाम है न?
ट्रंप का टैरिफ और शेयर बाजार – जानिए क्या हो सकता है आपके पैसों का हाल?
1. ट्रंप का टैरिफ – ये चीज़ है क्या बला? और हमारे शेयर बाजार को क्यों परेशान कर रही है?
देखिए, Trump’s Tariff वो जानलेवा टैक्स है जो अमेरिका ने दूसरे देशों के माल पर लगा रखा है। अब सवाल ये है कि अगर ये टैरिफ पूरी तरह लागू हो गया तो? तो भाई, global trade तो डगमगाएगा ही, साथ ही शेयर बाजार भी लुढ़क सकता है। 1987 वाली बात याद है न? उससे भी बुरा हाल हो सकता है… या फिर नहीं भी। कंफ्यूजिंग है न?
2. सच बताएं – क्या 1987 जैसा Black Monday फिर से आ सकता है?
अरे भई, Black Monday तो वो दिन था जब Dow Jones ने 22% की छलांग लगाई थी… नीचे की तरफ! लेकिन ईमानदारी से कहूं तो आज के market conditions बिल्कुल अलग हैं। Regulations भी बदल गए हैं। पर एक बात तो सच है – ट्रंप के ये टैरिफ और global tensions मिलकर short-term में बाजार को झटका दे सकते हैं। पूरी तरह 1987 जैसा तो शायद न हो, लेकिन निवेशकों को चौकन्ना तो रहना ही पड़ेगा।
3. पैनिक नहीं, समझदारी बरतें – निवेशकों के लिए सलाह
सुनो यार, अगर आपने अपने पैसे बाजार में लगा रखे हैं तो सबसे पहले गहरी सांस लो। घबराने से कुछ नहीं होगा। मेरा सुझाव? तीन मंत्र: Diversification (यानी अंडे एक टोकरी में न रखें), long-term investing (भागो मत, टिके रहो), और risk management (बचाव के उपाय ज़रूर करें)। और हां, किसी अच्छे financial expert से बात ज़रूर करें।
4. क्या भारतीय बाजार भी इस झटके को झेलेगा?
असल में देखा जाए तो global markets का असर हमारे Sensex और Nifty पर भी पड़ता है। खासकर IT, Pharma और export वाले sectors तो सीधे प्रभावित होंगे। लेकिन एक अच्छी खबर – अगर हमारी domestic economy मजबूत रही तो ये झटका कुछ हद तक कम हो सकता है। फिर भी… नज़र तो रखनी ही पड़ेगी।
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