UK के फाइनेंसियल रेगुलेटर में हंगामा: कर्मचारी ऑफिस आने के नए नियमों से नाराज!
अब ये क्या हो रहा है? UK का Financial Conduct Authority (FCA) – जो बैंकों और फाइनेंस कंपनियों पर नजर रखता है – आजकल खबरों में है। वजह? कर्मचारी मैनेजमेंट के नए ऑफिस आने के नियमों से बिल्कुल खुश नहीं हैं। असल में, एक यूनियन सर्वे में पता चला कि 90% से ज्यादा कर्मचारी हड़ताल तक करने को तैयार हैं अगर उनके work-from-home (WFH) के अधिकार छीने गए। कोरोना के बाद की दुनिया में ये बहस नई नहीं है, लेकिन FCA का केस कुछ ज्यादा ही दिलचस्प होता जा रहा है।
पूरा माजरा क्या है?
देखिए, FCA वो संस्था है जो UK में सारे बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों पर नजर रखती है। कोविड के दौरान, जैसे सबने किया, FCA ने भी कर्मचारियों को घर से काम करने दिया। अब तीन साल बाद जब सब कुछ नॉर्मल हो गया, मैनेजमेंट ने कहा – “अब ऑफिस आना बढ़ाओ।” और यहीं से शुरू हुआ तूफान! कर्मचारियों को लगा कि ये तो उनके सुकून पर हमला है। सच कहूं तो, मैं समझ सकता हूं दोनों पक्षों की मजबूरियां… लेकिन अब ये विवाद बड़ा रूप ले रहा है।
आखिर क्यों हो रही है इतनी बवाल?
यूनियन का सर्वे तो कहता है कि 90% कर्मचारी हड़ताल करने को तैयार हैं – ये कोई मामूली बात नहीं! FCA का कहना है कि ऑफिस में साथ बैठकर काम करने से टीमवर्क अच्छा होगा। माना, ये बात भी ठीक है। पर कर्मचारियों का साइड? उनका कहना है कि WFH से उनका work-life balance पहले से कहीं बेहतर हुआ है। ट्रैवल का समय और पैसा बच रहा है। और हैरानी की बात – वो ज्यादा अच्छा परफॉर्म भी कर रहे हैं! तो सवाल ये है कि किसकी बात सही है?
कौन क्या कह रहा है?
यूनियन वाले तो बिल्कुल गरमा गए हैं – “ये तो हमारे अधिकारों के साथ खिलवाड़ है! हम हड़ताल से लेकर हर विकल्प पर विचार कर रहे हैं।” वहीं FCA का बयान थोड़ा सॉफ्ट है – “हम कर्मचारियों की बात समझते हैं, लेकिन कंपनी के लॉन्ग टर्म फायदे भी तो देखने होंगे।” एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि ये सिर्फ FCA की नहीं, पूरी दुनिया की समस्या है। कोरोना के बाद कंपनियां ऑफिस और WFH के बीच बैलेंस ढूंढ रही हैं। मुश्किल काम है!
आगे क्या होगा?
अभी तो बस बातचीत चल रही है। लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो हड़ताल तक की नौबत आ सकती है। असल में, ये केस सिर्फ FCA तक सीमित नहीं रहेगा। UK की दूसरी कंपनियां भी इसे करीब से देख रही हैं। एक बात तो तय है – आने वाले समय में ऑफिस और WFH का बैलेंस हर कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। FCA का ये विवाद शायद भविष्य की वर्क कल्चर को डिफाइन करने वाला पहला बड़ा केस बन जाए। क्या आपको नहीं लगता?
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FCA के नए ऑफिस नियम: क्या बदला, क्यों हो रही है बहस?
देखिए, FCA ने हाल में एक नया ऑर्डर जारी किया है – अब कर्मचारियों को हफ्ते में 2 दिन की जगह 3 दिन ऑफिस आना होगा। सीधी सी बात है न? पर असल मसला यह है कि लोग WFH के इस दौर में flexible option से हाथ धोना नहीं चाहते। और समझ भी आता है – एक तरफ तो productivity बढ़ी है, दूसरी तरफ work-life balance भी मिला है।
कर्मचारियों का गुस्सा: सिर्फ बातें नहीं, अब action की तैयारी!
अब यहाँ मजेदार बात यह है कि कर्मचारियों ने सिर्फ मुंह नहीं बनाया है। यूनियन के जरिए पूरा विरोध दर्ज कराया है, और strike तक की बात चल रही है! उनका कहना है कि “भई, जब WFH में काम बेहतर हो रहा था, तो यह नया rule थोपने की क्या जरूरत थी?” सच कहूँ तो, उनकी बात में दम तो है।
क्या यह सिर्फ FCA की ही मुसीबत है या पूरे UK में चल रहा है यह तमाशा?
अभी तो यह नियम सिर्फ Financial Conduct Authority (FCA) के लिए है। लेकिन… और यहाँ एक बड़ा ‘लेकिन’ आता है… पूरे UK में companies धीरे-धीरे employees को ऑफिस वापस बुला रही हैं। यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक बड़े trend का हिस्सा है। है न मजेदार?
समाधान क्या हो सकता है? WFH बनाम ऑफिस की जंग में शांति संधि!
अब सवाल यह उठता है कि इस झगड़े का हल क्या हो? Experts की राय है कि hybrid model ही सबसे बढ़िया रास्ता हो सकता है। मतलब कि flexibility और office presence के बीच एक balance। ऐसा करने से दोनों पार्टियों को मनचाही चीज़ मिल जाएगी – employers को employee visibility मिलेगी, और employees को थोड़ी freedom। एकदम win-win situation! क्या आपको नहीं लगता?
Source: Financial Times – Work & Careers | Secondary News Source: Pulsivic.com