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अमेरिका का टैरिफ कैसे बन सकता है भारत के लिए ब्रह्मास्त्र? एक्सपर्ट विश्लेषण

अमेरिका का टैरिफ: क्या यह भारत के लिए ब्रह्मास्त्र बन सकता है?

अरे भाई, अमेरिका ने तो हाल ही में एक बम गिरा दिया है! भारत समेत कई देशों पर आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ाने की घोषणा करके उन्होंने हमारी अर्थव्यवस्था को झटका देने की कोशिश की है। अब सवाल यह है कि यह कदम हमारे लिए कितना नुकसानदेह होगा? खासकर उन भारतीय निर्यातकों के लिए जो अमेरिका को स्टील, एल्युमिनियम और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई करते हैं। एक्सपर्ट्स की मानें तो यह फैसला भारत-अमेरिका के व्यापार रिश्तों में खटास तो लाएगा ही, साथ ही हमारी GDP ग्रोथ को भी ठेस पहुंचा सकता है।

असली माजरा क्या है? रूसी तेल का खेल!

देखिए, इस पूरे टैरिफ ड्रामा की जड़ में है हमारा रूस से तेल खरीदना। सच कहूं तो पिछले कुछ सालों से भारत रूस से सस्ता तेल लेकर सालाना 8-10 अरब डॉलर बचा रहा था। लेकिन अमेरिका को यह बिल्कुल पसंद नहीं आया, खासकर रूस-यूक्रेन वॉर के बाद तो वे लगातार हम पर दबाव बना रहे थे। पर हमने अपने फायदे को प्राथमिकता दी – और अब शायद इसी का नतीजा है यह टैरिफ वाली चाल।

किस-किस को लगेगा झटका?

अगर सीधे शब्दों में कहें तो सबसे बड़ा धक्का लगेगा हमारे स्टील और एल्युमिनियम वालों को। ये दोनों सेक्टर अमेरिका को हर साल अरबों डॉलर का सामान भेजते हैं। और हां, इलेक्ट्रॉनिक्स वालों की भी छुट्टी होने वाली है – खासकर मोबाइल फोन और कंप्यूटर पार्ट्स बनाने वालों की। टैरिफ लगा तो हमारे प्रोडक्ट्स की कीमत अमेरिका में बढ़ जाएगी, और फिर कौन खरीदेगा हमारा माल? प्रतिस्पर्धा तो पहले ही कमजोर होगी ना!

सरकार और बिजनेस वालों की क्या राय?

सरकार वालों ने अभी तक बड़ी सूझबूझ वाली बातें की हैं। वाणिज्य मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी ने कहा है कि “हम अमेरिका से बातचीत करेंगे”। लेकिन असली चिंता तो उद्योग जगत की है। CII के एक प्रवक्ता ने सही कहा – “यह टैरिफ छोटे और मझोले उद्योगों (SMEs) के लिए तबाही लाएगा, और नौकरियां भी जा सकती हैं।” सच कहूं तो यह स्थिति बिल्कुल भी अच्छी नहीं है।

आगे का रास्ता क्या हो सकता है?

अब सवाल यह कि हम क्या कर सकते हैं? एक्सपर्ट्स के मुताबिक तीन रास्ते हैं:
1. अमेरिका से बात करके टैरिफ में छूट मांगना (पर यह आसान नहीं)
2. यूरोप और मिडिल ईस्ट जैसे नए मार्केट ढूंढना
3. और सबसे जरूरी – अपने घरेलू उत्पादन को मजबूत करना

कुछ अर्थशास्त्रियों का तो यहां तक कहना है कि यह संकट वरदान भी साबित हो सकता है। अगर हम अपने एक्सपोर्ट को डायवर्सिफाई करें और हाई क्वालिटी प्रोडक्ट्स बनाने पर फोकस करें, तो लंबे समय में अमेरिका पर निर्भरता कम हो सकती है। साथ ही, लोकल मार्केट को बढ़ावा देने से भी फायदा होगा।

आखिर में, यह पूरा मामला दिखाता है कि आज के ग्लोबलाइज्ड वर्ल्ड में एक देश का फैसला दूसरे को कैसे प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए यह समय स्मार्ट पॉलिसी बनाने और लॉन्ग टर्म स्ट्रैटेजी पर काम करने का है। वैसे भी, हम भारतीयों ने मुश्किल वक्त में हमेशा अपना जलवा दिखाया है, है ना?

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Source: News18 Hindi – Nation | Secondary News Source: Pulsivic.com

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