ब्रिटेन vs फ्रांस: AMCA के लिए इंजन ड्रामा – कौन जीतेगा भारत का भरोसा?
अरे भाई, क्या आपको पता है भारत का सुपर सीक्रेट स्टील्थ फाइटर जेट AMCA अब एक बड़े मोड़ पर पहुंच गया है? सरकार ने DRDO को हिदायत दे दी है कि या तो ब्रिटेन की Rolls-Royce के साथ हाथ मिलाओ, या फिर फ्रांस की Safran को चुनो। असल में बात ये है कि हमें एक ऐसा इंजन चाहिए जो न सिर्फ 110 kN थ्रस्ट दे, बल्कि टेक्नोलॉजी भी ट्रांसफर करे। मतलब साफ है – अब हमें सिर्फ खरीदार नहीं, बल्कि मास्टर बनना है!
पीछे की कहानी: इंजनों का सफर
देखिए, हमारे पास TEJAS है, राफेल है, लेकिन AMCA तो हमारा अपना 5वीं पीढ़ी का बच्चा है ना? पर समस्या ये है कि अब तक हम इंजन के मामले में विदेशी कंपनियों के आगे हाथ फैलाते रहे हैं। General Electric से लेकर Safran तक – सबके सामने गिड़गिड़ाए हैं। लेकिन अब मोदी सरकार का साफ मैसेज है: “टेक्नोलॉजी चाहिए, सिर्फ प्रोडक्ट नहीं!”
मजे की बात ये कि दोनों कंपनियां हमारे साथ पहले से जुड़ी हुई हैं। Rolls-Royce TEJAS MK-2 में हाथ बंटा रही है, तो Safran ने कावेरी इंजन प्रोजेक्ट में अपनी एक्सपर्टीज दिखाई है। तो सवाल ये उठता है – किसे चुना जाए? ब्रिटिश क्लास या फ्रेंच फ्लेवर?
अपडेट्स: क्या-क्या हो रहा है?
डिटेल्स पर आते हैं। DRDO को मिला क्लियर मिशन – 110 kN वाला इंजन बनाना है, और वो भी ऐसा कि आगे चलकर हम खुद बना सकें। थोड़ा चालाकी भरा प्लान है – पहले दो स्क्वाड्रन तो विदेशी इंजन से चलेंगे, लेकिन फिर धीरे-धीरे हम अपना खुद का इंजन फिट करेंगे। एक तरह से ट्रेनिंग व्हील्स लगाकर साइकिल चलाना सीखने जैसा है। स्मार्ट न?
हालांकि यहां एक छोटी सी चिंता भी है। क्या ये कंपनियां वाकई अपनी पूरी टेक्नोलॉजी शेयर करेंगी? वैसे DRDO वाले कॉन्फिडेंट लग रहे हैं। उनका कहना है कि ये सिर्फ शुरुआत है, आगे तो हमें खुद ही सब कुछ बनाना है।
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं?
कुछ डिफेंस एक्सपर्ट्स तो इस फैसले पर झूम रहे हैं। उनका कहना है कि ये ‘Make in India’ को असली मतलब देगा। पर कुछ लोगों को शक है – “ये फिरंगी कंपनियां अपने सीक्रेट्स कभी नहीं बतातीं!” सच कहूं तो दोनों तरफ के तर्क समझ आते हैं।
DRDO के एक बाबू ने ऑफ द रिकॉर्ड बताया – “भई, रातोंरात तो हम इंजन बनाना नहीं सीख सकते। पहले थोड़ी ट्रेनिंग तो लेनी पड़ेगी न?” मैंने कहा – बिल्कुल सही बात!
आगे का गेम प्लान
अगले कुछ महीनों में DRDO और चुनी हुई कंपनी के बीच डील फाइनल होगी। अगर सब कुछ ठीक रहा तो 2027-28 तक हम AMCA का पहला प्रोटोटाइप आसमान में देख सकते हैं। कल्पना कीजिए – पूरी तरह भारतीय स्टील्थ फाइटर! सच में गर्व की बात होगी।
और यहीं नहीं रुकना है। एक बार हमें इंजन बनाना आ गया तो फिर तो हम दूसरे देशों को भी बेच सकते हैं। चीन और पाकिस्तान वालों की नींद उड़ जाएगी!
अंत में मेरी निजी राय: ये फैसला बिल्कुल सही दिशा में है। हां, थोड़ा रिस्क जरूर है। पर जैसा कि हमारे दादाजी कहते थे – “अंडे तोड़े बिना ऑमलेट नहीं बनता!” बस सही पार्टनर चुनना होगा, बाकी तो हमारे वैज्ञानिक और इंजीनियर कमाल कर देंगे। क्या आपको नहीं लगता?
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AMCA स्टील्थ फाइटर जेट का इंजन DRAMA – जानिए क्या हो रहा है असल में?
1. Rolls-Royce vs Safran – कौन सा इंजन लेगा AMCA का टिकट?
देखिए, ये पूरा मामला बिल्कुल वैसा ही है जैसे आपको दो शानदार गाड़ियों में से एक चुनना हो – एक power के लिए बेस्ट, दूसरी mileage के लिए। Rolls-Royce का इंजन? जबरदस्त thrust देता है और नाम ही काफी है। पर Safran ने तो technology में कुछ ऐसी चीज़ें डाली हैं कि पूछो मत। अब DRDO वालों की मुश्किल समझ सकते हैं न? दोनों के फायदे-नुकसान पर बारीकी से काम चल रहा है।
2. क्या हमारा अपना Kaveri इंजन AMCA को उड़ा पाएगा?
सच कहूं तो? अभी नहीं। हां, DRDO और GTRE मिलकर Kaveri पर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। पर जैसे अभी नए ड्राइवर को F1 रेस में नहीं फेंकते, वैसे ही हमें थोड़ा इंतज़ार करना होगा। Short-term में विदेशी इंजन लेना practical लगता है, पर मन में तो यही है कि एक दिन हमारा अपना इंजन ही AMCA को power देगा।
3. इंजन का फैसला? अरे भई, इतना जल्दी थोड़े होने वाला!
2024-25 तक का समय लगेगा। समझिए न, ये कोई Flipkart का ऑर्डर तो है नहीं जो next day delivery हो जाए! Technical evaluations, performance tests, negotiations – ये सब तो होना ही है। Experts की मानें तो अभी टीमें पूरी तरह जुटी हुई हैं।
4. विदेशी इंजन = Make in India को ठेस? बिल्कुल नहीं!
अरे नहीं भई! चाहे इंजन किसी का भी हो, असली मज़ा तो तब आएगा जब वो हमारे यहाँ बनेगा। Manufacturing से लेकर assembly तक सब भारत में ही। और सबसे बढ़िया बात? Technology transfer का game changer फैक्टर। मतलब साफ है – हम सीखेंगे, बढ़ेंगे, और एक दिन पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेंगे।
क्या आपको लगता है हमें जल्दबाजी में फैसला करना चाहिए? या फिर patience के साथ सही विकल्प का इंतज़ार करना चाहिए? कमेंट में बताइए!
Source: Navbharat Times – Default | Secondary News Source: Pulsivic.com