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अनाथालय से लंदन तक: भगत सिंह के शागिर्द वीर सपूत उधम सिंह का अद्भुत संघर्ष

अनाथालय से लंदन तक: भगत सिंह के शागिर्द उधम सिंह की वो कहानी जो आपको रोंगटे खड़े कर देगी

आज उधम सिंह की पुण्यतिथि है। नहीं, नहीं… बस औपचारिकता के लिए याद करने वाली बात नहीं है ये। सोचिए, एक आम सा अनाथ बच्चा जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींद उड़ा दी! जलियांवाला बाग के बाद उन्होंने जो किया, वो सिर्फ बदला नहीं था… पूरे भारत के दर्द का जवाब था। और हां, माइकल ओ’ड्वायर को लंदन में ठिकाने लगाने वाली ये कहानी आपको गर्व से भर देगी।

वो अनाथालय वाला बच्चा जिसने इतिहास बदल दिया

26 दिसंबर 1899… पंजाब के संगरूर में जन्मे इस बच्चे का नाम तब शेर सिंह था। माता-पिता का साया छिना तो नाम भी छिन गया – अनाथालय में उधम सिंह बन गए। असल में, जिंदगी ने इन्हें बचपन से ही टेस्ट करना शुरू कर दिया था। लेकिन है ना कमाल की बात? जहां आम लोग टूट जाते, वहां ये और मजबूत होते गए।

अब 1919 का वो दिन याद कीजिए… जलियांवाला बाग। गोलियां चलीं, खून बहा, और उधम सिंह के दिल में आग लग गई। सच कहूं तो ये वो पल था जब एक अनाथ बच्चे ने फैसला कर लिया – अब बस एक ही मकसद है। भगत सिंह से प्रेरणा लेकर ये नौजवान आगे क्या करेगा, ये तो अभी आने वाला है!

लंदन में वो गोली जिसने इतिहास रच दिया

13 मार्च 1940… कैक्सटन हॉल। माइकल ओ’ड्वायर बैठा है और उधम सिंह का हाथ पिस्तौल पर। बस दो गोलियां… पर वो क्या गोलियां थीं भाई! पूरे 21 साल के इंतजार का बदला। अंग्रेज हैरान – ये हिंदुस्तानी कहां से आ गया? फांसी तो हुई 31 जुलाई को, पर सच बात तो ये है कि उस दिन उधम सिंह नहीं, अंग्रेजी साम्राज्य की हार हुई थी। और 1975 में जब उनकी अस्थियां भारत आईं, तो लगा जैसे वो पूरा हुआ वादा…

आज क्या कह रहा है देश?

ट्विटर पर #UdhamSingh ट्रेंड कर रहा है। मोदी जी ने ट्वीट किया है, इतिहासकार अपनी-अपनी राय दे रहे हैं। पर असल सवाल तो ये है – क्या हम सच में समझ पा रहे हैं उनके बलिदान को? जब पंजाब के किसी स्कूल में बच्चे उधम सिंह पर निबंध लिखते हैं, तब लगता है कि उनकी आग अभी बुझी नहीं है।

क्या हो रहा है आगे?

संगरूर में स्मारक बनेगा… बढ़िया बात है! फिल्म बन रही है… और भी अच्छा। पर मेरा मानना है कि उधम सिंह की सबसे बड़ी विरासत तो ये है कि वो हमें सिखाते हैं – हैसियत नहीं, हौसला मायने रखता है। एक अनाथ बच्चा जो दुनिया के सबसे ताकतवर साम्राज्य को चुनौती दे सकता है, ये सोचने वाली बात है ना?

आज जब हम आजाद घूम रहे हैं, कभी-कभी उधम सिंह जैसे लोगों को याद कर लेना चाहिए। वैसे भी, जिन्होंने हमारे लिए अपनी जान दी, उनका तो ये हक बनता है ना? सच कहूं तो, जब तक भारत रहेगा, उधम सिंह की कहानी लोगों को झकझोरती रहेगी। और होना भी यही चाहिए!

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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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