2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: क्या पहचान की राजनीति हावी होगी?
अरे भाई, पश्चिम बंगाल की राजनीति तो इन दिनों गर्मागर्म चर्चा का विषय बनी हुई है। 2026 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक दलों की तैयारियाँ देखकर लगता है जैसे कल ही वोटिंग होने वाली है! सच कहूँ तो, इस बार Identity Politics का खेल बिल्कुल अलग लेवल पर खेला जा रहा है। TMC, BJP और वामदल – सबके सब जाति, धर्म और ‘बंगाली अस्मिता’ के नाम पर वोट बटोरने में जुट गए हैं। असल में, यह सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे राज्य की सांस्कृतिक पहचान को लेकर एक तरह का युद्ध है। और हम सब इसके गवाह बन रहे हैं।
इतिहास से सबक: बंगाल की राजनीति का सफर
देखिए न, बंगाल में पहचान की राजनीति तो कोई नई बात नहीं। भाषा आंदोलन के दिनों से लेकर वामपंथी शासन तक – यहाँ की राजनीति में ‘हम कौन हैं’ का सवाल हमेशा मायने रखता आया है। 2021 के चुनावों में तो TMC ने BJP को ‘बाहरी’ बताकर बंगाली अस्मिता का जादू चला दिया था। लेकिन अब 2024 के लोकसभा नतीजों ने पूरा खेल बदल दिया है। अब हर पार्टी की नज़र दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक वोटों पर है। क्यों? क्योंकि ये वोट बैंक तो ऐसे हैं जैसे क्रिकेट में टी20 के फाइनल ओवर – जीत या हार इन्हीं पर निर्भर करती है!
चुनावी रणनीति: कौन क्या बजा रहा है?
अब तो मजा आ गया है! TMC वालों ने फिर से ‘बंगाली स्वाभिमान’ का राग अलापना शुरू कर दिया है। वहीं BJP वाले हिंदुत्व और राष्ट्रीय एकता की बात कर रहे हैं। और भूल गए क्या वामदलों को? जो पिछले कुछ चुनावों से गायब थे, वो अब ‘सामाजिक न्याय’ और ‘आर्थिक समानता’ के नारे लेकर वापसी कर रहे हैं। CAA-NRC और आरक्षण जैसे मुद्दों ने तो पूरे माहौल को और गर्म कर दिया है। ऐसा लगता है जैसे राजनीति का प्रेशर कुकर बिल्कुल उफान पर है!
नेताओं के बयान: कौन क्या कह रहा?
TMC वाले तो BJP पर सीधा हमला बोल रहे हैं – “ये लोग हमारी संस्कृति को नष्ट करना चाहते हैं!” वहीं BJP वालों का जवाब – “भ्रष्टाचार और अपराध का जनक तो TMC ही है!” और बीच में वामदल वाले… उनका कहना है कि ये दोनों ही पार्टियाँ जनता के असली मुद्दों से भाग रही हैं। पर सच तो यह है कि आम आदमी को चाहिए रोजगार, अच्छी शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ। लेकिन क्या कोई इन मुद्दों पर बात कर रहा है? शायद नहीं।
आगे क्या? 2026 की राजनीतिक पहेली
2026 का चुनाव तो एकदम रोमांचक होने वाला है। विश्लेषक कह रहे हैं कि ध्रुवीकरण (Polarization) बढ़ेगा, सामाजिक तनाव बढ़ेगा। CAA, NRC जैसे मुद्दे फिर से सुर्खियों में आ सकते हैं। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या विपक्षी दल एक साथ आ पाएंगे? या फिर उनकी आपसी फूट BJP और TMC को और मजबूत कर देगी? एक बात तो तय है – अगले दो सालों में बंगाल की राजनीति में धमाल मचने वाला है। और हम सब इसके साक्षी बनने जा रहे हैं। क्या आप तैयार हैं?
2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: जानिए क्या हो सकता है बड़ा गेम-चेंजर?
2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कब होगा? क्या तारीखें तय हैं?
देखिए, अगर पैटर्न की बात करें तो अप्रैल-मई 2026 के आसपास चुनाव होने की पूरी संभावना है। वैसे तो अभी ऑफिशियल डेट्स नहीं आई हैं, लेकिन पिछले ट्रेंड्स देखें तो 2021 के बाद अगला चुनाव तो 2026 में ही होगा न? 5 साल का चक्कर तो चलता ही है।
पश्चिम बंगाल में Identity Politics क्यों है सबसे हॉट टॉपिक?
असल में बात ये है कि बंगाल की राजनीति में धर्म, भाषा और ‘हम कौन’ ये सवाल हमेशा से ही गरम रहा है। TMC और BJP के बीच तो ये मुद्दा ऐसा है जैसे दो बैलों की लड़ाई – कोई पीछे हटने वाला नहीं! Regional identity की बहस तो जैसे चेरी ऑन द केक है।
2026 में कौन-कौन खेलेगा राजनीति का गेम? क्या होगा नया एक्सपेक्टेशन?
मुख्य प्लेयर्स तो वही रहेंगे – TMC, BJP, CPI(M) और Congress। पर सच कहूं तो असली मुकाबला तो दिग्गजों (TMC vs BJP) के बीच ही होगा। बाकी पार्टियां… खैर, उनकी भूमिका तो ज्यादा से ज्यादा kingmaker की ही सकती है।
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Source: India Today – News | Secondary News Source: Pulsivic.com