उत्तरकाशी में धराली का दर्द: बादल फटा, तबाही छाई, 4 की मौत और 50 लापता – PM मोदी ने CM धामी से बात की
मंगलवार की दोपहर… वो दोपहर जिसने उत्तराखंड के उत्तरकाशी को हिलाकर रख दिया। धराली गांव में बादल फटने और फिर भूस्खलन की जो तस्वीर सामने आई, वो किसी को भी सिहरा दे। अभी तक 4 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन असली डर तो 50 से ज्यादा लापता लोगों को लेकर है। सोचिए, एक पल में पूरा गांव पानी और मलबे के सैलाब में तब्दील हो गया। अब NDRF, SDRF वालों की टीमें रात-दिन एक किए हुए हैं, पर स्थिति अभी भी गंभीर है।
असल में देखा जाए तो उत्तरकाशी का ये इलाका प्रकृति के कहर के आगे हमेशा से कमजोर रहा है। धराली तो अलकनंदा नदी के किनारे बसा है – जहां बाढ़ और भूस्खलन का खतरा रहता ही है। लेकिन सच तो ये है कि पिछले कुछ सालों में जलवायु परिवर्तन और बेतरतीब निर्माण ने मुसीबतों को दोगुना कर दिया है। विशेषज्ञ कह रहे हैं – ये कोई एक्सीडेंट नहीं, बल्कि प्रकृति का हमें दिया हुआ एक सबक है।
अभी की स्थिति? बेहद डरावनी। 4 शव मिल चुके हैं, लेकिन 50 से ज्यादा लोगों का कोई अता-पता नहीं। communication network पूरी तरह ठप है, कई घर मलबे में दबे हुए हैं। PM मोदी ने CM धामी से बात की है और राहत कार्यों को तेज करने के निर्देश दिए हैं। पर सवाल ये है कि क्या ये काफी है? जब तक हम पर्यावरण के साथ खिलवाड़ बंद नहीं करेंगे, ऐसी त्रासदियां रुकने वाली नहीं।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तो आईं – CM धामी ने पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होने का वादा किया है। लेकिन स्थानीय लोगों की आवाज सुनिए: “एक पल में सब कुछ बह गया… हमारे अपने अभी भी गायब हैं।” पर्यावरणविदों की चेतावनी साफ है – उत्तराखंड में ऐसी घटनाएं बढ़ती जाएंगी अगर हमने अभी नहीं संभला।
अब आगे क्या? राहत कार्य तेज किए जाएंगे, लापता लोगों की तलाश जारी रहेगी। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे में और बारिश की चेतावनी दी है – जो स्थिति को और बिगाड़ सकती है। सरकार disaster management की नई policies बना रही है… पर क्या ये नीतियां जमीन पर उतर पाएंगी? वक्त ही बताएगा। फिलहाल तो प्रार्थना करें कि जो लापता हैं, वो सुरक्षित मिल जाएं।
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Source: Aaj Tak – Home | Secondary News Source: Pulsivic.com