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कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ने हेज फंड्स से निवेश वापस लेते हुए जड़ से काटी आलोचना!

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कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी ने हेज फंड्स को कहा ‘ना’ – और पूरी इंडस्ट्री हिल गई!

अरे भाई, निवेश की दुनिया में तूफान आ गया है! University of California ने अपने एंडोमेंट फंड से हेज फंड्स में निवेश वापस लेने का ऐसा फैसला किया है कि वॉल स्ट्रीट के होश उड़ गए। असल में, उनके CIO जगदीप सिंह ने तो साफ-साफ कह दिया – “अगर हमने सीधे-सादे स्टॉक्स और बॉन्ड्स में पैसा लगाया होता, तो ये सारी झंझट ही नहीं होती।” सुनकर लगता है न कि कोई बड़ा बदलाव आने वाला है?

अब थोड़ा पीछे चलते हैं। देखिए, यूसी का ये एंडोमेंट फंड कोई छोटा-मोटा नहीं है – $150 बिलियन से भी ज्यादा का है भई! पिछले 10 साल से वो हेज फंड्स में पैसा डाल रहे थे, सोचा था कि मोटा रिटर्न मिलेगा। लेकिन हाल के सालों में? S&P 500 जैसे इंडेक्स ने जहां बढ़िया परफॉर्म किया, वहीं हेज फंड्स पीछे रह गए। और यहीं से शुरू हुई असली मुसीबत।

अब ताजा क्या है? यूनिवर्सिटी ने हेज फंड्स से $4 बिलियन से ज्यादा की रकम निकाल ली है। जगदीप सिंह ने बताया कि हेज फंड्स की उलझी हुई फीस स्ट्रक्चर और मामूली रिटर्न ने उन्हें ये कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। अब उनकी योजना क्या है? सीधी-सपाट बात – वो अब स्टॉक्स और बॉन्ड्स जैसे पारंपरिक ऑप्शन्स पर फोकस करेंगे। ज्यादा पारदर्शी, कम रिस्क वाले। समझ में आया न?

इस फैसले पर रिएक्शन? मिली-जुली। कुछ एक्सपर्ट्स ताली बजा रहे हैं, कह रहे हैं कि हेज फंड्स अब छोटे निवेशकों के लिए भी फायदेमंद नहीं रहे। वहीं दूसरी तरफ, हेज फंड वालों का कहना है कि ये जल्दबाजी का फैसला है – “लॉन्ग टर्म में हम बेहतर करेंगे” वाली बातें। पर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स खुश हैं – अब रिसर्च और स्टूडेंट फैसिलिटीज पर ज्यादा पैसा खर्च होगा।

तो अब सवाल यह है कि आगे क्या? देखिए, यूसी का ये मूव दूसरे बड़े एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स के लिए एक तरह का ट्रेंड सेट कर सकता है। हेज फंड इंडस्ट्री को अब अपनी फीस स्ट्रक्चर और ट्रांसपेरेंसी पर सोचना होगा। वरना तो… खैर, आप समझ गए होंगे।

आखिर में क्या कहें? कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी का ये फैसला सिर्फ एक निवेश निर्णय नहीं है – ये एक मैसेज है। हेज फंड्स के मॉडल पर सवाल, और शायद आने वाले समय में बड़े बदलावों का संकेत। क्या आपको नहीं लगता कि ये सिर्फ शुरुआत है?

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कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी का यह फैसला सुनकर मन में एक सवाल उठता है – क्या पैसा ही सब कुछ नहीं होता? देखा जाए तो यह सिर्फ हेज फंड्स को ना कहने की बात नहीं है, बल्कि एक बड़ा स्टेटमेंट है। जब बड़े संस्थान ऐसे कदम उठाते हैं, तो असल में वे यह कह रहे होते हैं कि “भाई, ethics और सामाजिक ज़िम्मेदारी, profits से ऊपर हैं।”

और सच कहूं तो यह एक तरह की चेन रिएक्शन शुरू कर सकता है। जब एक बड़ा नाम ऐसा करेगा, तो दूसरे भी सोचेंगे – “अरे, हम क्यों पीछे रहें?” लेकिन यहां सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है। इसके पीछे एक ठोस सोच है।

अब देखना यह है कि दूसरे educational institutes इससे प्रेरणा लेते हैं या नहीं। मेरा मानना है कि… लीक से हटकर सोचने का यह सही समय है। इस पर और डिटेल्स के लिए बने रहिए हमारे साथ – क्योंकि यह स्टोरी अभी बस शुरू हुई है!

(Note: I’ve retained the original

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Source: Financial Times – Companies | Secondary News Source: Pulsivic.com

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