अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ ट्रूस का खेल: अब क्या होगा?
क्या आपने कभी दो पड़ोसियों को छोटी-छोटी बातों पर लड़ते देखा है? जहां एक दिन तकिया फेंकने की बात हो, तो अगले दिन पानी की टंकी पर झगड़ा? अमेरिका और चीन का यह टैरिफ वाला झगड़ा कुछ ऐसा ही है, बस स्केल थोड़ा… बहुत बड़ा है। अभी-अभी खबर आई है कि दोनों देशों ने इस ‘टैरिफ ट्रूस’ को आगे बढ़ाने पर बातचीत जारी रखने का फैसला किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने तो यहां तक कह दिया कि वार्ता चलती रहेगी, लेकिन आखिरी फैसला तो ट्रंप साहब का ही होगा। और समय कम है – बस 14 दिन!
असल में यह पूरा मामला 2018 से चल रहा है, जब अमेरिका ने चीन के सामानों पर भारी-भरकम टैरिफ लगा दिए। चीन ने भी कमाल दिखाया – उसने अमेरिकी उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगा दिए। 2020 में थोड़ी शांति हुई जब ‘फेज वन’ डील हुई, पर असली मसले तो वैसे ही पड़े रहे। अब तक की कहानी तो यही है कि दोनों टैरिफ ट्रूस को बचाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि अर्थव्यवस्था को ज्यादा झटका न लगे। समझदारी की बात है, है न?
ताजा अपडेट क्या कहता है? दोनों देश बातचीत कर रहे हैं, पर चीन ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। अमेरिकी उद्योग जगत तो लगातार चेतावनी दे रहा है – “ट्रूस बढ़ाओ, नहीं तो व्यापार युद्ध फिर शुरू!” चीन का विदेश मंत्रालय भी ‘निर्माणात्मक वार्ता’ की बात कर रहा है। विशेषज्ञों की चिंता समझ आती है – जब दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं आपस में भिड़ती हैं, तो पूरी दुनिया का पेट दुखता है।
तो अब सवाल यह है कि आगे क्या? अगले दो हफ्ते निर्णायक होंगे। अगर ट्रूस बढ़ा, तो शायद रिश्तों में सुधार की गुंजाइश बने। नहीं तो… टैरिफ का तूफान आ सकता है। और इस पूरे खेल में ट्रंप जी का फैसला सबसे अहम होगा। सच कहूं तो, यह मामला सिर्फ इन दो देशों तक सीमित नहीं – पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींद इस पर निर्भर है। तो क्या आप तैयार हैं इस ड्रामे के अगले एपिसोड के लिए? क्योंकि मैं तो बिल्कुल तैयार हूं!
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अमेरिका-चीन टैरिफ ट्रूस एक्सटेंशन: समझिए पूरा मामला आसान भाषा में
1. अरे भाई, ये टैरिफ ट्रूस एक्सटेंशन आखिर है क्या चीज़?
सीधे शब्दों में कहें तो, अमेरिका और चीन ने एक तरह की ‘ठहराव की छुट्टी’ ले ली है। मतलब? नए टैरिफ (import duties) लगाने पर रोक, और पुराने टैरिफ को लेकर भी ‘अभी नहीं, बाद में देखेंगे’ वाली स्थिति। दोनों देशों ने trade war को थोड़ा ठंडा करने के लिए बातचीत जारी रखने का फैसला किया है। पर सवाल ये है कि क्या ये सच में कोई समाधान है, या सिर्फ समय की बचत?
2. ये ‘छुट्टी’ कब तक चलेगी? कोई डेडलाइन तो होगी!
अभी तक तो official announcement का इंतज़ार जारी है। मगर जो खबरें आ रही हैं, उनके मुताबिक ये ट्रूस कुछ महीनों के लिए extend किया गया है। असल में, दोनों पक्षों को लगता है कि और वक्त मिल जाए तो शायद कोई रास्ता निकल आए। पर मेरा मानना है – ये तो वही बात हुई कि ‘कल करे सो आज कर…’ वाली कहावत का उल्टा संस्करण!
3. भारत समेत दुनिया की economy पर क्या असर पड़ेगा?
देखिए, जब दो हाथी लड़ते हैं, तो घास तो ज़रूर रौंदी जाती है। अमेरिका और चीन के बीच trade tensions कम होने से global market को थोड़ी राहत मिलेगी, ये तो तय है। भारत के लिए? अच्छी खबर ये कि international trade में थोड़ी stability आएगी। Supply chain disruptions कम होंगे। लेकिन… हमेशा एक लेकिन होता है न? अगर ये ट्रूस टूटा तो उल्टा असर भी पड़ सकता है।
4. क्या इस बार कोई permanent deal हो पाएगा? सच-सच बताइए!
ईमानदारी से कहूं तो… मुश्किल लगता है। Experts भी यही कह रहे हैं। दरअसल, दोनों देशों के बीच मतभेद इतने गहरे हैं कि ये ट्रूस सिर्फ एक ‘प्लास्टर’ की तरह है। हालांकि, ये एक positive step ज़रूर है। Future में कुछ भी हो सकता है – शायद कोई समझौता, या फिर वही ढाक के तीन पात। समय ही बताएगा!
Source: Livemint – Markets | Secondary News Source: Pulsivic.com